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Thursday, April 23, 2026, 5:31 pm

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विभाजन विभीषिका पर एक गीत : एनडी निंबावत ”सागर”

गीतकार : एनडी निंबावत ”सागर”

देश हुआ आजाद मगर…

देश हुआ आज़ाद मगर
बड़ी कीमत चुकानी पड़ी

किसी का कटा सिर
किसी को मिली फांसी
देश का हुआ विभाजन
कैसी मजबूरी दिखानी पड़ी
देश हुआ आजाद….

आज़ादी की जंग साथ लड़ी
नहीं था ख़्याल अलग देश का
सत्ता मिले देश की लड़ पड़े
विभाजन की घड़नी कहानी पड़ी
देश हुआ आज़ाद…..

विभाजन के घाव बने नासूर
जो आज भी रिस रहे हैं
न मरहम न हक़ीम कोई यहां
ये हकीक़त हर जुबानी पड़ी
देश हुआ आज़ाद…

लम्हों ने की थी खता
सदियां सजा पा रही है
विभाजन क्या हुआ दुश्मन हो गए
बड़ी महंगी मेहरबानी पड़ीं
देश हुआ आज़ाद…

जमीं वही आसमां वही
मगर हवा बदल गईं
कोई द्रोपदी नहीं फिर भी
महाभारत की चौपड़ बिछानी पड़ी
देश हुआ आज़ाद….।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor