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Sunday, October 18, 2026, 9:31 am

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ऐतिहासिक उपन्यास अतीत का पुनर्लेखन नहीं- डॉ. चेतन स्वामी

विमर्श की दृष्टि से ‘चोटी रै गांठ’ ब्राह्मण विमर्श का पहला भारतीय उपन्यास – हरीश बी. शर्मा

दिलीप कुमार पुरोहित. बीकानेर

मरुभूमि शोध संस्थान द्वारा आयोजित राजस्थानी उपन्यास ‘चोटी रै गांठ’ का लोकार्पण और पुस्तक चर्चा समारोह राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति के संस्कृति भवन में रविवार सुबह जाने-माने साहित्यकारों व साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति में उल्लास पूर्वक सम्पन्न हुआ।

मुख्य अतिथि मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि ऐतिहासिक उपन्यास के रचाव में गल्प का समावेश सबसे बड़ी सृजनात्मक चुनौती है। इतिहास के प्रमाणित तथ्यों की विश्वसनीयता बनाए रखते हुए कथा की रोचकता, पात्रों की संवेदनात्मक प्रस्तुति और कल्पना का संतुलित प्रयोग ही उपन्यास की सफलता का आधार बनता है। इतिहास और कल्पना के इसी संतुलन से पठनीय व कालजयी रचना जन्म लेती है।

इससे पूर्व साहित्यकार रवि पुरोहित ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि चाणक्य का जीवन केवल सत्ता प्राप्ति का आख्यान नहीं, समग्र राष्ट्र-निर्माण द्योतक है। शिक्षा, अनुशासन, नेतृत्व, रणनीति और राष्ट्रीय हित- ये सभी मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने मौर्यकाल में थे। आज जब समाज सूचना के विस्फोट, वैचारिक ध्रुवीकरण और त्वरित निर्णयों के दौर से गुजर रहा है, तब ऐतिहासिक उपन्यास हमें धैर्य, विवेक और दूर दृष्टि का महत्त्व याद दिलाते हैं।

डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि ऐतिहासिक उपन्यास अतीत का पुनर्लेखन नहीं, बल्कि उसके साथ एक सृजनात्मक संवाद है। लेखक का दायित्व केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि इतिहास की आत्मा को सुरक्षित रखते हुए उसे वर्तमान की चेतना से जोड़ना भी है।

साहित्यकार हरीश बी. शर्मा ने पत्र वाचन करते हुए कहा कि चाणक्य के जीवन की घटनाओं से गूंथे इस उपन्यास में अर्थशास्त्र की नीतियों का संवादों में प्रयोग किया गया है। विमर्श की दृष्टि से कहा जाए तो ब्राह्मण विमर्श का पहला भारतीय उपन्यास है और चाणक्य पर लिखा राजस्थानी का पहला उपन्यास। यह उपन्यास राजस्थानी के सामर्थ्य का प्रकटीकरण है। अगर यह उपन्यास एमए राजस्थानी के पाठ्यक्रम के लिए चुना जाता है तो राजस्थानी भाषा, व्याकरण और लोकोक्तियों के लिए अलग से किसी पुस्तक की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
लोकार्पण समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में विचार रखते हुए भाषाविद् डॉ. मदन सैनी ने चाणक्य उपन्यास को कई विमर्शों को जन्म देने वाला बताया। सैनी ने कहा कि दृष्टि और रचाव में सामंजस्य ही किसी कृति को पठनीय और विचारणीय बनाते हैं। बी.एल. भादानी ने कहा कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस तरह के उपन्यासों पर ऐतिहासिक दृष्टि से विवेचना वर्तमान की प्रासंगिकता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए साहित्यकार श्याम महर्षि ने कहा कि सत्यदीप की सर्जनात्मक ऊर्जा और साहित्यिक समर्पण को समाजोन्मुखी बताते हुए सामाजिक सरोकारों की महत्ती जिम्मेदारी के प्रति जागरूक व सजग रहने के लिए चेताया।

साहित्यकार भगवती पारीक के संयोजन में सम्पन्न समारोह में श्रीभगवान सैनी, सीमा भोजक व महेश जोशी ने अपनी पाठकीय टीप प्रस्तुत की। इस अवसर पर गजानंद सेवग, रामचन्द्र राठी, भंवरलाल भोजक, सत्यनारायण योगी, महावीर माली, बजरंग शर्मा, बाबूलाल सेवग, विजय महर्षि, छगनलाल सेवदा, विश्वनाथ तंवर, डॉ. रितेश व्यास, प्रवीण शर्मा, महावीर पंगाल, तुलसीराम चौरड़िया, श्याम सुंदर आर्य, गिरधारी कानूनगो, ओम गुरावा, विजय राज सेवग, मनीष शर्मा, भगवानदास शर्मा, शुभकरण पारीक , संजय शर्मा , राजीव श्रीवास्तव, नारायण शर्मा, लक्ष्मीनारायण सेवग, देवीलाल सेतरावा, विशाल स्वामी, राजू हीरावत, राजेश शर्मा, रमाकांत झंवर, संजय पारीक, कपिला स्वामी, आशा आचार्य, कांता भोजक, सरोज शर्मा, पुष्पा शर्मा सरिता, पूनम आदि उपस्थित रहे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor