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Sunday, March 15, 2026, 1:18 pm

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डॉ. हिम्मतसिंह सिन्हा : अध्यात्म के अध्येता और महान शिक्षाविद…संपत्ति- दो जोड़ी कुर्ता-धोती और एक जोड़ी सैंडिल

शारजाह में डॉ. सिन्हा के विराट व्यक्तित्व पर चर्चा

राइजिंग भास्कर डॉट कॉम. दुबई ( संयुक्त अरब अमीरात)

शारजाह में लोटस ब्लूम पब्लिकेशन और महिला काव्य मंच, मिडिल ईस्ट के संयुक्त तत्वावधान में मनीषी डाॅ. हिम्मत सिंह सिन्हा के धर्म, संस्कृति, दर्शन और शिक्षा पर उनकी ब्रह्मलीन होने के उपरांत विश्व यात्रा का दूसरा पड़ाव आयोजित किया गया।

आयोजनकर्ता केबी व्यास ने बताया कि उनकी पुस्तक “सहज अभिव्यक्ति- भाग ३” का रिव्यू उन्होंने अपने 94 वर्ष तक एकदम स्वस्थ जीने के पश्चात जब वे ब्रह्मलीन हुए तो ब्रह्मलीन होने से मात्र १० दिन पूर्व उन्होंने रिव्यू लिखा था, जो उनकी अंतिम साहित्यिक कृति थी। वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष भी थे। डाॅ. सिन्हा को उर्दू और फ़ारसी के उत्थान के लिए “ फ़क्र-ए-हरियाणा” का भी पुरस्कार प्राप्त था । उनका यू ट्यूब पर “द क्वेस्ट” के नाम से चैनल भी आता है जिसमें 1500 से अधिक एपिसोड्स है। उनका ज्ञान अथाह था, उन्होंने सनातन, बुद्धिज्म, जैन, इस्लाम, ईसाईयत, जरथ्रुत्ट आदि पर अपने सटीक विचारों से सभी को अवगत करवाया।

महिला काव्य मंच की विदेश उपाध्यक्ष, मिडिल ईस्ट की श्रीमती स्नेहा देव ने यह अफ़सोस जताया कि वे इस सदी की इस महान हस्ती से रू ब रू नहीं हो पाई लेकिन उनका यू ट्यूब चैनल देख कर उन्हें सत्य का थोड़ा एहसास होना शुरू हुआ है।

विकास शर्मा जो कुरुक्षेत्र से शारजाह इसी कार्यक्रम में आए थे और जिन्होंने डाॅ. सिन्हा का यू ट्यूब चैनल तैयार किया, उन्होंने बताया कि डाॅ सिन्हा का ज्ञान अनंत था, मगर कई बार ज्ञान का अहंकार भी हो जाता है लेकिन मनीषी डा सिन्हा में अहंकार लेष मात्र भी नहीं था। वे अत्यंत सरल स्वभाव के थे। उन्होंने “ फ़क्र-ए-हरियाणा” में मिले 5 लाख रुपये अपने शिष्यों की बेटियों और अपनी दोहितियों के विवाह हेतु दान कर दिए और उनके पास केवल दो जोड़ी कुर्ता-धोती और एक जोड़ी सैंडिल थे और यही उनकी चल-अचल संपत्ति थी, जबकि उनकी दोनों बेटियों का विवाह सम्पन्न परिवारों में हुआ था। कमलेश भट्ट कमल ने भी उनके कभी मुलाक़ात नहीं होने का दुःख जताया और कहा कि डाॅ. सिन्हा जैसे व्यक्तित्व भारत में दो चार ही है। कार्यक्रम के अंत में कविताओं का पाठ भी किया गया । केबी व्यास ने बताया कि उनके १०० वें वर्ष जो कि 2028 में आएगा तब तक विश्व के 12 देशों में उनका प्रचार-प्रसार होगा। जोधपुर में पहला और शारजाह में दूसरा पड़ाव पूरा हो चुका है तथा तीसरे पड़ाव में हम सभी ओमान जाएँगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor