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Sunday, October 18, 2026, 9:02 am

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जीवन और मानव की उत्पत्ति और विकास किसी दैवी कारण से नहीं बल्कि एक आत्म सृजनात्मक नियम से हुई है : डॉ. नंदकिशोर आचार्य

मदन डागा एवं सावित्री डागा की स्मृति में संभावना संस्था द्वारा एक साहित्य संगोष्ठी आयोजित

राइजिंग भास्कर. जोधपुर 

एक मई को डॉ. मदन सावित्री डागा साहित्य भवन नेहरू पार्क में शाम पांच बजे मदन डागा एवं सावित्री डागा की स्मृति में संभावना संस्था द्वारा एक साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि और प्रमुख वक्ता ख्यातनाम कवि और आलोचक डॉ. नंद किशोर आचार्य थे और अध्यक्षता मशहूर शायर और पद्मश्री शीन काफ निज़ाम ने की।

डॉ आचार्य ने मानव, विकास और साहित्य विषय पर अपने मौलिक विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि जीवन और मानव की उत्पत्ति और विकास किसी दैवी कारण से नहीं बल्कि एक आत्म सृज्नात्मक नियम से हुई है और यही वज़ह है कि बुद्दि और अनुभूति के विकल्पों सहित साहित्य ने अनुभूति के विकास में योगदान दिया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में शीन काफ निज़ाम ने डॉ. आचार्य के विचारों के नये पन और अनूठेपन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. आचार्य का यह अन्वेषण कि रचनाकार का फॉर्म या विधा का चयन भी अपनी अनुभूति के विकास द्वारा स्व की खोज का माध्यम है- अपने आप में एक ऐसा विचार है जो सोचने को बाध्य करता है। संभावना की ओर से डॉ मनीषा डागा ने स्वागत और संचालन किया और डॉ. हरीदास व्यास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor