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Sunday, October 18, 2026, 10:29 am

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शक्ति की तन्त्रसाधना का महापर्व : गुप्त नवरात्रि- पंडित विपुल श्रीमाली

पंकज जांगिड़. जोधपुर 

वर्ष में दो बार, चैत्र और आश्विन मासों में मनाई जाने वाली नवरात्रि से हम सभी परिचित हैं। परन्तु साल में दो और नवरात्रियाँ भी मनाई जाती हैं, इन्हें गुप्त नवरात्रि कहते हैं।

पंडित विपुल श्रीमाली ने बताया कि आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पहली 9 तिथियों में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष की पहली गुप्त नवरात्रि यानी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 26 जून से आरम्भ होकर 04 जुलाई को समाप्त होगी।
इस नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना की जाती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दुर्ग नामक दैत्य के वध के लिए देवी ने काली, तारा, भुवनेश्वरी, भैरवी आदि दस महाविद्याओं को प्रकट किया था। यह नवरात्रि वामाचार पद्धति से साधना करने वाले साधकों द्वारा मनाई जाती हैं, और कामरूप क्षेत्र (असम, मेघालय, नागालैण्ड समेत भारत के सम्पूर्ण पूर्वोत्तर प्रदेशों) में विशेष रूप से मनाई जाती है। चूँकि श्मशान जैसे गुप्त स्थानों में स्वयं के भीतर गुप्त रूप से विद्यमान शक्ति की साधना इस पर्व में की जाती है, इसीलिए ही इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। भारत के चार प्रमुख श्मशान तारापीठ (बंगाल), कामाख्या (असम या कामरूप), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), उज्जैन (मध्यप्रदेश) इस वामाचारी साधना के केंद्र माने जाते हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor