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Friday, April 17, 2026, 3:53 am

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RBI ने भी माने हैं पंकज भाटिया के सुझाव

Anand M Vasu. Jaisalmer

“इतिहास बदलने वाले अक्सर आम लोग ही होते हैं ।” इसी बात को चरितार्थ करते हैं जैसलमेर के कुछ बुद्धिजीवी । उनमें से एक विशेष नाम का उल्लेख करना चाहता हूं ।… जीवन बीमा विभाग, जैसलमेर में कार्यरत, जैसलमेर निवासी पंकज भाटिया सुपुत्र स्व. श्री श्रीवल्लभ भाटिया। वे अपने जिम्मेदारी कार्य के साथ समय निकाल कर, आम नागरिकों के हित में सरकारी व निजी संस्थाओं, बैंकिंग प्रणाली, चिकित्सा आदि सिस्टम में सुधार वास्ते सृजनता व नवीन प्रयोगों को आयाम देते हुए अपने सुझाव सरकारों व रिजर्व बैंक तक पहुंचाने का भरसक प्रयत्न पूरी उम्मीद और लगन से करते रहते हैं ।

खुशी की बात है कि, उनके प्रयत्नों के परिणाम भी आशानुरूप मिलते रहते हैं । उनके कई सुझाव आरबीआई तक ने भी स्वीकार करते हुए आशानुरूप परिणाम दिए हैं ।

इसी क्रम में तीन ताजा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूं । एक बैंकिंग प्रणाली एवं बीमा विभाग से संबंधित है, दूसरा रसद विभाग से और तीसरा चिकित्सा विभाग से संबंधित है।….. उनका एक सुझाव बैंकिंग व बीमा प्रणाली में नॉमिनेशन से सम्बंधित आम व खाश जन को आने वाली समस्याओं तथा देर सबेर कानूनी प्रक्रियाओं के बुरे दौर से गुजरने से संबंध रखता है । इस हेतु उनके सकारात्मक सुझाव पर विचार करते हुए संबंधित सिस्टम में बदलाव होना सुखद परिणामों का द्योतक है ।….

दूसरा सुखद परिणाम, राशन की दुकानों पर लंबी कतारों से राहत मिलने का है । उनके सुझावों अनुसार, “अब नगद निकासी हेतु ATM की तर्ज पर पब्लिक को राशन भी ATM से मिलेगा। मतलब 24 घंटे की सुविधा ।…. जब चाहो राशन लाओ ।”….. तीसरा अहम सुझाव, चिकित्सकों द्वारा साफ, सुन्दर व पढ़नीय हस्तलिखित दवा से सम्बंधित है ।… जिस पर अब सरकार का निर्णय के चिकित्सक साफ, सुन्दर व पढ़नीय हैंड राइटिंग में दवाइयां लिखेंगे ।
उपरोक्त कार्य सराहनीय है और इस सफलता के लिए पंकज भाटिया को हार्दिक बधाई और दिल से धन्यवाद।… आशा करते हैं कि वे अपने इस जनपयोगी सेवा कार्य को जारी रखते हुए अन्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे ।

यह भी उल्लेख करना उचित व सम्माननीय होगा कि, श्री पंकज भाटिया के पिताजी स्व. श्री श्रीवल्लभ भाटिया एक कर्मठ व ईमानदार शिक्षा अधिकारी के रूप में हमेशा याद रहेंगे ।….. मुझे गर्व है कि, स्कूली शिक्षा में मुझे भी उनका शिष्य बनने का सुखद अवसर मिला।…. शिक्षा के क्षेत्र में उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। …. कहने में संकोच नहीं है कि, प्यार से उन्हें “श्रीया भा” से जाना जाता था ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor