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Friday, October 2, 2026, 10:49 am

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आवाज पर बच्चा प्रतिक्रिया न दे तो तुरंत कराएं जांच, यह हो सकता है बहरेपन का संकेत

विश्व बधिर दिवस आज : समय पर पहचान और इलाज से सुनने की क्षमता में सुधार संभव, जीन थेरेपी से भी जगी नई उम्मीद

जोधपुर। बच्चों में सुनने की क्षमता से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज करना आगे चलकर उनके विकास और संवाद क्षमता पर असर डाल सकता है। विश्व बधिर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बच्चों में श्रवण संबंधी संकेतों को समय रहते पहचानने और आवश्यकता होने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चा आवाज देने पर प्रतिक्रिया नहीं देता, बार-बार तेज आवाज की जरूरत महसूस करता है या बोलने में देरी हो रही है, तो उसकी सुनने की क्षमता की जांच करानी चाहिए।

वर्तमान समय में बहरेपन के इलाज के लिए कई आधुनिक तकनीक उपलब्ध हैं। डिजिटल हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट, स्पीच थेरेपी और ऑडिटरी रिहैबिलिटेशन के माध्यम से अनेक मरीजों को सुनने और बोलने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल रही है। वहीं, जीन थेरेपी के क्लिनिकल ट्रायल से भी भविष्य में श्रवण क्षमता से जुड़ी समस्याओं के इलाज की नई उम्मीद जगी है।

बच्चों में इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे बच्चों में यदि बार-बार नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तेज आवाज की ओर ध्यान नहीं जाता या बोलने में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है तो इसे सामान्य मानकर छोड़ना उचित नहीं है। स्कूल जाने वाले बच्चों में बार-बार बात दोहराने के लिए कहना, टीवी या मोबाइल की आवाज तेज रखना, शोर में सुनने में परेशानी होना अथवा पढ़ाई में ध्यान से जुड़ी शिकायतें भी श्रवण समस्या की ओर संकेत कर सकती हैं।

गंभीर श्रवण हानि वाले मरीजों में सामान्य हियरिंग एड से अपेक्षित लाभ नहीं मिलने पर कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे विकल्पों पर चिकित्सकीय सलाह ली जा सकती है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से ध्वनि संकेतों को श्रवण तंत्र तक पहुंचाने में मदद मिलती है। इसके बाद स्पीच थेरेपी और ऑडिटरी रिहैबिलिटेशन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समय पर जांच और हस्तक्षेप जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में सुनने की कमी की पहचान जितनी जल्दी हो, उतना बेहतर रहता है। नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की श्रवण जांच से समस्या का शुरुआती स्तर पर पता लगाया जा सकता है। यदि बच्चा आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देता या बोलने में देरी हो रही है तो अभिभावकों को चिकित्सकीय जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। जीन थेरेपी को लेकर भी शोध जारी है। समाचार में उद्धृत चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार कुछ बच्चों में जीन थेरेपी से सुनने की क्षमता में सुधार के परिणाम सामने आए हैं। हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसके व्यापक उपयोग से पहले आगे के शोध और परीक्षण जरूरी हैं।

ऑडियोमेट्री से श्रवण क्षमता की जांच आसान

ऑडियोलॉजिस्ट एवं स्पीच पैथोलॉजिस्ट डॉ. योगेश सोलंकी के अनुसार ऑडियोमेट्री जांच से व्यक्ति की श्रवण क्षमता और समस्या के प्रकार का पता लगाया जा सकता है। राष्ट्रीय बधिरपन रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पहचान, उपचार और पुनर्वास पर काम किया जा रहा है। पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद यूडीआईडी कार्ड के लिए भी आवेदन करने की सुविधा मिल सकती है।

भारत में 6.3 प्रतिशत आबादी प्रभावित

भारत में करीब 6.3 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 6.3 करोड़ लोग, श्रवण हानि या बहरेपन से प्रभावित हैं। विभिन्न आयु वर्गों में इसकी दर अलग-अलग बताई गई है। नवजात शिशुओं में भी कुछ मामलों में जन्मजात श्रवण समस्या सामने आती है। विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है कि बच्चों में आवाज के प्रति प्रतिक्रिया, सुनने और बोलने के विकास से जुड़े संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही निदान और आवश्यक पुनर्वास से श्रवण समस्या वाले बच्चों के विकास और संचार क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor