सावन का महीना
ये सावन का महीना,
ये चंचल जवानी ।
जा के शुरू करें ,
कहीं अपनी प्रेम कहानी ।।
ये मन्द – मन्द मदमाती ,
गगन में घनघोर घटाएं ।
दिल यूं कहता है ,
जा के बसाएं कहीं प्रेम नगर रांनी ।।
ये सावन का……………………..।
रिमझिम रिमझिम सावन के बादल,
बरसा रहे हैं पानी।
मुस्कानों की आंधी में छुप जाओ,
मेरी बाहों में आकर मेरी रांनी ।।
ये सावन का …………………।
भीगी पलकें – भीगे गेसू ,
गोरे मुख से टपक रहा पानी ।
चिलमन से पलकें गिराके उठाना,
आहों की बाहों में आ जाओ रांनी ।।
ये सावन का महीना…………..।
चमक-चमक के बिजली चमके,
गालों पे गिर निहारे गोरी को पानी ।
सावन की भीनी भीनी-ठंडी ठंडी हवाएं,
अठखेलियां आंचल से करे रानी ।।
ये सावन का महीना…………….. ।
आंखों का काजल-होठों की लाली ,
गिर के यूं कह रहे ।
साजन से कह रहे सावन के बादल ,
दिल की प्यास बुझा लो अब रानी ।।
ये सावन का महीना ………………..।
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नाचीज बीकानेरी ” मोबाइल 9680868028









