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Thursday, April 23, 2026, 5:31 pm

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आज की कहानी :…”क्योंकि मुस्कुराने की वजह है” : लेखक रामा किशन भूतड़ा, प्रजेंट बाय- बीवीपी नंदनवन चैरिटेबल ट्रस्ट

(रामा किशन भूतड़ा। स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर में विशेष सहायक हुआ करते थे। बैंक सेवा के दौरान ही मजदूर लीडर भी। रिटायरमेंट के बाद प्रखर बिजनेसमैन और छत्तीस कौम के समाजसेवी श्री आनंद राठी और श्री सुरेश राठी के संपर्क में आए। राठी बंधुओं के सहयोग से नंदकिशोर राठी रोग जांच केंद्र प्रारंभ किया गया। एक ट्रस्ट की स्थापना हुई- बीवीपी नंदनवन चैरिटेबल ट्रस्ट। ट्रस्ट ने एक कहानी को जन्म दिया- ”क्योंकि मुस्कुराने की वजह है…” इस कहानी के लेखक रामा किशन भूतड़ा है। वे ये कहानी राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित और रिपोर्टर पंकज जांगिड़ को सुना रहे हैं। भूतड़ा के लिए शिकंजी और हमारे लिए चाय तैयार थी। भूतड़ा बता रहे हैं किस प्रकार ट्रस्ट पीड़ित मानव की सेवा कर रहा है…किस तरह लोग मायूसी के साथ आते हैं और चेहरों पर मुस्कान लिए लौटते हैं…उनकी मुस्कान ट्रस्ट और ट्रस्ट के लोगों को जीवन का मकसद दिए हुए हैं। ट्रस्ट से जुड़ने की अपनी कहानी। रामा किशन भूतड़ा ठहर-ठहर कर बोलते हैं, जैसे कोई बुजुर्ग अपने पोते-पोतियों को जीवन का किस्सा सुना रहा हो। पाठक अपनी राय 8302316074 पर या diliprakhai@gmail.com पर भेज सकते हैं।)

शुरुआत – बैंक की चारदीवारी से समाज की गलियों तक

“बेटा, जिंदगी बड़ी अजीब चीज है। कभी यह हमें अपने सपनों की ओर धकेलती है, तो कभी मजबूर कर देती है कि हम दूसरों के सपनों के लिए जिएं।

मैंने अपना सफर स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर की चारदीवारी से शुरू किया। उस समय मैं बैंक में विशेष सहायक था। — सारा दिन खाते, चेक, लोन और कागजों के बीच गुजरता था। मगर मेरी असली पहचान? मजदूरों की आवाज़। बैंक सर्विस के दौरान ही मुझे भारतीय मजदूर संघ, जोधपुर के जिला मंत्री का दायित्व मिला। वहां मैंने देखा कि मजदूर, कर्मचारी, छोटे लोग किस तरह अपनी तकलीफ़ें दबाकर काम करते हैं। कभी वेतन में कटौती, कभी मेडिकल सुविधा का अभाव, कभी नौकरी की असुरक्षा… उनकी आंखों में मैंने देखा कि उन्हें सिर्फ तनख्वाह नहीं, इंसानियत चाहिए।

शायद यहीं से सेवा का बीज मेरे अंदर पड़ गया था।”

सेवानिवृत्ति और नया रास्ता

“फिर वक्त आया जब बैंक की फाइलें छोड़कर मैं रिटायर हुआ। लोग कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद इंसान आराम करता है, लेकिन मेरे लिए यह आराम नहीं, एक नया मोड़ था।

भारत विकास परिषद से जुड़ने का मौका मिला। भारत विकास परिषद की नंदनवन शाखा में संस्थापक कोषाध्यक्ष का दायित्व मिला। फिर सचिव और बाद में अध्यक्ष की जिम्मेदारी। उसके बाद राजस्थान पश्चिम प्रांत के वित्त सचिव का दायित्व मिला। वहां समझ आया कि सेवा सिर्फ पैसे देने का नाम नहीं, बल्कि सही जगह और सही तरीके से मदद पहुंचाने का नाम है।

मगर, एक बात मुझे बार-बार परेशान करती थी — हमारे समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत।”

स्वास्थ्य का संकट और एक विचार

“बेटा, मैं अक्सर सोचता था — अगर हमारे पास लाखों रुपये की कार हो, लेकिन शरीर स्वस्थ न हो, तो क्या फायदा?

समाज में मैंने तीन बड़ी खामियां देखीं —

  1. स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की कमी

  2. उनकी गुणवत्ता में असमानता

  3. और उनकी कीमतें — जो आम आदमी की पहुंच से बाहर थीं।

तभी मैंने तय किया कि कुछ करना होगा। और इसी सोच को रूप देने के लिए मैं प्रख्यात बिजनेसमैन और छत्तीस कौम के समाजसेवी श्री आनंद राठी और श्री सुरेश राठी के संपर्क में आया। तभी एक विचार ने मूर्त रूप लिया और  26 अप्रैल 2019 को बीवीपी नंदनवन चैरिटेबल ट्रस्ट गठित हुआ।” मुझे इस ट्रस्ट के अध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा गया।

पहला कदम – दंत चिकित्सालय

“सोचा कि शुरुआत वहीं से करें जहां तकलीफ़ आम है और इलाज महंगा — दांतों की समस्या।
31 अक्टूबर 2022 को, राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत के हाथों, हमने ‘उमाराम चौधरी स्मृति दंत चिकित्सालय’ का उद्घाटन किया।

यहां हमने हर वह सुविधा रखी जो एक आधुनिक डेंटल क्लिनिक में होनी चाहिए —

  • दांतों का एक्स-रे,

  • अक्ल दाढ़ निकालना,

  • टूटा जबड़ा ठीक करना,

  • नस का इलाज (RCT),

  • केपिंग, इम्प्लांट सर्जरी,

  • टेढ़े-मेढ़े दांतों का इलाज,

  • तंबाकू से बंद हो चुके मुंह का इलाज… सब कुछ।

डॉ. दीपक मेहता और डॉ. हिमांशु गौरावत जैसे अनुभवी डॉक्टर यहां सेवाएं दे रहे हैं। हमारी नर्स आरती व्यास हर मरीज से ऐसे मिलती है जैसे घर का कोई सदस्य हाल-चाल पूछ रहा हो, और उनके पति कमल व्यास मरीजों की देखभाल में हमेशा खड़े रहते हैं।”

एक मरीज की कहानी

“मैं आपको एक किस्सा सुनाता हूँ —
एक मजदूर, नाम था शंकरलाल, हमारे पास आया। उसका मुंह तंबाकू से इतना बंद हो चुका था कि खाना भी मुश्किल था। सरकारी अस्पताल में महीनों लाइन में लगना पड़ता, प्राइवेट में खर्च इतना कि साल भर की कमाई खत्म हो जाए।

हमने उसका इलाज शुरू किया। कुछ हफ्तों में उसका मुंह खुला, दर्द खत्म हुआ। इलाज के बाद वह रो पड़ा, बोला — ‘भूतड़ा साहब, आप लोग नहीं होते तो शायद मैं भूखा मर जाता।’

उसकी आंखों के आंसू आज भी मेरे दिल में छपे हैं।”

दूसरा चरण – तीन नए केंद्र

“फिर 2 अप्रैल 2023 को, सम्मानित भामाशाहों के सहयोग से हमने तीन नए प्रकल्प शुरू किए —

  1. नंदकिशोर राठी रोग जांच केन्द्र (पैथोलॉजी लैब)

  2. सोहनी देवी काबरा फिजियोथेरेपी सेंटर

  3. श्रीमती सरोज मेड़तिया एक्युप्रेशर सेंटर

इनका उद्घाटन हरदयाल जी वर्मा, प्रांत संघ चालक ने किया।”

पैथोलॉजी – बीमारियों की जड़ तक पहुंच

“हमने ब्लड टेस्ट की पूरी सुविधा दी — CBC से लेकर HIV, थायरॉयड, लिवर, किडनी टेस्ट तक। ब्लड की जांच होने के बाद जो रिपोर्ट आती है उसको फिजिशियन डॉ. प्रदीप सक्सेना देखते हैं और परामर्श देते हैं। सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक वे सेवाएं देते हैं। ब्लड के सैंपल लेने के लिए घर जाकर कलेक्शन की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके लिए शहरवासी 7568105298 पर कॉल कर सकते हैं। लैब तकनीशियन फोटोराम राव भी अच्छी सेवाएं दे रहे हैं। दो सेंटर बनाए — एक प्राकृतिक चिकित्सालय में, जहां सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक सैंपल लेते हैं और दूसरा 16/561 पर जहां सुबह 8 से शाम 7 बजे तक सैंपल लिए जाते हैं। CBC,  RA FACTOR MANUAL, CALCIUM, URINE EXAMINATION, SPUTUM EXAM FOR AFB,  HBASG, TYPHI DOT,  BBILIRUBIN TOTAL, URIC ACID, HIV, HCV, WIDAL, HDL, BT/CT, T3, MP CARD, SGOT (AST), PROTIEN, SR CREATININE, CHOLESTEROL TOTAL, T4, UPT, SGPT(ALT),  ALKALINE P, ALBUMIN, TRIGLYCERIDE, BLOOD SUGAR (S), BLOOD GROUP आदि प्रमुख जांचें होती है।

एक बार एक महिला, सीमा देवी, आईं। लगातार थकान रहती थी, डॉक्टर को शक था डायबिटीज का। हमारे यहां ब्लड शुगर टेस्ट कराया — रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसी समय हमने उसका इलाज शुरू करवाया। आज वह हंसते हुए कहती है — ‘अगर यहां टेस्ट न कराया होता तो मुझे बीमारी का पता ही नहीं चलता।’”

फिजियोथेरेपी – दर्द को हराना

“सोहनी देवी काबरा फिजियोथेरेपी सेंटर में अत्याधुनिक उपकरणों एवं अनुभवी डॉक्टरों द्वारा फिजियोथेरेपी द्वारा उपचार किया जाता है। कमर/ गर्दन/ घुटना/ एड़ी का दर्द, पार्किंसन, लकवा, लम्बर स्पोंडिलोसिस, टेनिस एल्बो, स्लिप डिस्क, कूल्हा व घुटना प्रत्यारोपण के बाद का इलाज, चोट, रीढ़ की हड्डी की समस्या, सूनापन/ झनझनाहट, लिगामेंट की चोट, न फ्रोजन शोल्डर, गठिया, सायटिका, सर्वाइकल का दर्द आदि इलाज किया जाता है।

मुझे याद है एक बुजुर्ग गिरधारी लाल जी, लकवे से परेशान थे। महीनों से उठ नहीं पा रहे थे। उनके बेटे उन्हें हमारे सेंटर लाए। लगातार थेरेपी से तीन महीने बाद उन्होंने पहली बार अपने पैरों पर खड़े होकर कहा — ‘अब मैं खुद पार्क घूमने जाऊंगा।’

उस दिन स्टाफ के चेहरे पर जो खुशी थी, वह शब्दों में नहीं कह सकता।”

एक्युप्रेशर – बिना दवा का इलाज

“श्रीमती सरोज मेड़तिया एक्युप्रेशर सेंटर में हम तनाव, सिरदर्द, माइग्रेन, पाचन विकार, सर्वाइकल, सायटिका जैसी समस्याओं का इलाज करते हैं।

एक कॉलेज छात्रा, राधा, लगातार माइग्रेन से परेशान थी। दवाएं खाकर थक चुकी थी। हमारे यहां एक्युप्रेशर थेरेपी ली और दो महीने बाद उसने कहा — ‘अब मैं बिना दर्द के पढ़ाई कर पाती हूं।’

यही असली संतोष है — किसी को जिंदगी का नया पन्ना देने का।”

अन्य सेवाएं – मानवीय स्पर्श

“कमला नेहरू चेस्ट हॉस्पिटल में हमने दिन के समय मरीजों के परिजनों के आराम के लिए डे-केयर सुविधा शुरू की। वहां लोग बैठ सकते हैं, सो सकते हैं, चाय पी सकते हैं। यह छोटी चीज लग सकती है, लेकिन कई बार यह किसी के लिए भगवान का घर बन जाती है।”

जोधपुर से राजस्थान तक – एक मिसाल

“आज, बेटा, मैं गर्व से कह सकता हूँ कि बीवीपी नंदनवन चैरिटेबल ट्रस्ट जोधपुर ही नहीं, पूरे राजस्थान में एक मिसाल है। हमारा लक्ष्य सिर्फ इलाज करना नहीं, बल्कि यह साबित करना है कि सेवा का मतलब है — दुख से सुख तक का पुल बनाना

भविष्य में हम और भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं लाने के लिए कृतसंकल्प हैं। चाहे कैंसर स्क्रीनिंग हो, आंखों का अस्पताल हो, या मोबाइल हेल्थ वैन — हम हर गांव, हर गली तक पहुंचेंगे।”

(भूतड़ा जी शिकंजी और हम चाय का आखिरी घूंट लेते हैं, और धीमे से मुस्कुराते हैं।)

“देखो बेटा, मैंने जिंदगी में पैसा भी कमाया, नाम भी। लेकिन जो संतोष मुझे शंकरलाल के मुस्कुराते चेहरे से मिला, वह किसी बैंक बैलेंस से नहीं मिल सकता।

सेवा, यही असली पूंजी है।”

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor