कविता : आज परशुराम जी फिर आ जाना
नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा’ आज परशुराम जी फिर आ जाना वो कैसे इंसान है जो इंसान को मार खुश होते हैं धरम के लिए युद्ध का नारा देकर मानवता को कलंकित करते है धरम जाति बड़ी नहीं है मनुजता के धरम से बेगुनाहों को मार कर कौनसे धरम को निभाते हो, मनुज से दनुज बनकर कैसी … Read more