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Saturday, January 17, 2026, 12:20 am

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युवा प्रतिभाओं ने बीकानेर की समृद्ध कला परंपरा को नवीन ऊंचाईयां प्रदान की है : डॉ. नितिन गोयल

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35 युवा कलाकारों ने 20 कलाओं का भव्य प्रदर्शन उछब थरपणा में किया

राखी पुरोहित. बीकानेर 

राजस्थानी साफा-पाग, कला संस्थान एवं थार विरासत की ओर से नगर स्थापना दिवस के अवसर पर होने वाले आयोजनों की श्रृंखला में 537वें स्थापना दिवस पर आयोजित 7 दिवसीय ‘उछब थरपणा’ के तहत आज समारोह के छठे दिन दो दिवसीय ‘युवा कला प्रदर्शनी’ का उद्घाटन नत्थूसर गेट बाहर लक्ष्मीनाराण रंगा सृजन सदन में हुआ।

‘युवा कला प्रदर्शनी’ के मुख्य अतिथि डॉ. नितिन गोयल निदेशक अभिलेखागार ने उद्घाटन अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुखद अवसर है कि बीकानेर की युवा प्रतिभाएं हमारी लोक परंपरा, लोक संस्कृति एवं लोक कलाओं की समृद्ध परंपरा से जुड़े रहकर बीकानेर की समृद्ध कला साधना को नवीन ऊंचाईयां प्रदान की है। डॉ. गोयल ने आगे कहा कि परंपरा संस्कृति और कला हमारी भाषा को भी अप्रत्यक्ष रूप से समृद्ध करती है। अतः हमें हमारे गौरवशाली अतीत से वर्तमान दौर तक विभिन्न कलाओं को समसामयिक संदर्भ में ढालते हुए मूल संरचना को जिंदा रखनी होगी।

‘युवा कला प्रदर्शनी’ की अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी वरिष्ठ साहित्यकार-आलोचक कमल रंगा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कला एक व्यापक शब्द है जिसका उपयोग रचनात्मक या कल्पनाशील प्रतिभाओं का उपयोग करके बनाए गए विभिन्न को दर्शाने के लिए किया जाता है जिनमे एक सार्थक अनुभव उत्पन्न करने की उम्मीद होती है, इन्हीं उम्मीदों पर यह कला प्रदर्शनी खरी है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण युवा प्रतिभाओं द्वारा विभिन्न कलाओं का मन मोहक का चित्रण है।

रंगा ने आगे कहा कि दो दिवसीय ‘युवा कला प्रदर्शनी’ की विशेषता यह रही कि इसमें बालिकाओं ने बढ़ चढ़कर अपनी कला हुनर को रंग की रंगत और भावनाओं की संगत से परवान चढ़ाया है। जिससे बीकानेर की लोक कला एवं विभिन्न कलाओं का भविष्य बीकानेर की नई प्रतिभाओं के माध्यम से और नए आयाम स्थापित करेगा। कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ कला विशेषज्ञ डॉ. राकेश किराडू ने बताया कि दो दिवसीय कला प्रदर्शनी एक नवाचार है। क्योंकि इसमें 20 कलाओं यथा राजस्थानी आर्ट, पोट्रेट, उस्ता आर्ट, मॉर्डन आर्ट, मधुमनी आर्ट, बणीथणी आर्ट, फड़ आर्ट, पिछवाई आर्ट, स्कैच आर्ट, कैंडल आर्ट, बुल आर्ट, मथेरन आर्ट, साफा-पाग, पगड़ी और चंदा आर्ट, परंपरागत आर्ट, मिनीएचर आर्ट का शानदार एवं महत्वपूर्ण प्रदर्शन युवा प्रतिभाओं ने किया है जो अपने आप में बीकानेर के कला इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना है।

उछब थरपणा समारोह के संयोजक वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी एवं शिक्षाविद् राजेश रंगा ने कहा कि हमारी कलाएं और लोककलाएं पूरे देश में विशेष पहचान रखती है। जिसका अनुपम उदाहरण प्रदर्शनी में लगी सैकड़ों कलाकृतियां हैं। समारोह के समन्वयक कला विशेषज्ञ कृष्णचंद्र पुरोहित ने बताया कि ‘युवा कला प्रदर्शनी’ में कलाकृतियों के साथ पुराने रियासत कालीन मुद्रा एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का प्रदर्शन हुआ जिसे आज सैकडों बालक-बालिकाओं एवं विभिन्न कलानुशासन के गणमान्यों ने अवलोकन कर प्रशंसा की। कार्यक्रम का संचालन करते हुए युवा संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने बताया कि इस महत्वपूर्ण ‘युवा कला प्रदर्शनी’ में 35 कलाकारों यथा-किशनलाल सोनी, नवीन बरडिया, डॉ. राकेश किराडू, मूलचंद महात्मा, पार्थ आचार्य, हेमलता व्यास, कीर्ति लखाणी, निकिता जोशी, निशा सुथार, पुजा जोशी, सुमन कुमावत, मनशा रावत, तनिषा निर्वाण, अफ्शा चौहान, आरती भादाणी, जय श्री सुथार, आंचल सोनी, हर्षिता भाटी, वनीता, ऐश्वर्या, लीना, पुर्वाशी, लक्ष्मी, बेबी, चन्द्रशेखर जोशी, नकुल रंगा, केशव ओझा, अंकित व्यास, रवि उपाध्याय, मोहित पुरोहित, राजकुमार सांखला, आदित्य पुरोहित, केशव जोशी, मोहित पुरोहित, मोहित महात्मा जैसे युवा कलाकारों की कला का प्रदर्शन हुआ। जिसकी सभी ने सराहना कर उनका उत्साहवर्धन किया। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण ‘युवा कला प्रदर्शनी’ के 35 कलाकारो का संस्थाओं की ओर से कल समारोह के सातवे दिन समापन अवसर पर सम्मान किया जाएगा।

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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