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Friday, June 21, 2024, 11:04 pm

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पत्रकार दिवस पर विशेष : पुलिस और मीडिया के रूप में नए माफिया को कौन खत्म करेगा मेहरड़ा जी!

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जोधपुर के पत्रकार नवीनदत्त को रिश्वत के मामले में रंगेहाथ गिरफ्तार करने पर पीठ ना थपथपाए एसीबी डीजी साहब, अभी मीडिया और पुलिस के कई माफियाओं का खात्मा होना बाकी है…

एसीबी के डीजी डॉ. रविप्रकाश मेहरड़ा के नाम राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर डीके पुरोहित का खुला पत्र

प्रिय डॉ. मेहरड़ा जी,

आप जोधपुर के पत्रकार नवीनदत्त को एक लाख की रिश्वत के आरोप में और 60 हजार रुपए रंगेहाथ लेते गिरफ्तार करने के मामले में विज्ञप्ति जारी कर चुके हो। सारा मीडिया जगत इस खबर को अपने-अपने ढंग से प्रकाशित कर चुका है और कर रहा है। हमारी आदत है हम खबर को कई बार तुरंत प्रकाशित करें ना करें मगर नजर जरूर रखते हैं। आपके नेतृत्व में एसीबी ऐसे ही निर्भीकता से काम करती रहे, हम यही कामना करते हैं। मगर मेहरड़ा जी, क्या आप इस बात से इनकार करेंगे कि आज पुलिस और मीडिया के बीच माफिया की तरह रिश्ते हो गए हैं। इस बात को आप अच्छी तरह जानते हैं। अगर आप नहीं जानते तो आपसे ज्यादा सच पर पर्दा डालने वाला कोई आईपीएस अफसर नहीं होगा। यह खुला पत्र हम आप जो वाह-वाही लूट रहे हैं और हम एक पत्रकार की बली दे चुके हैं, उसके बाद आपको पत्रकार दिवस पर भारी मन से लिख रहे हैं। हम न पत्रकार का पक्ष ले रहे हैं और न ही इस बात पर खुशी जता रहे हैं। क्योंकि पत्रकार जगत बदनाम हो रहा है। एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है। मगर डीजी साहब भ्रष्टाचार की गंगा हमेशा हिमालय से निकलती है। सारा मीडिया जगत भ्रष्ट है। इसकी शुरुआत मालिकों से होती है।

आप माने या ना माने हमारे कोई फर्क नहीं पड़ता, मगर सच्चाई यही है कि छोटे-छोटे स्ट्रींगर से लेकर एक संपादक और चीफ संपादक तक को मीडिया के मालिक भ्रष्ट बनाते हैं। ये मीडिया हमारे घरों में सफेदपोश के रूप में कभी चैनलों के माध्यम से तो कभी बड़े बड़े अखबार ग्रुप के माध्यम से रोज दस्तक देता है। हमारी दैनिक जिंदगी का हिस्सा बन गया है। हजारों लाखों पाठकों और श्रोताओं तक पकड़ बना चुका मीडिया दरअसल पुलिस के साथ मिलकर सबसे बड़ा माफिया राज चला रहा है। यह बात राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, पूरे देश में यही नौटंकी चली आ रही है। यह नौटंकी आज से नहीं आजादी के बाद से ही चली आ रही है। हम यह नहीं कहते कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद इस पुलिस और मीडिया के माफियाराज पर नकेल लग चुकी है। अभी भी यह गठबंधन फल-फूल रहा है। दरअसल इसकी जड़े हमारे स्वार्थ से जुड़ी है। इस देश में मीडिया जगत पर पूंजीवादी ताकतों का पहरा है। पूंजीवादी ताकतें ही इस देश को चला रही है। ना केवल चला रही है बल्कि अपने अपने हिसाब से नचा रही है। कौनसी सरकार आनी है? हर कालखंड में सरकार के आने से पहले मीडिया घराना उसका महिमामंडन करता है। अक्सर यही भविष्वाणी सच होती है, कुछ अपवादों को छोड़कर। मगर इसके लिए मीडिया पहले से माहौल बनाता है। हम यह नहीं कहते कि केवल नरेंद्र मोदी के लिए मीडिया ने माहौल बनाया, नरेंद्र मोदी तो दस साल से देश के प्रधानमंत्री है। मीडिया ने हर युग में अपनी छाप छोड़ी है। अमिट छाप। इसलिए कांग्रेस अगर राजा हरिश्चंद्र बनती है तो गलत है। कांग्रेस अगर कहती है कि मीडिया का दुरुपयोग हो रहा है तो गलत है, क्योंकि इसकी जन्मदाता खुद कांग्रेस रही है। इसलिए यही टेक्निक अब बीजेपी अपना रही है। इसमें मीडिया ने माफिया की भूमिका निभाई है। खासकर पत्रकारिता के नाम पर पुलिस और मीडिया के बीच एक नए तरह के माफिया ने जन्म ले लिया है और इस सबके बीच में राजनीति ने नासुर का काम किया है। रही सही कसर न्यायपालिका, पूंजीवादी ताकतों, दबाव समूहों और यूनियनों ने पूरी कर दी है। कुल मिलाकर एक ऐसी चैन बन चुकी है, जिसे तोड़ना किसी भी सरकार के वश में नहीं है। क्योंकि सरकार के बूते से बात बाहर निकल चुकी है।

तो मेहरड़ा जी आपको मुबारक। आपने एक पत्रकार की गिरेबान पर हाथ डाला है। अब हम आपको बताते हैं कि आपका पुलिस महकमा कैसे और कितना भ्रष्ट है। सबसे पहले तो आपका अपना विभाग खंगालिए। पिछले दस सालों में कितने एससीबी के अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार हुए हैं? कितनों पर आरोप लगे हैं? उनके खिलाफ किस स्तर पर मुकदमे चल रहे हैं? कितनों को सजा हुई? कितने बरी हो गए? इसका पूरा कच्चा चिट‌ठा लेकर हम फिर किसी मंच पर आएंगे और तब आपसे एक-एक सवाल का जवाब पूछ़ेंगे और तब यह भी पूछेंगे कि एसीबी का स्टैंड अब क्या है? बात यहां खत्म नहीं हो जाती। पूरे पुलिस महकमे में भांग पड़ चुकी है। अच्छे और निर्भीक आईपीएस अफसरों को फील्ड पोस्टिंग नहीं मिलती। मलाईदार पोस्टों पर भ्रष्ट आईपीएस अफसरों और नाकारा अफसरों की पोस्टिंग होती है। जो सरकार के गुड बुक्स में होते हैं और जिन्होंने जिंदगी पर पूंछ हिलाऊ अधिकारी की भूमिका निभाई उनके ही प्रमोशन होते हैं और उन्हें ही और सितारे मिलते जाते हैं। मेहरड़ा जी आप जिस पद पर है वहां एक पत्रकार के साठ हजार आपको दिखते हैं, मगर अरबों रुपयों के टेंडर लेने वाले और देने वाले अफसर और नेता आपको दिखाई नहीं देते। इसके बीच में जो पुलिस और मीडिया का माफिया पनप रहा है वो आपको नहीं दिख रहा। धैर्य रखें हम धीरे-धीरे सबको बेनकाम करेंगे। तब हम देखेंगे कि आपका एसीबी डीजी पद पर होना कितना जिम्मेदार रवैया अपनाता है।

मेहरड़ा साहब हम आपको तब से जानते हैं जब आप जैसलमेर में एसपी बनकर आए थे। आप किन सीढियों को चढ़ते हुए एसीबी के डीजी पद पर पहुंचे हैं, इसका भी हमें भान है। हम आपकी काबलियत पर बिलकुल सवाल नहीं उठा रहे, मगर हम चाहते हैं कि आप राज्य में ऐसी मुहिम चलाएं कि सभी भ्रष्ट पत्रकारों और सभी भ्रष्ट पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई हो। पुलिस से बड़ा भ्रष्ट तंत्र इस हिन्दुस्तान में कोई नहीं है। राज्य भी इससे अछूता नहीं है। जोधपुर में उम्मेद क्लब जैसे छोटे से क्लब में पुलिस का क्या रिश्ता रहा है, इसको जानना हो तो आरटीआई कार्यकर्ता नंदलाल व्यास से पूछ सकते हैं, जिन्हें पुलिस ने जलिल किया और फंसाने की कोशिश की। पुलिस के अफसरों ने उम्मेद क्लब में नाबालिग के साथ छेडछाड़ के पॉक्सो मामले में जो गलियां रखी और जिसके आधार पर जिम्मेदार बरी हो गए, इसकी कहानी में शायद आप जाना नहीं चाहेंगे, क्योंकि हो सकता है, यह आपके महकमे का विषय नहीं हो। मगर जहां जहां पैसों की बात आएगी, सारा मामला आपके विभाग के इर्द-गिर्द ही घूमेगा। तो मेहरड़ा साहब यह तो एक इशारा है। पुलिस विभाग कितना भ्रष्ट है इसकी बानगी आपसे अच्छी तरह कौन जानता है? चौराहों पर उगाही किसके कहने पर होती है? चालानों का बोझ पुलिस कर्मचारियों पर किसके आदेशों पर डाला जाता है। फर्जी मामले बनाने को पुलिस अधिकारी क्यों विवश हो जाते हैं, क्योंकि उन पर अलग-अलग धाराहों पर मुकदमे दर्ज करने का बाकायदा टारगेट दिया जाता है। मजे की बात यह है कि कोर्ट से अधिकतर मामले फर्जी निकलते हैं। भला इन सबकी गहराई में आपका विभाग कभी गया है। पैसों का खेल किस हद तक हो जाता है, इस ओर आप कभी गए ही नहीं या फिर अनदेखी कर रहे हैं। आप जिस जैसलमेर में एसपी रह चुके हैं वहां के बड़े अखबारों के तत्तकालीन सारे पत्रकार भ्रष्ट है। क्या आप जानते हैं पत्रकार बनने से पहले उनकी संपत्ति कितनी थी और पत्रकार बनने के बाद उनकी संपत्ति कितनी हो गई है। कभी आयकर विभाग ने उनकी तरफ आंख उठाई। बात जैसलमेर की ही क्यों करें, पूरे जोधपुर और पूरे राजस्थान और पूरे देश की करें। पूरे देश के पत्रकारों की संपत्ति की जांच होनी चाहिए। पत्रकारों की ही नहीं मीडिया घरानों की संपत्ति किस तरह बढ़ी है, इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए। किस तरह मीडिया घराने पत्रकारों को चोर बनाने पर विवश करते हैं, उस पर भी ध्यान देना चाहिए। आज जिस पत्रकार को आपने पकड़ा है, उसे उसका चैनल या अखवार हटा देगा। पत्रकार जेल में सड़ेगा। जब छूटकर आएगा फिर कोई अखबार उसे रिपोर्टर बना देगा। ऐसा नवीनदत्त अकेला नहीं है। जोधपुर में पत्रकारों के रूप में माफिया जगह-जगह फैले हुए हैं। यहां कई रिपोर्टर तो पिस्तौल लेकर घूमते हैं। उगाही करना, लूटपाट करना, धमकी देना उनका शौक नहीं उनका धंधा है। क्योंकि पुलिस की भी उनसे सांठगांठ होती है। अगर विश्वास नहीं हो तो पिछले दस सालों के अखबार उठा कर देख लो कई पत्रकार जेल जा चुके हैं। कई पत्रकार अपराधों मे गिरफ्तार हो चुके हैं। यहां तक लोगों को सैक्स स्कैंडल में फंसाने की धमकियां देकर भी कई पत्रकार जेल जा चुके हैं। मेहरड़ा साहब, आप बेशक नवीनदत्त की गिरफ्तारी की वाह वाही लूटें, लेकिन अभी भी कई पत्रकार खुले घूम रहे हैं। उन्हें कौन पकड़ेगा? अभी भी कई पुलिस अफसर खुले घूम रहे हैं, जिनके खुद पत्रकारों के साथ माफिया राज तक रिश्ते हैं, उनके खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा? पुलिस ही पत्रकारों के साथ बैठकर दारू पीती है। पुलिस ही पत्रकारों के साथ बैठकर भ्रष्टाचार काे पनाह देती है। पुलिस ही पत्रकारों के कहने पर अपराधियों को छोड़ती है। इन रिश्तों पर न पुलिस बोलने वाली और न ही पत्रकार। क्योंकि पैसा ऐसी चीज है जो अच्छों अच्छों का ईमान डगमगा देती है। यहां तो पूंजीवादी ताकतें गरीब को विवश कर देती है अपराधी बनने पर। चाहे आपके हाथ में कलम ही क्यों न हो, अगर आप बईमान नहीं बन सकते तो इस पेशे में आपके लिए कोई जगह नहीं है। मगर मेहरड़ा साहब हम आपसे आग्रह करते हैं कि राज्य में भ्रष्ट पत्रकारों और भ्रष्ट पुलिस अफसरों को चुन-चुन कर पकड़िए तब तो आपकी बहादुरी है, वरना एक नवीनदत्त की बली लेकर आपने कोई बहादुरी का काम किया है, इसमें संदेह ही है। नवीनदत्त तो सागर की एक बूंद है, यहां पूरा सागर खारा है। इस खारेपन को दूर कर आपको अमृत वर्षा करनी है। यही आपके लिए चुनौती है। अगर इस चुनौती को निभा सकते हो तो शिद्दत से निभाओ, वरना इस्तीफा देकर घर बैठ जाओ।

और अब अंत में वो खबर जो एसीबी ने जारी की है : 

एसीपी के नाम पर 60 हजार की रिश्वत लेते पत्रकार रंगे हाथों गिरफ्तार

-पुलिस में दर्ज मामलों में सहयोग करने के नाम पर मांगे थे एक लाख रुपए

जोधपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जोधपुर में सहायक पुलिस आयुक्त के नाम पर 60 हजार की रिश्वत लेते एक पत्रकार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। एसीबी के महानिदेशक डॉ. रवि प्रकाश मेहरडा ने बताया कि एसीबी जोधपुर इकाई को परिवादी ने शिकायत दी थी। जिसमें बताया था कि पुलिस थाना सरदारपुरा में दर्ज दो मामलों में मदद की एवज में जांच अधिकारी सहायक पुलिस आयुक्त (पश्चिम) वृत के नाम पर दलाल नवीन दत्त एक लाख रुपए की रिश्वत राशि की मांग रहा है। इस पर एसीबी उदयपुर के उपमहानिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद गोयल के सुपरविजन में एसीबी जोधपुर इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चक्रवर्ती सिंह राठौड़ के नेतृत्व में शिकायत का सत्यापन किया गया। पुलिस निरीक्षक मनीष वैष्णव और सुनीता कुमारी ने कार्रवाई करते हुए बुधवार रात को प्रतापनगर स्थित नेशनल हैंडलूम के पास दलाल नवीन दत्त को परिवादी से साठ हजार की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी खुद को पत्रकार भी बता रहा है। मामले में एसीपी की भूमिका की जांच की जा रही है।

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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