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Friday, April 17, 2026, 12:55 pm

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आस्था और अनुभूति का अद्भुत संगम : मानसरोवर….सुरेश राठी ग्रुप की टीम ने की कैलाश मानसरोवर एरियल व्यू की यात्रा

यात्रा की को-ऑर्डिनेटर दीपा अरोड़ा से विशेष बातचीत : दीपा बोलीं- आस्था की उड़ान अलौकिक-अद्भुत और अविस्मरणीय रहीं, कठिनाइयों के बीच दिव्य दर्शन का आनंद ही कुछ अलग रहा

दिलीप कुमार पुरोहित. नेपालगंज
9783414079 diliprakhai@gmail.com

कॉर्पोरेट जगत में कर्मचारियों के व्यक्तित्व विकास और आध्यात्मिक उन्नयन को साथ लेकर चलने वाले प्रयास कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन सुरेश राठी ग्रुप ने यह अनूठी पहल करते हुए अपने कर्मचारियों को पवित्र कैलाश मानसरोवर के एरियल व्यू दर्शन की अविस्मरणीय यात्रा करवाई। यात्रा में कुल 23 सदस्य शामिल थे। जिसमें 12 स्टाफ, सुरेश जी राठी स्वयं, उनकी धर्मपत्नी शशि राठी, उनके आठ रिलेटिव और योगा टीचर भी शामिल थे । इस यात्रा का नेतृत्व ग्रुप के फाउंडर एवं चेयरमैन सुरेश राठी ने स्वयं
किया, जबकि यात्रा समन्वयक रहीं दीपा अरोड़ा। इस आध्यात्मिक यात्रा से लौटने के बाद राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने दीपा अरोड़ा से विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश—

प्रश्न: सुरेश राठी ग्रुप की साप्ताहिक जूम मीटिंग की परंपरा कैसे शुरू हुई?

दीपा अरोड़ा: हमारे ग्रुप में कर्मचारियों के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास को बहुत महत्व दिया जाता है। इसी सोच के साथ 2020 से हर रविवार तीन घंटे की नियमित जूम मीटिंग आयोजित की जा रही है। इसमें एक घंटा योग सत्र होता है, जबकि शेष समय में विभिन्न विषयों पर चर्चा और प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किए जाते हैं। हर महीने कर्मचारियों को अलग-अलग विषय दिए जाते हैं ताकि वे अपनी सोच और नेतृत्व क्षमता विकसित कर सकें। इन्हीं बैठकों के दौरान सामूहिक यात्राओं की योजनाएं भी तैयार
की जाती हैं।

प्रश्न: इससे पहले भी कर्मचारियों को विदेश यात्राओं पर ले जाया गया है?

दीपा अरोड़ा: जी हां, यह हमारी निरंतर परंपरा है। 2022 में कर्मचारियों को नेपाल, 2023 में दुबई, 2024 में क्रूज यात्रा और 2025 में थाइलैंड की यात्रा करवाई गई। इन यात्राओं का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं बल्कि टीम-बिल्डिंग, आत्मविश्वास और सामूहिक अनुभवों को बढ़ाना भी होता है। इसी क्रम में 2026 में कैलाश मानसरोवर के एरियल व्यू दर्शन का कार्यक्रम तय किया गया, जो हमारे लिए अत्यंत विशेष और आध्यात्मिक महत्व का था।

प्रश्न: इस यात्रा की योजना कैसे बनी?

दीपा अरोड़ा: 19 जनवरी को सुरेश जी राठी सर ने अचानक यह इच्छा व्यक्त की कि कर्मचारियों को कैलाश मानसरोवर के दर्शन कराए जाएं। कैलाश मानसरोवर की पारंपरिक यात्रा बहुत कठिन होती है, इसलिए तय हुआ कि एरियल व्यू दर्शन करवाए जाएं। सुरेश जी राठी सर ने पूरे वर्ल्ड की लगभग यात्रा कर रखी है लेकिन कैलाश मानसरोवर की यात्रा बाकी थी, इसलिए इस बार यह यात्रा प्लान की गई। उनकी स्वीकृति मिलते ही हमने तुरंत टिकट, होटल, बस और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी शुरू कर दी। बहुत कम समय में पूरी योजना तैयार करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन शायद भगवान की मेहरबानी थी इसलिए सब कुछ सफलतापूर्वक हो गया। नेपालगंज काठमांडू में है और यहां आने के लिए पासपोर्ट या वोटर आईडी जरूरी है।

प्रश्न: यात्रा में इस्कॉन की क्या भूमिका रही?

दीपा अरोड़ा: यह यात्रा इस्कॉन बैंगलोर ने मैनेज की थी। इस यात्रा में कुल 70 लोगों का दल था, जिसमें से 46 यात्री बैंगलोर से और 23 यात्री सुरेश राठी ग्रुप के थे | इस ग्रुप में 12 कर्मचारी (जोधपुर एवं मुम्बई से), 1 योगा टीचर, सुरेशजी राठी सर – शशिजी राठी और बेटी के परिवार के 8 सदस्य मुंबई से शामिल हुए। इस्कॉन की ओर से तीन प्रभुजी थे। निखिलात्मा जगन्नाथ दासा जी जोधपुर से थे। बैंगलोर से उमापति दासा जी और पवन जी थे। पूरे समूह में जबरदस्त उत्साह था, क्योंकि कैलाश मानसरोवर के दर्शन हर किसी का सपना होता है। इस यात्रा में इस्कॉन ने हमारी 2 रात्रि नेपालगंज में और 1 रात्रि अयोध्या में ठहरने की व्यवस्था करी थी । इस पैकेज का चार्जेज Rs. 64000/- प्रति व्यक्ति था, जिसमें शुद्ध सात्विक भोजन (बिना प्याज और लहसुन के), बस यात्रा, होटल और कैलाश मानसरोवर की फ्लाइट शामिल थी | इसमें लखनऊ तक और अयोध्या से फ्लाइट का किराया शामिल नहीं है। इस यात्रा के लिये कोई भी आयु सीमा नहीं है और किसी तरह की कोई भी मेडिकल जांच अनिवार्य नहीं है।

नोट : आगामी 22 – 25 मार्च को इस्कॉन यह यात्रा फिर से करवा रहें है तो हमारा इस का यात्रा अनुभव और सभी की ओर से निवेदन है कि यदि कोई व्यक्ति यह चार्जेज अफोर्ड कर सकता है तो उनको जीवन में एक बार यह यात्रा अवश्य करनी चाहिये |

प्रश्न: कैलाश मानसरोवर के धार्मिक महत्व के बारे में कुछ बताएं।

दीपा अरोड़ा: मानसरोवर झील और पास स्थित कैलाश पर्वत पूरी दुनिया में आध्यात्मिक केंद्र माने जाते हैं। हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है। बौद्ध धर्म में यह आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है, जबकि जैन धर्म में इसे प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव से जोड़ा जाता है। समुद्र तल से लगभग 4,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील दुनिया की सबसे ऊंची मीठे पानी की बड़ी झीलों में से एक है। ‘मानसरोवर’ शब्द का अर्थ है—मन से उत्पन्न झील।

प्रश्न: यात्रा के दौरान क्या चुनौतियां सामने आईं?

दीपा अरोड़ा: 13 फरवरी को हमारा दल जोधपुर से फ्लाइट द्वारा जयपुर होते हुए लखनऊ पहुंचा। 14 फरवरी को हमें बस से नेपालगंज जाना था, लेकिन उस दिन कांवड़ यात्रा के कारण रास्ते बंद थे। हमें लंबा रास्ता तय करना पड़ा और देर रात नेपालगंज पहुंचे। यह यात्रा की पहली परीक्षा थी, जिसने हमारे धैर्य की परख ली। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि थी और उसी दिन एरियल व्यू के दर्शन होने थे, लेकिन मौसम अचानक खराब हो गया। हमारी फ्लाइट कैंसिल हो गई और पहला और दूसरा दोनों बैच उस दिन दर्शन
नहीं कर पाए। हमें लगा जैसे भगवान महादेव हमारी आस्था की परीक्षा ले रहे हों। उस दिन हमने सत्संग किया, प्रार्थना की और नेपालगंज के बागेश्वरी मंदिर सहित कई मंदिरों के दर्शन किए और पूरा नेपालगंज घूमे और अन्य दर्शनीय स्थल देखे और शिवरात्रि का आनंद लिया। और हां, जब राम मंदिर के दर्शन के लिए निकले तो हमारी बस खराब हो गई थी और भगवान ने हमारे धैर्य की यहां भी परीक्षा ली। उस कठिन समय में पूरे समूह ने धैर्य और विश्वास बनाए रखा।

प्रश्न : वो बफीर्ले पहाड़, ऊंची चोटियां, मौन साधना करता हिमालय, सांस-सांस में शिव…कैसा अनुभव रहा?

दीपा अरोड़ा: 16 फरवरी की सुबह सभी लोग उत्साह के साथ तैयार थे। सुबह 10 बजे फ्लाइट ने उड़ान भरी। एक घंटे की उड़ान के दौरान एयरहोस्टेस ने यात्रियों को लगातार मार्गदर्शन दिया और सभी को दो-दो बार कैलाश मानसरोवर के दर्शन करवाए। ऊंचाई से बर्फ से ढंकी पर्वत चोटियां और हिमालय का दिव्य दृश्य देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। विमान में सत्संग, कीर्तन और भगवान शिव के जयकारे गूंज रहे थे। वह अनुभव शब्दों में व्यक्त करना कठिन है—वह सचमुच अलौकिक था। आदमी जब ऊपर उठता है तो उसका अहंकार का पारा गिरने लगता है। आसमां पर आदमी ऊपर तो होता है मगर उसे पल-पल अपनी जमीं याद आती है। क्योंकि आसमां से गिरने में एक पल भी नहीं लगता। शायद इसीलिए हम भगवान के एकदम करीब होते हैं। मेरे लिये कैलाश मानसरोवर के एरियल व्यू की यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक है। मेरी बचपन से इच्छा थीं कि कैलाश मानवरोवर की यात्रा करूं। लेकिन मैं इस बात को भूल चुकी थी। अचानक सुरेश जी सर ने यात्रा प्लान की तो मन प्रफुल्लित हो गया और बचपन का सपना जैसे फिर से जवां हो गया। यह आध्यात्मिक यात्रा थी जो मेरे जीवन और मेरे भविष्य के उन्नयन की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।

वो ऊंचे-ऊंचे बर्फीले पहाड़, ऊंची-ऊंची चोटियां, मौन साधना करता हिमालय…सांस-सांस में जैसे शिव रम गए। मैं शिव को अपना आराध्य मानती हूं। शिव देवों के देव हैं। शिव का दूसरा नाम भोलेनाथ है। नेपालगंज में शिव के अनेक भक्त हैं। नेपालगंज को शिव की नगरी भी कही जा सकती है। यहां पर कई शिव मंदिर है। यहां भांग के पकोड़ों का प्रसाद भी मिलता है। महाशिवरात्रि पर जगह-जगह भांग के पकोड़े मिलते हैं। यहां हिंदू रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं। लोगों में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था है।

प्रश्न: अयोध्या जन्म भूमि और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन भी हुए?

