प्रमुख बांधों में पिछले वर्ष के मुकाबले 21.3 प्रतिशत कम पानी; राजस्थान में पांचवें दिन क्लोजर, पेयजल और सिंचाई प्रबंधन की चुनौती
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में जल संकट की आशंका गहराने लगी है। प्रमुख बांधों में पिछले वर्ष की तुलना में पानी का भंडार कम होने और सिंचाई तथा पेयजल की बढ़ती जरूरतों के बीच जल प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ रही है। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख बांधों में पिछले वर्ष के मुकाबले 21.3 प्रतिशत कम पानी दर्ज किया गया है। ऐसी स्थिति में पानी के इस्तेमाल पर सख्ती, उपलब्ध जल संसाधनों का नियोजित वितरण और पेयजल को प्राथमिकता देने जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
राजस्थान में भी जल प्रबंधन की चुनौती सामने है। नहरों में पांचवें दिन क्लोजर है। कम जल उपलब्धता के बीच पेयजल आपूर्ति, किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों और जलाशयों में बचे पानी के संतुलित उपयोग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
प्रमुख बांधों में घटा जल भंडार
देश के 178 प्रमुख जलाशयों में कुल 130.980 अरब घन मीटर (BCM) पानी उपलब्ध है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह मात्रा 166.400 अरब घन मीटर थी। इस तरह जल भंडार में करीब 21.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। जलाशयों में पानी की स्थिति का असर कृषि, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक जरूरतों पर पड़ सकता है। ऐसे में राज्यों के सामने उपलब्ध पानी का आकलन कर उसके विवेकपूर्ण इस्तेमाल की चुनौती है। जल संरक्षण, अनावश्यक खपत पर नियंत्रण और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप वितरण की योजना बनाना महत्वपूर्ण हो गया है।
राजस्थान: पेयजल में क्लोजर, सिंचाई को लेकर बढ़ी चिंता
राजस्थान में नहरों के संचालन और जल वितरण को लेकर चिंता बढ़ने की स्थिति बताई गई है। समाचार के अनुसार, नहरों में पांचवें दिन क्लोजर की व्यवस्था का उल्लेख है। इससे पेयजल आपूर्ति और सिंचाई के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत सामने आती है।
राज्य के शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में जल संसाधनों का प्रबंधन विशेष महत्व रखता है। किसानों को फसलों के लिए समय पर पानी उपलब्ध कराना और शहरों तथा गांवों में पेयजल की नियमित आपूर्ति बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। जलाशयों में उपलब्ध मात्रा, नहरों के संचालन और स्थानीय जरूरतों के आधार पर प्राथमिकताएं तय करना आवश्यक है।
महाराष्ट्र: बांधों में कम पानी पर सख्ती
महाराष्ट्र में जल संकट की आशंका के बीच पानी के इस्तेमाल पर सख्ती की तैयारी है। जल भंडार कम होने पर पानी के वितरण, अनावश्यक खपत रोकने और उपलब्ध संसाधनों का नियोजित उपयोग करने जैसे उपायों पर जोर दिया जा सकता है। ऐसी परिस्थितियों में घरेलू पेयजल की जरूरतों को प्राथमिकता देना और अन्य उपयोगों के लिए पानी का वितरण उपलब्धता के अनुसार तय करना जरूरी होता है। नागरिकों से भी पानी बचाने और बर्बादी रोकने की अपेक्षा की जाती है।
मध्य प्रदेश: सिंचाई पर रोक की तैयारी
मध्य प्रदेश में सिंचाई पर रोक लगाने की तैयारी है। जल उपलब्धता कम होने की स्थिति में सिंचाई के लिए पानी के इस्तेमाल को नियंत्रित करना चुनौती है।
गुजरात: अतिरिक्त पानी और राहत पैकेज की मांग
गुजरात से संबंधित खबर में सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी और राहत पैकेज की मांग का उल्लेख है। जल संकट की स्थिति में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना और कृषि संबंधी कठिनाइयों से राहत देना महत्वपूर्ण विषय बन जाता है।
कर्नाटक: 226 तालुकों में सूखे की स्थिति
कर्नाटक के 226 तालुकों में सूखे की स्थिति है। सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, कृषि और ग्रामीण आजीविका पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में जल संरक्षण, जरूरतमंद क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने और किसानों के लिए राहत उपायों की आवश्यकता बढ़ जाती है।
