माफी मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और गलती स्वीकार करने का साहस है
राइजिंग भास्कर डेस्क. जोधपुर
माफी मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और गलती स्वीकार करने का साहस है। जीवन में हमसे कभी न कभी जाने-अनजाने भूल हो जाती है। ऐसे समय अहंकार को छोड़कर सच्चे मन से माफी मांग लेना रिश्तों में आई दूरी को कम कर सकता है। माफी मांगने से मन का बोझ हल्का होता है और सामने वाले के मन में भी सम्मान पैदा होता है। जरूरी नहीं कि हर बार हम सही हों; कभी-कभी रिश्ते बचाने के लिए अपनी गलती स्वीकार करना अधिक महत्वपूर्ण होता है। सच्ची माफी शब्दों के साथ व्यवहार में बदलाव भी लाती है। इसलिए माफी मांगना सीखें, मन को हल्का करें और रिश्तों में प्रेम बनाए रखें।

