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बागवानी खेती की ओर बढा किसानों का रूझान

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फलदार खेती के लिए आज ही ऑनलाइन आवदेन कर सकते है : डा.भाकर

सोहनलाल वैष्णव. बोरुंदा (जोधपुर)

बोरुन्दा कस्बे के प्रगतिशील किसान हनुमानसिंह राठौड ने बागवानी खेती की ओर किया रूख। पांच हेक्टर में आंवले की खेती की तैयारी की पूरी।
प्रगतिशील किसान हनुमानसिंह राठौड़ ने बताया कि फसलों के साथ-साथ मशाला खेती प्रमुखता से कर रहा हूं। अब पांच हेक्टर में आंवला की बागवानी के लिए गर्मी में गड्डे तैयार किए ताकि तेज गर्मी से कीट-व्याधि का भी नियंत्रण हो। अब उस गड्डों में सिफारिश अनुसार मिट्टी व कम्पोस्ट खाद मिलाकर कर पूर्ण किये है। आंवला के पौधे भी तैयार है। प्रथम वर्षा होते ही आंवला के पौधों का पौधरोपण कार्य किया जायेगा। आंवला के पौध वृक्ष सम्मान होते है। इन पौधों के बीच रिक्त स्थान पर खेती भी होती रहेगी साथ-साथ बागवानी भी पनप जायेगी। इन पौधों में सिचांई के लिए बूंद बूंद सिचांई पद्धति स्थापित की है जिसे सिचांई का जल का कुशलतम उपयोग का लाभ होगा। पर्यावरण संरक्षण में पौधरोपण का भी महत्व है उसका भी फायदा होगा। खेत में 1680 गड्डे आंवला पौध के लिए तैयार है। उनका मानना है कि फसल के साथ-साथ कुछ क्षेत्र में बागवानी खेती को भी महत्व देना चाहिए।
सहायक कृषि अधिकारी रफीक अहमद कुरैशी ने कहा कि खेंती में सिचांई के संसाधनों वाले क्षेत्र में फसल के साथ-साथ खेतीं मे नगदी आय वृद्धि के लिए नवीन फलदार बगीचा स्थापित करने का भी फायदा होता है। कृषि उद्यानिकी योजना मे देय सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर फसल के साथ साथ बागवानी खेतीं आय का अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। नवीन बागवानी खेतीं के लिए सिचांई जल व खेत की मिट्टी की जांच करवा कर बागवानी खेतीं का चयन किया जा सकता है। फसल के साथ-साथ बागवानी खेतीं से भी खेतीं आय का एक अच्छा विकल्प है। फलदार खेतीं में नीबूं, बेर, अनार इत्यादि बगीचा स्थापित पर अनुदान देय है।बगीचा मे बूंद बूंद सिचांई पद्धति को अपनाना भी महत्वपूर्ण है जिसे सिचांई जल का खेतीं में कुशलतम उपयोग होता है। बगीचा मे पौंधे से पौंधे व कतार से कतार की एक निश्चित दुरी पर खेत में पौंधारोपण किया जाता है जिसे रिक्त भूमि के बीच फलदार खेतीं पनपने तक अन्य फसल अन्तराशस्य के रूप में खेतीं भी आसानी से की जाती है। किसान यदि नवीन फलदार बगीचा को स्थापित करना चाहते है तो उद्यानिकी योजना में लाभान्वित हो सकते है। एक आवेदन नवीन बगीचा स्थापित व दुसरा आवेदन बूंद बूंद सिचांई पद्धति के लिए।दोनों ही आवेदन पर अलग अलग अनुदान का लाभ मिलता है।

राजकिसान पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं

जिले का कोई भी किसान नवीन फलदार खेती के लिए राजकिसान पोर्टल पर आनलाइन आवेदन कर इस योजना में लाभ प्राप्त कर सकते है।
डाॅ.जीवनराम भाकर,
उपनिदेशक उद्यान जोधपुर।

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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