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Sunday, October 18, 2026, 7:36 am

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रामराज कॉटन ने पंचा टीएम के लॉन्च के साथ ओडिशा की संथाली बुनाई परंपरा को पुनर्जीवित किया आदिवासी वस्त्र परंपरा को समकालीन भारत तक पहुँचाया

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

रामराज कॉटन ने पंचा टीएम नाम से एक नई हैंडलूम पेशकश लॉन्च की है, जिसमें ओडिशा के मयूरभंज की पारंपरिक संथाली बुनाई को आधुनिक धोती के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पंचा के माध्यम से भारत की कम-ज्ञात बुनाई परंपराओं को पहचान दिलाने के अपने प्रयास को आगे बढ़ा रहा है, जिससे इस शिल्प को जीवित रखने वाली आदिवासी महिला बुनकरों को नई पहचान और आजीविका के अवसर मिल सकें।

लॉन्च के अवसर पर रामराज कॉटन के संस्थापक एवं चेयरमैन, द कल्चरप्रेन्योर के. आर. नागराजन ने कहा,

“भारत की हैंडलूम विरासत बेहद विविधतापूर्ण है, लेकिन कई खूबसूरत बुनाई परंपराएँ आज भी केवल उन समुदायों तक ही सीमित हैं, जिन्होंने उन्हें जीवित रखा है। मयूरभंज की संथाली बुनाई ऐसी ही एक अनमोल विरासत है। हमारा मानना है कि इसकी मौलिकता बनाए रखते हुए इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचना चाहिए। ‘पंचा’ के माध्यम से हमने इस पारंपरिक बुनाई को धोती के रूप में नए स्वरूप में प्रस्तुत किया है, जिससे इस शिल्प के लिए एक नया अवसर तैयार हुआ है, साथ ही इससे जुड़ी कला और पहचान भी सुरक्षित बनी हुई है। हमें उम्मीद है कि यह पहल इस बुनाई के प्रति लोगों की सराहना बढ़ाएगी और उन महिला बुनकरों की आजीविका को मजबूत करेगी जिन्होंने इस परंपरा को आज तक जीवित रखा है।”

संथाली आदिवासी समुदाय की महिलाएँ परंपरागत रूप से इस विशिष्ट बुनाई से साड़ियाँ बनाती रही हैं, लेकिन संरक्षण में कमी, बदलती जीवनशैली और बाजार के सीमित अवसरों के कारण पिछले कई दशकों में यह बुनाई धीरे-धीरे अपनी पहचान खोती गई। इसकी कलात्मक विशेषता और आज के समय में इसकी उपयोगिता को महत्व देते हुए, रामराज कॉटन के संस्थापक एवं अध्यक्ष के. आर. नागराजन ने अब पंचा के माध्यम से संथाली बुनाई को धोती के रूप में नया स्वरूप दिया है।

पंचा बुनाई की पारंपरिक विशेषता को बरकरार रखते हुए एक नई और व्यापक पहचान देता है। इसका हर उत्पाद 100% कॉटन कपड़े से हाथ से बुना जाता है, जिसमें ऑफ-व्हाइट बेस, एजो-फ्री कलर, साधारण बुनाई और एक्स्ट्रा-वेफ्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है; जो उन बुनकरों की उत्कृष्ट शिल्पकला का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए हैं।

पंचा 7 अगस्त से चुनिंदा रामराज कॉटन एक्सक्लूसिव स्टोर्स पर तथा ऑनलाइन रामराज कॉटन की आधिकारिक वेबसाइट
https://ramrajcotton.in/collections/panchaa-handwoven-dhotis पर उपलब्ध होगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor