डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे लोगों में नशे की समस्या बढ़ने की चिंता, जागरूकता और समय पर उपचार जरूरी
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति अब केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। तनाव, अवसाद (डिप्रेशन), चिंता (एंग्जायटी), पारिवारिक परेशानियों और सामाजिक दबाव के बीच कुछ युवा नशे को राहत पाने का साधन मानने लगते हैं। हालांकि, नशे का सेवन मानसिक परेशानियों को कम करने के बजाय कई बार उन्हें और गंभीर बना सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, भावनात्मक संतुलन, नींद और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। लगातार नशे की आदत व्यक्ति के पारिवारिक संबंधों, शिक्षा, कामकाज और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करती है।
मानसिक परेशानियां और नशे का संबंध
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में पढ़ाई, रोजगार, आर्थिक दबाव, रिश्तों में तनाव और भविष्य की अनिश्चितता युवाओं की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। कुछ लोग इन समस्याओं से अस्थायी राहत पाने के लिए नशीले पदार्थों का सहारा लेते हैं। लेकिन यह राहत स्थायी नहीं होती। धीरे-धीरे नशे पर निर्भरता बढ़ सकती है और व्यक्ति के लिए अपनी आदत पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है।
डिप्रेशन और एंग्जायटी से परेशान लोगों में नशे का सेवन समस्या को जटिल बना सकता है। नशे के कारण नींद प्रभावित होना, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और भावनात्मक अस्थिरता जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए मानसिक परेशानी और नशे की समस्या को अलग-अलग देखने के बजाय दोनों के बीच संभावित संबंध को समझना आवश्यक है।
समय पर उपचार और परामर्श जरूरी
नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति को दोष देने या अपमानित करने के बजाय उसकी समस्या को समझना चाहिए। परिवार और मित्रों का सहयोग, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय उपचार सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक उदासी, अत्यधिक चिंता, नींद में बदलाव, सामाजिक गतिविधियों से दूरी या नशे पर बढ़ती निर्भरता जैसे संकेत दिखाई दें, तो विशेषज्ञ की मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। नशे की गंभीर निर्भरता की स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी में उपचार कराना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के पांच उपाय
- नशे से दूरी बनाएं: शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा में सहायक है।
- नियमित व्यायाम करें: प्रतिदिन पैदल चलना, योग और अन्य शारीरिक गतिविधियां तनाव कम करने तथा बेहतर नींद में मदद कर सकती हैं।
- पर्याप्त नींद लें: नियमित समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं। पर्याप्त नींद मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।
- अपनों से बातचीत करें: अपनी परेशानियों को परिवार, मित्रों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करें। जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से संपर्क करें।
- तनाव प्रबंधन सीखें: ध्यान, योग, मनोरंजक गतिविधियों और समय के बेहतर प्रबंधन से तनाव का सामना करने में मदद मिल सकती है।
परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण
युवाओं में नशे की समस्या को रोकने के लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। बच्चों और युवाओं से संवाद बनाए रखना, उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुनना और बिना डर या संकोच के मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है।
नशे की समस्या को केवल इच्छाशक्ति की कमी मानना उचित नहीं है। कई मामलों में इसके पीछे मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक कारण भी हो सकते हैं। सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार और सही उपचार से प्रभावित व्यक्ति को बेहतर जीवन की ओर लौटने में सहायता मिल सकती है।

