अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को लेकर राइजिंग भास्कर रोज एक आलेख प्रकाशित कर रहा है। ध्यान और योग एक दूसरे के पूरक हैं। इसे पूरे विश्व में पुन:स्थापित करने वाले महर्षि महेश योगी के योगदान को दुनिया भुला नहीं सकती। आज महर्षि महेश योगी पर डीके पुरोहित का आलेख प्रस्तुत है।
डीके पुरोहित. जोधपुर
भारतीय संस्कृति में ध्यान और योग हजारों वर्षों से आत्मानुशासन, आत्मज्ञान और मोक्ष की दिशा में सबसे प्रभावी साधन रहे हैं। आधुनिक युग में जब भौतिकता, तनाव, प्रतिस्पर्धा और मानसिक अशांति का बोलबाला है, तब ध्यान और योग को पुनः वैश्विक चेतना में स्थापित करने का श्रेय जिन महान पुरुषों को जाता है, उनमें महर्षि महेश योगी का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है। उन्होंने न केवल ध्यान और योग को भारत की सीमाओं से बाहर निकालकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया, बल्कि उसे वैज्ञानिक, व्यावहारिक और जन-जन के लिए सहज बना दिया।
महर्षि महेश योगी : एक संक्षिप्त परिचय
महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1918 को मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में हुआ था। उनका मूल नाम महेश प्रसाद वर्मा था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक किया और बाद में हिमालय के तपस्वी गुरु स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती से आध्यात्मिक शिक्षा ली। यहीं से उनका ध्यान की गहराइयों में प्रवेश हुआ। स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने उन्हें “योग” और “वेदांत” की दीक्षा दी।
अपने गुरु के देहांत के पश्चात् महर्षि ने ध्यान और योग को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का संकल्प लिया। वे धीरे-धीरे एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के रूप में “ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन” यानी “सिद्ध ध्यान” के माध्यम से पूरी दुनिया में आध्यात्मिक क्रांति के अग्रदूत बने।
ध्यान की पुनर्परिभाषा : ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन (TM)
महर्षि महेश योगी ने ध्यान को सिर्फ धार्मिक क्रिया न मानकर एक वैज्ञानिक, मानसिक और भावनात्मक व्यायाम के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने सिद्ध ध्यान (TM) पद्धति में यह बताया कि—
- यह ध्यान केवल बैठने और आंखें बंद करने का अभ्यास नहीं है,
- बल्कि यह मन को उसकी मूल अवस्था “शुद्ध चेतना” की ओर ले जाने की सहज प्रक्रिया है।
TM की विशेषताएं:
- सरल और सहज अभ्यास: कोई भी व्यक्ति – चाहे वह किसी भी उम्र, धर्म, जाति या देश से हो – इस ध्यान को 15-20 मिनट प्रतिदिन अभ्यास करके कर सकता है।
- कोई विशेष विश्वास की आवश्यकता नहीं: TM को सीखने के लिए किसी विशेष धार्मिक या दार्शनिक विश्वास की आवश्यकता नहीं होती।
- वैज्ञानिक मान्यता: TM पर अनेक वैज्ञानिक शोध हुए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि यह ध्यान मानसिक तनाव, उच्च रक्तचाप, अवसाद और अनिद्रा जैसे विकारों में अत्यंत लाभकारी है।
योग और ध्यान के वैज्ञानिक पहलू पर बल
महर्षि ने ध्यान को केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में सिद्ध किया। उन्होंने कहा, “ध्यान केवल आत्मा की खोज नहीं है, यह मन और शरीर को भी स्वस्थ करता है।”
प्रमुख वैज्ञानिक लाभ:
- मस्तिष्क की तरंगों को नियंत्रित करता है।
- तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) का स्तर घटाता है।
- एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता को बढ़ाता है।
- आंतरिक शांति और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
विश्व की कई नामचीन विश्वविद्यालयों जैसे हार्वर्ड, MIT, स्टैनफोर्ड और UCLA में TM पर शोध हुए और इसके सकारात्मक प्रभावों को प्रमाणित किया गया।
पश्चिमी देशों में महर्षि का प्रभाव
1960 के दशक में महर्षि ने अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों में ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन का प्रचार-प्रसार किया। उस समय अमेरिका और यूरोप हिप्पी संस्कृति, युद्ध, मानसिक तनाव और ड्रग्स के प्रभाव से जूझ रहे थे। ऐसे समय में महर्षि का ध्यान, उन समाजों के लिए एक मनोरोगमुक्ति का औषधि बन गया।
बीटल्स बैंड और महर्षि:
महर्षि महेश योगी का प्रभाव तब और बढ़ा जब प्रसिद्ध संगीत समूह बीटल्स के सदस्य भारत आए और उनसे ध्यान सीखा। इससे पश्चिमी युवाओं में TM के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न हुई। यह एक सांस्कृतिक क्रांति का आरंभ था जिसमें योग और ध्यान को अब केवल सन्यासियों का अभ्यास नहीं बल्कि सामान्य जीवन का अंग माना जाने लगा।
महर्षि के प्रमुख योगदान
1. विश्व भर में ध्यान केंद्रों की स्थापना
महर्षि ने 100 से अधिक देशों में ध्यान सिखाने वाले केंद्र स्थापित किए।
उन्होंने महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (Maharishi International University) की स्थापना अमेरिका में की, जहां योग, आयुर्वेद, वेद, वास्तुशास्त्र और TM पर आधारित शिक्षा दी जाती है।
2. महर्षि वैदिक विज्ञान का पुनरुद्धार
उन्होंने वेदों को ‘नॉलेज ऑफ लॉ ऑफ नेचर’ बताया और TM को उसके आधार पर वैज्ञानिक रूप में समझाया।
उनकी दृष्टि में वेद केवल धर्म ग्रंथ नहीं बल्कि मानव चेतना के संचालन के प्राकृतिक नियमों का विज्ञान है।
3. शांति और विश्व बंधुत्व की स्थापना
महर्षि का उद्देश्य केवल ध्यान सिखाना नहीं था, बल्कि उन्होंने TM को एक वैश्विक शांति आंदोलन के रूप में स्थापित किया।
उनका मानना था कि अगर पृथ्वी की जनसंख्या का 1% भी नियमित TM करे तो अपराध, युद्ध और मानसिक हिंसा स्वतः समाप्त हो सकती है। इसे “महर्षि प्रभाव” कहा गया।
आधुनिक शिक्षा में TM का समावेश
महर्षि का मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थी को पूर्ण रूप से विकसित करना है – मन, शरीर और आत्मा से।
इसलिए उन्होंने “कॉन्शियसनेस-बेस्ड एजुकेशन” (चेतना-आधारित शिक्षा) प्रणाली शुरू की जिसमें ध्यान, योग और वैदिक सिद्धांतों को शैक्षिक पाठ्यक्रम में जोड़ा गया।
आज अमेरिका, नीदरलैंड, ब्राजील, थाईलैंड और भारत सहित कई देशों में स्कूलों में TM को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
महर्षि का भारत में योगदान
महर्षि ने भारत में भी कई योजनाओं का आरंभ किया—
- ब्रह्मस्थान (spiritual energy centers) की स्थापना
- महर्षि विद्या मंदिरों की शृंखला
- आयुर्वेद चिकित्सा और पंचकर्म केंद्रों का विकास
- स्वदेशी उत्पादों का प्रचार जैसे “महर्षि आयुर्वेद”
उन्होंने यह सिद्ध किया कि ध्यान और योग केवल अध्यात्म का विषय नहीं बल्कि स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और शिक्षा से भी गहराई से जुड़ा है।
महर्षि के जीवन का अंतिम चरण
2008 में नीदरलैंड के व्लोड्रोप स्थित अपने आश्रम में महर्षि ने देह त्याग किया। अपने अंतिम वर्षों में वे “ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस” की स्थापना में लगे रहे जिसका उद्देश्य था –
“एक ऐसी पृथ्वी जहाँ शांति, समृद्धि और सामूहिक चेतना का साम्राज्य हो।”
निष्कर्ष : महर्षि की योग-दृष्टि की आज की प्रासंगिकता
आज जब पूरा विश्व तनाव, अवसाद, मानसिक बीमारी, युद्ध, हिंसा और भौतिकता के अंधकार में फंसा है, तब महर्षि महेश योगी द्वारा प्रतिपादित ध्यान पद्धति एक ज्योति बनकर मार्ग दिखाती है।
उन्होंने ध्यान और योग को किताबों, आश्रमों और संतों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे –
- वैज्ञानिक आधार,
- वैश्विक मंच,
- शैक्षिक ढांचा
- और दैनिक जीवन का अंग बनाया।
उनकी यह सोच कि “ध्यान केवल समाधि नहीं, चेतना की जागरूकता है” आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले थी।
महर्षि महेश योगी के प्रेरक विचार
📌 “Meditation is not concentration. It is the opposite of concentration.”
📌 “Life is bliss, and the purpose of life is the expansion of happiness.”
📌 “Through TM, man can dive deep into the sea of pure consciousness.”
📌 “शांति केवल बाहर नहीं मिलती, वह भीतर से फूटती है – ध्यान के माध्यम से।”
महर्षि महेश योगी ने प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा
महर्षि महेश योगी एक ऐसे ऋषि थे जिन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा। उन्होंने ध्यान और योग को केवल आत्ममुक्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण, विश्वशांति और मानव उत्थान का माध्यम बनाया।
आज जब 21 जून को पूरी दुनिया “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” मनाती है, तब हमें याद रखना चाहिए कि महर्षि जैसे योगियों की दूरदर्शिता, परिश्रम और तपस्या के कारण ही यह विश्व चेतना जागृत हुई है। उन्होंने ध्यान को व्यक्तिगत साधना से उठाकर वैश्विक चेतना का स्वरूप दिया – यही उनका सबसे बड़ा योगदान है।









