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Thursday, June 13, 2024, 4:32 pm

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मानवेंद्रसिंह के साथ हो सकता है धोखा, फकीर परिवार कभी भी बदल सकता है पाला

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-जैसलमेर में हनुमान सर्किल पर हुई भारत जोड़ो यात्रा से फकीर परिवार ने बनाई थी दूरियां

जबकि इस कार्यक्रम में मानवेंद्रसिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर, एमएलए रूपाराम मेघवाल, अंजना मेघवाल और गुजरात के कांग्रेस नेता सहित कई कांग्रेसी मौजूद थे, मगर फकीर परिवार का कोई नुमाइंदा नहीं था, इससे जाहिर है फकीर परिवार ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं और वे कभी भी मानवेंद्रसिंह का दामन छोड़ सकते हैं

-इधर कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर ने कांग्रेस आलाकमान को भेजे गोपनीय पैनल के वायरल होने से जैसलमेर-पोकरण की राजनीति में आया भूचाल

-तंवर के पैनल में सालेह मोहम्मद पर संगठन विरोधी गतिविधियों के लगे आरोप, रूपाराम मेघवाल तंवर की पहली पसंद, दूसरे नंबर पर मानवेंद्र का नाम पैनल में भेजा गया

डीके पुरोहित/आनंद एम. वासु

बात करते हैं भारत जोड़ो यात्र से। जैसलमेर के हनुमान सर्किल पर जश्न मनाया जा रहा था। कांग्रेसी बड़े उत्साह में थे। हर कोई उत्साहित और जोश में था। भारत जोड़ो यात्रा के प्रभारी मानवेंद्रसिंह भी इस सभा में मौजूद थे। साथ ही मौजूद थे कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर, एमएलए रूपाराम मेघवाल, अंजना मेघवाल, गुजरात से आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तमाम कांग्रेसी। मगर कोई गैर हाजिर था तो वाे था फकीर परिवार। फकीर परिवार की इस सभा से दूरी बनाए रखना पूरे जैसलमेर में चर्चा का विषय बना रहा। यह फकीर परिवार की सोची समझी साजिश थी। क्योंकि वे खुलकर रूपाराम के पक्ष में नहीं आना चाहते थे और खुलकर मानवेंद्रसिंह का सपोर्ट भी नहीं करना चाहते थे। इससे यह जाहिर है कि फकीर परिवार कभी भी पाला बदल सकता है और जिस जोश में मानवेंद्रसिंह जैसलमेर से चुनावी ताल ठोकर रहे हैं, उनकी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। क्योंकि फकीर परिवार का इतिहास रहा है कि वह कभी किसी एक खूंटे में बंधा नहीं रहा। गाजी फकीर तो अब रहे नहीं, लेकिन सालेह मोहम्मद फकीर परिवार के मुखिया बने हुए हैं और वे जैसलमेर और पोकरण की राजनीति को अपने इशारों पर नचाना चाहते हैं। जो खुद उनके लिए घातक हो सकता है और कांग्रेस के लिए भी।

फकीर परिवार की भारत जोड़ो यात्रा से दूरी बनाए रखने के कई सियासी मायने हैं। रूपाराम से उनकी दुश्मनी जगजाहिर है। मगर राजनीति में कोई किसी का स्थाई शत्रु नहीं होता और ना ही स्थाई दोस्त। ऐसे में बताया तो यही जा रहा है कि सालेह मोहम्मद ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं और हवा का रुख देखते हुए कभी भी गुलांची मार सकते हैं। ऐसे में मानवेंद्रसिंह के सपनों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

मानवेंद्रसिंह पूरे जोश के साथ जैसलमेर विधानसभा चुनाव लड़ने के मूड में हैं। लेकिन उनका उत्साह अधिक दिनों तक चलने वाला नहीं है। एक तो जैसलमेर की जनता वैसे भी मानवेंद्रसिंह को पसंद नहीं करती। क्योंकि पिछले पांच साल में उन्होंने जैसलमेर की उपेक्षा की। वो भी तब जैसलमेर-बाड़मेर लोकसभा चुनाव में उन्हें जैसलमेर से सर्वाधिक वोट मिले। लेकिन बड़े लोगों की बातें भी बड़ी होती है। वे कहते कुछ हैं और करते कुछ। उन्होंने जैसलमेर की जनता को भुला ही दिया। खुद उनका ठिकाना नहीं है। आज भाजपा में तो कल कांग्रेस में। मौकापरस्त लोगों को जनता अच्छी तरह जानती है। जबकि रूपाराम एक बार चुनाव हारने के बाद भी पब्लिक के बीच रहे और दूसरे चांस में एमएलए बन भी गए। उनकी जीत काफी बडी थी। मगर अशोक गहलोत ने रूपाराम को मंत्री ना बनाकर अपनी परंपरागत मुस्लिम स्नेही सोच के चलते सालेह मोहम्मद को मंत्री बनाया। जबकि उनके सही हकदार रूपाराम मेघवाल थे। फिर भी रूपाराम ने धीरज रखा और जैसलमेर की जनता की सेवा करते रहे। मगर सालेह मोहम्मद ने एक बार फिर पाला बदला और अब मानवेंद्रसिंह की पूंछ बने घूम रहे हैं। खुद सालेह मोहम्मद का पोकरण में जनाधार खिसका हुआ है। वे संगठन विरोधी गतिविधियों में भी शामिल रहे और संगठन को कमजोर करने में अपना दिमाग लगाते रहे।

लबोलुआब यह है कि फकीर परिवार या कहें कि सालेह मोहम्मद हवा का रुख देखते हुए कभी भी पाला बदल सकते हैं। अगर रूपाराम काे जैसलमेर से और पोकरण से फिर से सालेह मोहम्मद को टिकट मिल गई तो सालेह मोहम्मद की रूपाराम के साथ रहने की मजबूरी रहेगी। नहीं तो उनका हारना तय है। ऐसे में मानवेंद्रसिंह के साथ कभी भी धोखा हो सकता है। इन दिनों जैसलमेर में जगह-जगह मानवेंद्रसिंह के होर्डिंग नजर आ रहे हैं। होर्डिंग में मानवेंद्रसिंह जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन पिछले पांच-दस सालों में उन्होंने जैसलमेर की जनता के सुख-दुख भी नहीं पूछे। अपनी ठकुराई में रहे और अब पैराशूट उम्मीदवार बनकर जैसलमेर से ताल ठोक रहे हैं।

फकीर परिवार का इतिहास, धोखा उनके स्वभाव में

फकीर परिवार के मुखिया गाजी फकीर का हमेशा का इतिहास रहा है कि वे कभी खूंटे से बंधे नहीं रहे। कहने को कांग्रेसी रहे मगर जिधर हवा का रुख रहा उधर बिखर गए। उनकी मौत के बाद फकीर परिवार का जादू तो वैसे ही खत्म हो गया है, मगर सालेह मोहम्मद को मुस्लिम वोटों पर अब भी भरोसा है। ऐसे में सालेह मोहम्मद जैसलमेर और पोकरण की राजनीति को अपने इशारों पर नचाना चाहते हैं, मगर जनता अब समझदार है। सालेह मोहम्मद के झांसे में आने वाली नहीं है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष तंवर के पैनल की सूची वायरल होने से आया भूचाल

इधर जैसलमेर कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर ने विधानसभा चुनाव को लेकर जैसलमेर और पोकरण से संभावित उम्मीदवारों का जो पैनल भेजा था, उसके वायरल होने से जैसलमेर की राजनीति में भूचाल आ गया है। तंवर ने जो पैनल भेजा है उसमें वर्तमान विधायक रूपाराम मेघवाल को पहले नंबर पर रखा है और दूसरे नंबर पर मानवेंद्रसिंह को। तंवर ने लिखा है कि वर्तमान विधायक जैसलमेर विधानसभा चुनाव 2018 में विधानसभा जैसलमेर से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव में लड़ते हुए 56.72 प्रतिशत मत हासिल किए। 29,778 वोटों से भाजपा प्रत्याशी सांगसिंह भाटी से बढ़ते लेते हुए विजयी हुए। मंत्री सालेह मोहम्मद और उनका परिवार जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचा रहा है। वर्तमान में सरकार विरोधी लहर नहीं है, लेकिन प्रत्याशी के विरद्ध 15 प्रतिशत विरोधी लहर है, इसके उपरांत आज सबसे मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी आप ही है।

मानवेंद्रसिंह के बारे में लिखा है कि बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा तथा 522718 मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे। लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र जैसलमेर से 52.91 मत हासिल कर भाजपा से बढ़त ली, लेकिन लोकसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी से पिछड गए। वर्तमान में राजस्थान राज्य सरकार के सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं एवं विधानसभा क्षेत्र जैसलमेर में सक्रियता नगण्य है।

तंवर ने पैनल में पोकरण विधानसभा क्षेत्र के बारे में लिखा है कि वर्तमान में पोकरण विधायक तथा राजस्थान सरकार में केबिनेट मंत्री है सालेह मोहम्मद। चुनाव 2018 में भाजपा प्रत्याशी से सिर्फ 789 वोटों से जीते। विधानसभा क्षेत्र की आम जनता में विधायक के विरुद्ध भारी आक्रोश है एवं कार्यकर्ताओं में भयंकर नाराजगी है। कांग्रेस संगठन से लगातार दूरी बनाए हुए हैं। गुटबाजी कर कांग्रेस पार्टी व संगठन को कमजोर कर रहे हैं। इसके बावजूद भी पोकरण विधानसभा क्षेत्र में सबसे मजबूत प्रत्याशी के रूप में आपका कोई विकल्प नहीं है। इसके बाद नाम आता है रमेश माली का। मूल ओबीसी वर्ग के 65000 मतदाताओं में से कांग्रेस के दो बार पार्षद रहे एवं वर्तमान में भी पार्षद हैं। इसके बाद नाम आता है इस्माल खां मेहर का। वे सन 1985 से कांग्रेस पार्टी में लगातार सक्रिय हैं। एक बार जिला परिषद सदस्य एवं दो बार सरपंच तथा पुत्र दो बार पंचायत समिति सदस्य एवं प्रधान रह चुके हैं।

सूची वायरल किसने की, अंदाजा सीएम हाउस से वायरल हुई

कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर की सूची गोपनीय थी। ऐसी सूची गोपनीयता से भरपूर होती है। इसको लीक करने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। अंदाजा तो यही लगाया जा रहा है कि सीएम हाउस से सूची वायरल हुई। क्योंकि आमतौर पर ऐसी गोपनीय सूची कोई और वायरल कर ही नहीं सकता। ऐसे में एक बार फिर कांग्रेस में गुटबाजी चौड़े आ गई है।

क्या पैनल में फिर दूसरे नाम भेजे जाएंगे? 

कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर ने जो पैनल की गोपनीय सूची भेजी थी, उसके वायरल होने से कांग्रेस का सारा खेल बिगड़ गया है और एक बार फिर गुटबाजी सामने आ गई है। सूची वायरल होना उच्च स्तर पर ही हो सकता है।बताया तो यही जा रहा है कि सीएम हाउस से सूची वायरल की गई है। अन्यथा और कोई माध्यम ही नहीं है कि सूची वायरल हो जाए। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या पैनल दुबारा बनाया जाएगा। फिर से कोई नाम भेजे जाएंगे। कुछ भी हो कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

रूपाराम की जगह अंजना मेघवाल को मिल सकती है टिकट

बताया जा रहा है कि अब जैसलमेर कांग्रेस कमेटी की ओर से दूसरी सूची का पैनल भेजा जाएगा। इसमें जैसलमेर से रूपाराम या अंजना मेघवाल को भी टिकट मिल सकता है। मगर पोकरण में किसको टिकट मिलेगा यह कहना अभी जल्बाजी होगी। इधर सुनीता भाटी भी टिकट मांग रही है। अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय भी खड़ी हो सकती है।

 

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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