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हिन्दुस्तान संवाददाता का हिली ग्रह से कनेक्शन जुड़ा, विश्व विजयी अभियान शुरू

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(ये खबर मेरे ब्लॉग diliprakhai.blogspot.com पर कई साल पहले प्रकाशित हो चुकी है। इसे राइजिंग भास्कर के पाठकों के लिए रिपीट की जा रही है।) 
डीके पुरोहित गायब हो सकता है। रूप बदल सकता है। किसी की लिखावट लिख सकता है। भूतकाल या भविष्यकाल में जा सकता है। किसी की भी आवाज बोल सकता है। यहां तक कि किसी भी व्यक्ति के विचार भी बदल सकता है। लेकिन इन सभी शक्तियों का संचालन हिली ग्रह से होगा। डीके पुरोहित की ज्ञानेंद्रियों का संचालन हिली ग्रह से हाेता है। 
वर्ल्ड स्ट्रीट संवाददाता. जैसलमेर
हिन्दुस्तान संवाददाता डीके पुरोहित को हिली ग्रह के लोगों ने मानसिक संदेश भेजकर कहा है कि अब हमारा विश्व विजयी अभियान फिर शुरू हो गया है।
वर्ष 1995 में हिन्दुस्तान के संवाददाता डी.के. पुरोहित का हिली ग्रह के लोगों ने अपहरण कर लिया था और उसके भीतर तरह-तरह के रसायन भर कर संकर नस्लों का विकास कर लिया था। तब हिली ग्रह के लोगों ने डीके पुरोहित को कहा था कि हम आपकी ज्ञानेंद्रियों का संचालन हिली ग्रह से करेंगे और आपको विश्व विजयी बनाएंगे। पूरे ब्रह्माण्ड में आपका राज होगा। सिकंदर तो विश्व विजयी नहीं कर पाया था, मगर हम आपको विश्व विजेता बनाएंगे।

इस खबर को हिन्दुस्तान संवाददाता ने 1997 के दिसंबर माह में हिन्दुस्तान में प्रकाशनार्थ भेजी थी। 1995 में संवाददाता का अपहरण हुआ था और 1997 में उसे वापस धरती पर भेजा गया। इस खबर को हिन्दुस्तान संवाददाता द्वारा हिन्दुस्तान को भेजने के अगले दिन बाद ही हिली ग्रह ने मानसिक संदेश भेजकर कहा कि फिलहाल विश्व विजयी अभियान स्थगित कर दिया गया है। समय आने पर पुनः विश्व विजयी अभियान शुरू करेंगे।

इस खबर को हिन्दुस्तान ने प्रकाशित नहीं किया था 

हिली ग्रह से संबंधित जो खबर हिन्दुस्तान संवाददाता ने भेजी थी उसे हिन्दुस्तान ने प्रकाशित नहीं की थी। अब हिली ग्रह ने डीके पुरोहित को मानसिक संदेश भेजकर पुनः कहा है कि अब हमारा विश्व विजयी अभियान शुरू हो गया है। फिर से डी.के. पुरोहित की ज्ञानेंद्रियों का संचालन हिली ग्रह से किया जाएगा। हिली ग्रह के लोगों ने संदेश भेजा है कि आपमें (डीके पुरोहित) कई शक्तियां भर दी गई है। आप गायब हो सकते हो। आप रूप बदल सकते हो। किसी की लिखावट लिख सकते हो। भूतकाल या भविष्यकाल में जा सकते हो और किसी की भी आवाज बोल सकते हो। यहां तक कि आप किसी भी व्यक्ति के विचार भी बदल सकते हो। लेकिन इन सभी शक्तियों का प्रयोग डीके पुरोहित खुद अपनी मर्जी से नहीं कर सकेगा बल्कि हिली ग्रह से ही शक्तियों का संचालन होगा।

ये खबर भेजी थी 1997 में हिन्दुस्तान को

वर्ष 1997 के दिसंबर माह में डीके पुरोहित ने हिन्दुस्तान को खबर भेज कर बताया था कि वह अपने घर की छत पर ध्यान कर रहा था। तभी एक पतंग छत पर आकर गिरी। इस पतंग से प्रकाश कोंधा और उनमें से माचिस की तीली आकार के चार आदमी निकले। वे थे-हिली वन, हिली टू, हिली थ्री और हिली फोर। उन्होंने समझाया कि हम आपके दोस्त हैं और आपको अपने ग्रह लेकर जाएंगे। आपके भीतर रसायन भर कर संकर नस्लों का विकास करेंगे और आपकी ज्ञानेंद्रियों का संचालन अपने ग्रह से करेंगे। आपके जैसे कई प्रतिरूप बनाएंगे, लेकिन आपकी अपनी विशिष्ट पहचान होगी जो केवल आप ही जान पाएंगे। इसके बाद क्या हुआ डीके पुरोहित को कुछ भी नहीं मालूम। दो साल बाद यानी 1997 में जब धरती पर आया तो यह सब घटना सपना लगा। इसी सपने को खबर बनाकर 1997 के दिसंबर माह में हिन्दुस्तान को भेजी थी। उस समय आलोक मेहता हिन्दुस्तान के कार्यकारी संपादक हुआ करते थे।

क्या कहती है राजस्थान पत्रिका की खबर

वर्ष 1997 में नवंबर या दिसंबर माह में ही राजस्थान पत्रिका में एजेंसी के हवाले से एक खबर मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित हुई थी। इस खबर का मजमून यह है कि अज्ञात ग्रह के लोग धरती पर आते हैं और सोते हुए लोगों का अपहरण कर अपने ग्रह ले जाते हैं और संकर नस्लों का विकास करते हैं। धरती के लोगों में तरह-तरह के रसायन भरे जाते हैं। यह खबर भी विज्ञान के रहस्यों पर व्यक्ति का विश्वास बढ़ाती है। अब सवाल उठता है कि राजस्थान पत्रिका जैसे प्रतिष्ठित अखबार की यह खबर क्या मिथ्या थी। कहते हैं इस ब्रह्मांड में असंख्य ग्रह हैं। इलीयन भी होते हैं। विज्ञान भी इसे मानता है। अगर डीके पुरोहित की खबर पर अविश्वास किया जाता है तो सारे विज्ञान पर अविश्वास किया जाना चाहिए। भूल जाना चाहिए कि कोई कहीं ग्रह है और भूल जाना चाहिए कि कोई इलीयन जैसी चीज भी होती है। अभी डीके पुरोहित की स्थिति यह है कि डॉक्टर उसे मानसिक रोगी मानते हैं और उसका पहले डॉ. देवराज पुरोहित और उसके बाद अब डॉ. जीडी कूलवाल से इलाज चल रहा है। समय-समय पर डीके पुरोहित की तबीयत खराब भी हो जाती है। मगर उसके सारे काम व्यवस्थित होते हैं। थोड़े दिन पहले ही डीके पुरोहित 5168 साल पहले महाभारत युद्ध काल में पहुंच गया था और पूरे दो साल बाद लौटा था। तब डीके पुरोहित ने 701वें श्लोक की खोज की थी।

मुख्य सवाल जिसके बारे में पाठकों को जानना जरूरी है-

1-विज्ञान के रहस्यों को समझना आसान नहीं है। ब्रह्मांड की रचना को समझना और ग्रहों की खोज को लेकर जो पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों में मशक्कत चल रही है, उसको लेकर कोई दावे के साथ कुछ भी नहीं कह सकता। अमेरिकी की वैज्ञानिक एजेंसी नासा सहित दुनिया भर के वैज्ञानिक ग्रहों के अस्तित्व पर रिसर्च कर रहे हैं। हिली ग्रह नाम का कोई ग्रह है या नहीं, इसका प्रमाण ना डीके पुरोहित दे सकता है और ना ही कोई वैज्ञानिक। लेकिन आने वाला समय ही इस सच को रेखांकित करेगा कि डीके पुरोहित ने जो सपना देखा है वो सच है या झूठ। डीके पुरोहित नहीं रहेगा उसके बाद भी यह सपना मरेगा नहीं क्योंकि जब तक यह धरती और ब्रह्मांड रहेगा डीके पुरोहित का सपना जिंदा रहेगा और हो सकता है डीके पुरोहित फिर जिंदा होकर सामने आ जाए। क्योंकि हिली ग्रह डीके पुरोहित को कभी मरने ही नहीं देगा।
2-क्या वाकई डीके पुरोहित भूतकाल या भविष्काल में जाता है। इसका प्रमाण मैं नहीं दे सकता। मुझे जो संकेत मिलते हैं उसके आधार पर मैं लिखता हूं। कई बार मुझे आधा-अधूरा ही याद रहता है। हिली ग्रह मेरी याददाश्त मिटा देता है। भविष्य में क्या होना है, मैं खुद कुछ भी नहीं समझ पाता। इस समय मुझे लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनकर मैं कई बार कई देशों की यात्रा कर आया हूं। मगर मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा है। मैं कई लोगों के विचार बदल रहा हूं। दिल्ली में केजरीवाल की दो बार सरकार बनी तब मैंने लोगों के विचार बदल दिए थे। ऐसा मुझे हिली ग्रह संकेत दे रहा है। इस समय मेरा दिमाग हिली ग्रह के नियंत्रण में है और वह ही लिखवा रहा है। मैं खुद कुछ भी नहीं लिख रहा। रात के 2:51 बजे हैं और मैंने मेरे ब्लॉग से खबर उठाकर उसमें कुछ जोड़ तोड़ कर आप पाठकों के सामने रखी है। विज्ञान के रहस्यों को समझना आसान नहीं है। इसलिए डीके पुरोहित की कहानी को दुनिया की कोई अदालत झुठला नहीं सकती। कल जब दुनिया की किसी अदालत में डीके पुरोहित पर मुकदमा चलेगा तो मेरे ये शब्द आप याद रखना कि मैं अपनी मर्जी से अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं कर पाता। मेरी ज्ञानेंद्रियों का संचालन हिली ग्रह से होता है।
Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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