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Sunday, October 18, 2026, 9:02 am

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Lifestyle

कविता : हंसराज हंसा

दुनियां मे मिया बीवी का ऐसा भी जोड़ा होता है, जो –

मैने देखा वो अजीबो गरीब जोड़ा था
इब्तिदाई जीवन को गलत दिशा मे मोड़ा था

शादी कर दी मात पिता ने जल्द उसकी
वो जब हुआ जवान थोड़ा थोड़ा था

हटा कटा कमाता नही था,पैसों के खातिर
जबरदस्ती का मात पिता पर मारता हथोड़ा था

उन दोनों के रहते मात पिता का जीवन
ऐशो आराम मोज मस्ती के लिए उनके रोड़ा था

मिलके उन दोनों ने देकर पीड़ा शारीरिक मानसिक
दिल मात पिता का बूरी तरह झकझोरा था

लगी सरकारी नौकरी जल्द ही बेटे की
जब पिता ने सेवा निवृत्त से पहले दम तोड़ा था

पीना पिलाना मात पिता की वसीयत मे था
जाते जाते उसमे उन्होंने बेटे का नाम जोड़ा था

कर दी पैदा पांच साल मे पांच औलाद
फिर घर संसार से शराब पीकर हो गया भगोड़ा था

जाने के बाद बीवी भी उसकी सूख कर मर गयी
दौनों ने मिलकर अपना तन शराब से निचोड़ा था

दुनियां से दोनों निकल गये करके काम हेय
“हंसा”पीछे उन्होने अपने बच्चों को अनाथ छोड़ा था

मायने
इब्तिदाई =प्रारम्भिक
हेय=घर्णित

हंस राज”हंसा”
आदर्श बस्ती,मंडोर
जोधपुर (राजस्थान)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor