मूंगफली से लेकर बादाम, तिल, नारियल, सरसों और सूरजमुखी तक के तेल उपलब्ध; अग्रसेन भवन के हस्तशिल्प स्टॉल पर लोगों ने दिखाई रुचि, प्राकृतिक तरीके से तेल तैयार करने पर जोर
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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खानपान में शुद्धता और बेहतर गुणवत्ता को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच जोधपुर में लकड़ी-पत्थर की कच्ची घाणी से तैयार तेल के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। पारंपरिक तरीके से तेल तैयार करने की इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए सिम्पलैक्स फूड यूनिट ने शहर में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यूनिट की ओर से मूंगफली, बादाम, सफेद तिल, नारियल, पीली सरसों और सूरजमुखी के तेल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यूनिट का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण तेल पहुंचाना और उन्हें विभिन्न तेलों की उपयोगिता के प्रति जागरूक करना है।
सिम्पलैक्स फूड यूनिट की प्रोपराइटर सुधा गर्ग के अनुसार, आज लोग अपने दैनिक भोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता, उसकी शुद्धता और उसे तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानना चाहते हैं। इसी बदलती सोच के बीच पारंपरिक कच्ची घाणी से तैयार तेल के प्रति दिलचस्पी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि तेल की गुणवत्ता के लिए अच्छी सामग्री का चयन और उसे तैयार करने की प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण हैं। यूनिट में विभिन्न प्रकार के तेल तैयार किए जाते हैं, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत, पसंद और खानपान के अनुसार विकल्प चुन सकें।
अग्रसेन भवन के हस्तशिल्प स्टॉल पर लोगों ने दिखाई रुचि
सुधा गर्ग ने बताया कि सिम्पलैक्स फूड यूनिट की ओर से अग्रसेन भवन में आयोजित हस्तशिल्प स्टॉल में भी तेल के उत्पादों का स्टॉल लगाया गया। यहां आने वाले लोगों ने विभिन्न प्रकार के तेलों के बारे में जानकारी ली। कई लोगों ने तेल तैयार करने की प्रक्रिया, उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री और अलग-अलग तेलों के उपयोग के बारे में पूछताछ की। लोगों की इस रुचि के साथ उत्पादों की खरीदारी भी हुई।
उन्होंने कहा कि किसी भी खाद्य उत्पाद के प्रति उपभोक्ताओं का विश्वास उसकी गुणवत्ता, पारदर्शिता और नियमित उपलब्धता से बनता है। स्टॉल पर लोगों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला और उन्हें अलग-अलग तेलों की विशेषताओं के बारे में जानकारी देने का मौका भी मिला। इस तरह के आयोजनों से स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलती है और उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार उत्पादों का चयन करने में सहायता मिलती है।
प्राकृतिक तरीके से तेल तैयार करने पर जोर
सिम्पलैक्स फूड यूनिट की प्रोपराइटर सुधा गर्ग के अनुसार, तेल बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनका कहना है कि तेल को प्राकृतिक तरीके से फिल्टर किया जाता है। कच्ची घाणी से तेल निकालने की पारंपरिक प्रक्रिया में बीजों या अन्य उपयुक्त कच्चे माल से तेल प्राप्त किया जाता है। कच्ची घाणी से निकाले गए तेल की विशेषता उसकी पारंपरिक उत्पादन प्रक्रिया मानी जाती है।
पारंपरिक तेलों की ओर क्यों बढ़ रही है रुचि?
भारतीय खानपान में तेल का उपयोग लंबे समय से होता आया है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय फसलों और खाद्य परंपराओं के अनुसार तेलों का चयन किया जाता रहा है। राजस्थान में सरसों और मूंगफली के तेल का इस्तेमाल कई परिवारों में प्रचलित है, जबकि तिल, नारियल और सूरजमुखी के तेल भी विभिन्न व्यंजनों तथा घरेलू जरूरतों के लिए उपयोग किए जाते हैं। आज उपभोक्ता उत्पादन प्रक्रिया और सामग्री की गुणवत्ता को भी महत्व देने लगे हैं। कई लोग पारंपरिक तरीके से निकाले गए तेलों को पसंद करते हैं।
मूंगफली का तेल: स्वाद और असंतृप्त वसा का स्रोत
मूंगफली का तेल भारतीय रसोई में उपयोग होने वाले प्रमुख वनस्पति तेलों में शामिल है। इसका स्वाद और खुशबू कई व्यंजनों को खास पहचान देते हैं। इसका उपयोग सब्जी बनाने, तड़का लगाने, तलने और अन्य घरेलू पाक विधियों में किया जाता है। इसकी उपयुक्तता तेल की गुणवत्ता और उसे तैयार करने की प्रक्रिया पर भी निर्भर करती है।
मूंगफली के तेल में मुख्य रूप से असंतृप्त वसा पाई जाती है। संतृप्त वसा की जगह असंतृप्त वसा का संतुलित उपयोग रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड की अच्छी मात्रा होती है। तेल में मौजूद पोषक तत्वों की वास्तविक मात्रा मूंगफली की किस्म और प्रसंस्करण के तरीके के अनुसार अलग हो सकती है।
प्रमुख उपयोग और संभावित लाभ:
- भोजन में ऊर्जा प्रदान करने वाली वसा का स्रोत।
- असंतृप्त वसा के कारण संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है।
- विभिन्न भारतीय व्यंजनों में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए उपयोगी।
- उपयुक्त गुणवत्ता वाला तेल खाना पकाने की कई सामान्य विधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
बादाम का तेल: उपयोगिता और गुणवत्ता पर ध्यान
बादाम का तेल बादाम से प्राप्त किया जाता है और इसका इस्तेमाल खाद्य तथा सौंदर्य संबंधी उत्पादों में किया जा सकता है। खाद्य-ग्रेड बादाम के तेल में असंतृप्त वसा, विशेषकर मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, पाया जा सकता है। इसकी वास्तविक पोषण संरचना उत्पाद की किस्म और प्रसंस्करण पर निर्भर करती है। कुछ प्रकार के बादाम तेल का उपयोग स्वाद बढ़ाने या विशेष व्यंजनों में किया जाता है। दूसरी ओर, कॉस्मेटिक ग्रेड तेल का उपयोग त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता है।
प्रमुख उपयोग और संभावित लाभ:
- खाद्य-ग्रेड होने पर संतुलित आहार में असंतृप्त वसा का स्रोत।
- कुछ व्यंजनों में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए उपयोगी।
- बादाम से बने कॉस्मेटिक तेल का उपयोग त्वचा की नमी बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
- तेल की गुणवत्ता और उपयोग के प्रकार की स्पष्ट जानकारी उपभोक्ता के लिए जरूरी।
सफेद तिल का तेल: पारंपरिक स्वाद और पोषण
सफेद तिल का तेल भारतीय खानपान और पारंपरिक खाद्य संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। तिल से प्राप्त इस तेल का उपयोग कई व्यंजनों में किया जाता है। इसकी विशिष्ट खुशबू और स्वाद भोजन को अलग पहचान देते हैं। क्षेत्रीय खानपान के अनुसार इसका उपयोग तड़के, सब्जियों और अन्य व्यंजनों में किया जा सकता है। तिल के तेल में असंतृप्त वसा होती है। इसमें कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट यौगिक भी पाए जाते हैं, जिनमें सेसामिन और सेसामोल जैसे घटक शामिल हो सकते हैं। इनकी मात्रा तेल की किस्म और प्रसंस्करण पर निर्भर करती है।
प्रमुख उपयोग और संभावित लाभ:
- असंतृप्त वसा के माध्यम से संतुलित आहार में योगदान।
- पारंपरिक व्यंजनों में स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए उपयोगी।
- इसमें मौजूद प्राकृतिक यौगिक ऑक्सीकरण से संबंधित प्रक्रियाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं।
- भोजन में विविधता लाने के लिए अन्य तेलों के साथ संतुलित तरीके से उपयोग किया जा सकता है।
नारियल का तेल: विशेष स्वाद और बहुउपयोगी इस्तेमाल
नारियल का तेल खाद्य उपयोग के साथ-साथ त्वचा और बालों की देखभाल में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद के कारण कुछ व्यंजनों में इसका विशेष महत्व है। नारियल के तेल की बनावट और गुण तापमान के अनुसार बदल सकते हैं। इसका इस्तेमाल करने से पहले उत्पाद का खाद्य या बाहरी उपयोग के लिए होना स्पष्ट रूप से जांचना चाहिए।
प्रमुख उपयोग और संभावित लाभ:
- कुछ व्यंजनों में विशिष्ट स्वाद और खुशबू के लिए उपयोगी।
- बाहरी उपयोग के लिए उपयुक्त उत्पाद त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है।
- बालों की देखभाल में इसका उपयोग किया जाता है।
- उपयोग की मात्रा और तरीका व्यक्ति की जरूरत तथा उत्पाद की प्रकृति के अनुसार तय करना चाहिए।
पीली सरसों का तेल: भारतीय रसोई की पारंपरिक पहचान
पीली सरसों का तेल भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक तेलों में शामिल है। इसका उपयोग सब्जियां बनाने, अचार तैयार करने और कई क्षेत्रीय व्यंजनों में किया जाता है। इसकी विशिष्ट खुशबू और स्वाद के कारण अनेक परिवार इसे पसंद करते हैं। सरसों के तेल की संरचना उसकी किस्म और प्रसंस्करण के अनुसार बदल सकती है। इस तेल में असंतृप्त वसा होती है और कुछ प्रकारों में मोनोअनसैचुरेटेड तथा पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं।
प्रमुख उपयोग और संभावित लाभ:
- पारंपरिक भारतीय व्यंजनों और अचार में उपयोगी।
- असंतृप्त वसा के कारण संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है।
- स्वाद और खुशबू के कारण भोजन को विशिष्ट पहचान देता है।
- सही मात्रा में और उचित खाद्य गुणवत्ता के साथ उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
सूरजमुखी का तेल: हल्का स्वाद और बहुउपयोगी विकल्प
सूरजमुखी का तेल सूरजमुखी के बीजों से तैयार किया जाता है। इसका स्वाद अपेक्षाकृत हल्का होता है, इसलिए कई परिवार इसे दैनिक खाना पकाने में पसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल सब्जियों, अन्य सामान्य व्यंजनों और जरूरत के अनुसार तलने में किया जाता है। तेल की उपयुक्तता उसके प्रकार, गुणवत्ता और गर्म करने की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। सूरजमुखी के तेल में मुख्य रूप से असंतृप्त वसा पाई जाती है। इसकी कई किस्मों में लिनोलिक एसिड, जो ओमेगा-6 फैटी एसिड है, अच्छी मात्रा में मौजूद होता है।
प्रमुख उपयोग और संभावित लाभ:
- असंतृप्त वसा का स्रोत।
- हल्के स्वाद के कारण विभिन्न व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- संतृप्त वसा के स्थान पर उपयुक्त मात्रा में उपयोग करने से आहार की वसा संरचना बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
- अलग-अलग तेलों का संतुलित चयन भोजन में विविधता लाता है।
कच्ची घाणी का तेल स्वास्थ्य के लिए बेहतर है : सुधा गर्ग
सुधा गर्ग बताती है कि कच्ची घाणी का तेल स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। कच्ची घाणी से तैयार तेल पारंपरिक उत्पादन प्रक्रिया के कारण उपभोक्ताओं के बीच आकर्षण का विषय है। तेल में मौजूद फैटी एसिड, कच्चे माल की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, भंडारण और भोजन में इस्तेमाल की मात्रा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वसा शरीर को ऊर्जा देती है और कुछ विटामिनों के अवशोषण में मदद करती है। सुधा गर्ग ने बताया कि यूनिट में कच्चे माल की गुणवत्ता और तेल को प्राकृतिक तरीके से फिल्टर करने पर ध्यान दिया जाता है। सुधा गर्ग के अनुसार, कच्ची घाणी के तेल के प्रति लोगों की रुचि का एक कारण स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता भी है। उन्होंने बताया कि कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में कच्ची घाणी का तेल मदद करता है। यह कैंसर रोकने में भी मदद करता है। साथ ही पाचन तंत्र में सुधार करता है। इतना ही नहीं हूदय रोग के जोखिमों को कम करता है। इसमें ओमेगा 3 और 6 होता है जो कैंसर के खिलाफ हमारी कोशिकाओं की रक्षा करता है।
सिम्पलैक्स फूड यूनिट से यहां करें संपर्क
सिम्पलैक्स फूड यूनिट की प्रोपराइटर सुधा गर्ग के अनुसार, यूनिट में मूंगफली, बादाम, सफेद तिल, नारियल, पीली सरसों और सूरजमुखी के तेल उपलब्ध हैं। यूनिट का उद्देश्य पारंपरिक कच्ची घाणी से तैयार तेलों के विकल्प उपभोक्ताओं तक पहुंचाना और उन्हें विभिन्न तेलों के उपयोग के बारे में जानकारी देना है। पता: सिम्पलैक्स फूड यूनिट, 753, खत्री भवन, गीता भवन के पास, सरदारपुरा, जोधपुर। संपर्क नंबर: 8619913343, 7665581155।


