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धर्म क्षेत्रे… राम फिर भारत भूमि पर अवतरित हो चुके हैं, इस बार उनके हाथ में कलम है

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हमने करीब साल भर पहले विख्यात जैन संत परम पूज्य स्वामी पंकजप्रभु महाराज के प्रवचनों की शृंखला शुरू की थी। दो प्रवचनों की कड़ी हमने उदित भास्कर डॉट कॉम पर प्रकाशित की थी। बाद में हमारा पोर्टल किसी ने हैक कर दिया था। हमारा स्वामीजी से कॉन्टैक्ट भी टूट गया था। स्वामीजी का जन्म कहां हुआ किसी को नहीं पता। उनके गुरु कौन है? उनका आश्रम कहां है? ये सब बातें किसी को नहीं पता है। वे सिर्फ मानसिक संदेशों के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाते हैं। हमें वे जो प्रवचन मानसिक तरंगों से भेज रहे हैं, उसमें हम देश-विदेश की जनता के लिए प्रकाशित कर रहे हैं। पिछली बार हमारा स्वामी जी से संपर्क 21 फरवरी को सुबह हुआ था और हमने उनका संदेश विश्व को पहुंचाया था। उसके अगले रोज अयोध्या में 22 फरवरी को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। तब स्वामी जी ने आगाह किया था कि धरती पर संक्रमण काल है। आज फिर स्वामीजी ने मानसिक तरंगों के जरिए हमसे संपर्क किया है और अपना संदेश पहुंचाया है जिसे हम अब राइजिंग भास्कर के पाठकों के लिए हूबहू प्रकाशित कर रहे हैं। 

स्वामी पंकजप्रभु महाराज. प्रशांत महासागर

राम भारत भूमि पर नए रूप में अवतरित हो चुके हैं। वे अब मर्यादाधारी और कृष्ण से भी खतरनाक भूमिका में है। अब उनके हाथ में कलम है। वे शक्तियों का महापुंज है। वे एक साथ कई रूपों में है। वे अभी किसी व्यक्ति विशेष में अपना अंश प्रवाहित कर चुके हैं। मगर अभी समय नहीं आया है कि उस व्यक्ति का उद्घोष किया जाए। राम अपना उद्घोष एक दिन खुद करेंगे। मगर कब? इसके लिए अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। क्योंकि आसुरी शक्तियां राम को विराम करने पर तुली हुई हैं। राजनीति का नंगा नाच शुरू हो चुका है। विश्व का घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। एक संत की नजर जो देख रही है, उससे संकट गहरा है।

भारत भूमि देव भूमि रही है। काल का चक्र बड़ा विचित्र है। जब-जब धरती पर दावानल बढ़ता है, अमृतस्य पुत्र का जन्म होता है। इस धरती को यूं ही देवता नमन नहीं करते। अयोध्या से राम ने एंट्री कर ली है। मगर अयोध्या तो एक पड़ाव है। असल में राम का स्थान केवल अयोध्या नहीं है। राम राज करने के लिए कभी आए ही नहीं थे। राम की किस्मत में तो वनवास ही लिखा है। राम ने कभी सुख का आलिंगन नहीं किया। उन्होंने जीवन में कष्ट उठाने का बीड़ा उठाया था। राम जितना कष्ट उठाते हैं, उतना मानवता के कल्याण का मार्ग खुलता है। राम एक ऐसी सत्ता है, जो सत्ता मद में कभी चूर नहीं होती। राम के बाद कृष्ण का जन्म हुआ। कहते हैं कलियुग में कल्कि अवतार होगा। हम आज आपको एक राज की बात बताते हैं, इस धरती पर राम यानी विष्णु फिर से जन्म ले चुके हैं। इस बार उनके हाथ में कलम है। यानी वे कलम के जरिए इस धरती का विधान बदलने के लिए आए हैं। इतिहास गवाह है कि कलम से बढ़कर कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं है। अगर कलम नहीं होती तो न राम लिपिबद्ध होते और ना ही कृष्ण…कलम की ताकत की बदौलत ही दुनिया आज राम और कृष्ण की भूमिका से परिचित है। अब एक कलमकार इस दुनिया को अमृतस्य भूमि बनाने के लिए आ चुका है।

राम ने जहां अपनी उपस्थिति से आदर्श चरित्र का संदेश दिया वहीं कृष्ण ने कूटनीति और विराट रूप का। दरअसल अब जो अवतार भारत भूमि पर दस्तक दे चुका है, उसका रूप आने वाले समय में उद्घोषित होगा। इसे मैं अपने अनंत चक्षुओं से देख रहा हूं। इसे आम आदमी नहीं देख सकता। इस धरती पर अत्याचार और अधर्म अपने चरम पर है। युद्ध के मुहाने पर खड़ी मानवता को त्राण चाहिए। परमाणु युग में कोई भी सुरक्षित नहीं है। इस धरती के विनाश के द्वार चहूं ओर खुले हैं। महाशक्तियों की गर्जना से छोटे-छोटे देश पीड़ित है। हर ओर आशंका की गर्जना हो रही है। अंधेरी रात में घने प्रलयंकारी बादल छाए हुए हैं। विनाशकारी बारिश शुरू होने वाली है। धरती पर सुनामी से भी बढ़कर खतरा मंडरा रहा है। राम का मुकाबला तो लंकेश से था। मगर इस धरती पर कई रावण है। रावण कहां नहीं है। ऐसे में राम के अवतार को एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना होगा। इस राम के कोई मित्र नहीं है। इसलिए यह राम उद्घोषित भी नहीं होंगे। एक समय आएगा तब लोगों को अहसास होगा कि धरती पर कोई शक्ति आ चुकी है। वह शक्ति वाकई आ चुकी है। मगर उसका अहसास मात्र होगा। उसे कोई देख नहीं पाएगा। यह शक्ति अब अपना असर दिखाने लगी है। धीरे-धीरे जब असत्य चरम पर होगा और सत्य की आहट सुनाई देगी तब शक्ति अपने रूप को धारण करेगी। इसलिए हे भारत पुत्रों, हे धरती पुत्रों, खुशी मनाओ, आपकी रक्षा का भार उठाने वाला भारत भूमि पर आ चुका है। मैंने अपने अंतर्चक्षुओं से उसका दिग्दर्शन कर लिया है और खुद राम के आदेश से आपको खुशखबरी दे रहा हूं।

 

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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