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Friday, June 21, 2024, 12:29 am

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सरदारपुरा सीट : गजेंद्रसिंह कतरा रहे, भाजपा संतम शरणं गच्छामि…

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-भाजपा ने सीएम अशोक गहलोत को घेरने की पूरी प्लानिंग की है, मगर सफल होती नजर नहीं आ रही, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत यूं तो गहलोत को हमेशा निशाना बनाता रहे हैं, मगर सरदारपुरा सीट से खड़े होने से कतराते नजर आ रहे हैं, ऐसे में भाजपा बड़े संत को उतारने का मानस बना रही है

-सीएम गहलोत को उनके गढ़ में हराना चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में भाजपा पूरा दम लगा रही है, मगर उसे गहलोत के टक्कर का उम्मीदवार मिलता नजर नहीं आ रहा है, पिछले दिनों गजेंद्रसिंह शेखावत के नाम की टिकट की अफवा उड़ने के बाद खुद शेखावत परेशानी में आ गए थे, क्योंकि गहलोत को उनके गढ़ में हराना आसान नहीं है

डीके पुरोहित. जोधपुर

इन दिनों जोधपुर में एक ही चर्चा हो रही है और वह यह है कि क्या गजेंद्रसिंह शेखावत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गढ़ सरदारपुरा सीट से चुनाव लड़ेंगे। गजेंद्रसिंह शेखावत और गहलोत का छत्तीस का आंकड़ा रहा है। शेखावत ऐसा कोई मौका नहीं चूकते जब उन्हें गहलोत को घेरने का मिला हो। लेकिन जब बात सरदारपुरा सीट से गहलोत को टक्कर देने के लिए उन्हें टिकट देने की आई तो वे भी कतराते नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों जब सोशल मीडिया पर एक फर्जी लिस्ट जारी हुई और उसमें गजेंद्रसिंह शेखावत को सरदारपुरा सीट से टिकट देना बताया तो शेखावत को उसका खंडन करना पड़ा। पार्टी भी उन्हें गहलोत के सामने लड़ने से कतरा रही है। क्योंकि गहलोत के कद के आगे शेखावत कहीं टिकते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में शेखावत ने इन दिनों चुप्पी साध रखी है और उन्होंने निर्णय पार्टी पर छोड़ दिया है।

जोधपुर की जनता भी चाहती है कि शेखावत में दम है तो गहलोत को पटखनी देकर बताए। जनता के मन में कई सवाल है। खासकर शेखावत जब-जब गहलोत पर आरोपबाजी करते रहे तो उन्हें बड़ी कोफ्त होती रही है। ऐसे में जनता भी जानना चाहती है कि क्या वे अपने धुर विरोधी गहलोत के सामने चुनाव लड़ेंगे? लेकिन इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। क्योंकि शेखावत अपनी राजनीतिक हत्या तो नहीं करना चाहेंगे।

सरदारपुरा सीट हमेशा से गहलोत की परंपरागत सीट रही है और लगभग हर बार वे जीतते रहे हैं। यही वही सीट है जो गहलोत के लिए लक्की रही है और उन्हें मुख्यमंत्री का ताज तक मिला। गहलोत जोधपुर की जनता के चहेते रहे हैं। जोधपुर को लेकर उनके मन में हमेशा विकासात्मक सोच रही है। ऐसे में जनता के मन में गहलोत के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रहा है। भाजपा हर हाल में गहलोत को हराना चाहती है और इसके लिए हर दंद-फंद अपनाने का तैयार है। इसके लिए बताया जा रहा है कि भाजपा ने जोधपुर के एक बड़े संत से संपर्क साधा है। सूत्रों की मानें तो संत ने अभी तक हां नहीं भरी है और सोच कर जवाब देने को कहा है। आगामी दिनों में दिल्ली में होने वाली भाजपा की बैठक में दूसरी सूची पर मोहर लगेगी। ऐसे में संत ने सोमवार तक जवाब मांगा गया है। अगर संत चुनाव लड़ने से मना करते हैं तो भाजपा के सामने दूसरा कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है। जहां तक संत की बात है गहलोत के प्रति संत के मन में भी नाराजगी नहीं है। इसलिए संत भी सारी परिस्थितियों पर सोच-विचार कर ही निर्णय लेना चाहते हैं।

शेखावत के सामने धर्मसंकट, चुनाव लड़ना तय, मगर कहां से अभी तय नहीं

गजेंद्रसिंह शेखावत को अपना दबदबा कायम रखना है तो चुनाव तो लड़ना ही पड़ेगा। मगर उनके सामने धर्मसंकट खड़ा हो गया है। आखिर वे कहां से चुनाव लड़ेंगे? इस बारे में कई कयास लगाए जा रहे हैं। मगर इतना तय है कि वे गहलोत के सामने तो खड़े नहीं होंगे। गहलोत के सामने अगर उनकी हार होती है तो उनकी राजनीतिक हत्या हो जाएगी। भविष्य में भी सारे रास्ते बंद हो जाएंगे। उनकी महत्वाकांक्षा पर भी पानी फिर जाएगा। ऐसे में शेखावत कहां से चुनाव लड़ेंगे आलाकमान अभी तय नहीं कर पाया है। अभी तक तो कयास ही लगाए जा रहे हैं। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि उन्हें शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया जाए। यह भी संभावना है कि पार्टी उन्हें लोहावट या पोकरण से टिकट दे सकती है। मगर दिक्कत यह है कि अगर जैसलमेर से कांग्रेस मानवेंद्रसिंह को टिकट देती है तो पोकरण से शेखावत के सामने संकट खड़ा हो सकता है। परेशानी भाजपा की यह भी है कि जैसलमेर से छोटूसिंह और सांगसिंह भाटी भी टिकट मांग रहे हैं। ऐसे में दो राजपूत उम्मीदवारों को जैसलमेर और पोकरण से टिकट देना संभव नहीं है। अब बचती है लोहावट विधानसभा। संभावना यही जताई जा रही है कि उन्हें लोहावट से पार्टी खड़ा कर सकती है। संजीवनी वाले मामले में गहलोत के दनादन आरोप के बाद शेखावत बैकफुट पर आ गए हैं। लोगों की नाराजगी अभी भी शेखावत के प्रति कम नहीं हुई है। इसलिए शेखावत हर कदम फूंक फूंक कर रखना चाहते हैं। उन्हें मुख्यमंत्री की दौड़ में पहले भी बताया जाता रहा है। इसलिए उनका चुनाव में जीतना बहुत जरूरी है। ऐसे में उनके लिए कौनसा क्षेत्र तय किया गया है, इसके बारे में अभी तक कुछ भी तय नहीं है।

जब कोई रास्ता नजर नहीं आता तो भाजपा को संत याद आते हैं

भाजपा की यह परंपरा रही है कि जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो वह हिंदुत्व और संतों का सहारा लेती नजर आती है। इस बार भी जोधपुर में ऐसा ही होता नजर आ रहा है। गहलाेत को घेरने की रणनीति के तहत भाजपा ने जोधपुर के एक बड़े संत को गहलोत के सामने मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है। मगर संत ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। भाजपा की यह परंपरा रही है कि जब-जब पार्टी पर संकट आता है तो उसे संत समाज ही खेवनहार नजर आता है। जोधपुर में गहलोत को पटखनी देने के लिए अब भाजपा एक बार फिर संतम शरम गच्छामी होती नजर आ रही है।

सबसे बड़ा सवाल : गहलोत के सामने चुनाव लड़ने से शेखावत कतरा क्यों रहे?

जनता के मन में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जो गहलोत शेखावत को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं तो फिर गहलोत के सामने चुनाव लड़ने से शेखावत कतरा क्यों रहे हैं? अगर शेखावत को अपनी राजनीतिक ताकत दिखानी है तो गहलोत को हराना ही होगा। एक मुख्यमंत्री के दावेदार को मुख्यमंत्री को ही हराना चाहिए। मगर इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। गहलोत को सरदारपुरा में हराना आसान नहीं है। ऐसा नहीं है कि यह असंभव है। मगर शेखावत और गहलोत दोनों को जनता जानती है और किसको कितना वैटेज देना है, यह भी जानती है। इसलिए शेखावत गहलोत के सामने खड़े होने का मानस नहीं बना रहे हैं। लेकिन जनता जानना चाहती है कि भाजपा आखिर शेखावत को गहलोत के सामने क्यों मैदान में नहीं उतार रही। शेखावत की ताकत का अंदाजा तभी लगेगा जब वे गहलोत को उनके गढ़ में हराए।

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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