दीपा अरोड़ा: जी हां, नेपालगंज लौटने के बाद हम बस से अयोध्या पहुंचे। वहां राम जन्मभूमि के दर्शन किए और बाद में हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल और सरयू नदी के दर्शन किए। इसके बाद हम फ्लाइट से दिल्ली और ट्रेन से जोधपुर पहुंचे। अयोध्या जन्म भूमि में भगवान श्रीराम के दर्शन करने से आत्मा भीतर तक तृप्त हो गई। ऐसा लगा जैसे शबरी की प्रतीक्षा खत्म हुई और हमारी टीम के सदस्य भी श्रीराम के दर्शन कर धन्य हो गए। अयोध्या बहुत ही पवित्र नगरी है और यहां श्रीराम के धाम पहुंचकर मन में असीम शांति और सुकून का अनुभव किया। श्रीराम के आदर्श और यहां के लोगों की मधुर वाणी स्मृति पटल पर अंकित हो गई। अयोध्या आने वाले समय में भारत का बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल बनने की संभावनाएं रखता है, इसमें जरा भी सशंय नहीं हैं। आज की अयोध्या काफी बदल गई है। यहां श्रीराम है तो यहां के कण-कण में अध्यात्म की ऊर्जा है।

प्रश्न : आपका सपना पूरा हुआ, कैसा लग रहा है?

दीपा अरोड़ा : मैं आदरणीय सुरेश जी राठी सर और शशि राठी आंटी का हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करती हूँ, जिनकी प्रेरणा, मार्गदर्शन और स्नेहिल सहयोग के कारण मुझे पावन कैलाश मानसरोवर के दिव्य एरियल व्यू तथा अयोध्या जन्मभूमि के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह अनुभव मेरे जीवन के सबसे अनमोल और आध्यात्मिक क्षणों में से एक रहा है, जिसे शब्दों में पूर्णतः व्यक्त कर पाना संभव नहीं है।

मानसरोवर का अलौकिक दृश्य, हिमालय की गोद में स्थित उस पवित्र धाम का आकाशीय दर्शन, मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा से भर देने वाला रहा। वहीं अयोध्या की पावन जन्मभूमि के दर्शन ने श्रद्धा, भक्ति और गर्व की अनुभूति को और गहरा कर दिया। यह सब संभव हुआ तो केवल सुरेश जी सर और शशि आंटी के विश्वास, सहयोग और आशीर्वाद से। मैं विशेष रूप से सुरेश जी सर का दिल से धन्यवाद करना चाहूँगी, जिन्होंने मेरी काबिलियत पर भरोसा जताते हुए मुझे इस इस पूरी यात्रा में को-ऑर्डिनेट करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। यह जिम्मेदारी मेरे लिए केवल एक कार्य नहीं, बल्कि विश्वास की कसौटी थी। मैंने पूरे समर्पण, ईमानदारी और अपनी 100 प्रतिशत ऊर्जा के साथ इस दायित्व को निभाने का प्रयास किया। हर छोटे-बड़े पहलू का ध्यान रखते हुए मैंने सुनिश्चित किया कि यात्रा सुचारु, व्यवस्थित और सफल रहे। इस यात्रा संचालन में हमारे ग्रुप के सागर दायमा और दिलीप बहादुर का भी मुझे सहयोग मिला । उनका यह विश्वास मेरे लिए आगे बढ़ने की ताकत है और आगे भी मुझे बेहतर कार्य करने की शक्ति देता रहेगा। मैं पुनः दोनों का हृदय से धन्यवाद करती हूँ और उनके और शशि आंटी के अपनापन, स्नेह व मार्गदर्शन के लिए सदैव दिल की गहराईयों से आभारी रहूँगी।

प्रश्न: जोधपुर लौटने पर स्वागत कैसा रहा?

दीपा अरोड़ा: जोधपुर रेलवे स्टेशन पर सुरेश जी राठी सर, शशि मेम और फैमिली के साथ पूरी टीम का रिश्तेदारों और परिचितों ने माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया। बाद में उनके निवास पर दोनों बहनों के परिवारजनों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। पूरे दल के चेहरे पर संतोष और आनंद साफ दिखाई दे रहा था, क्योंकि सभी ने कठिनाइयों के बावजूद दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया था।

प्रश्न: इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश क्या है?

दीपा अरोड़ा: इस यात्रा ने हमें सिखाया कि आस्था की राह आसान नहीं होती। हर कदम पर चुनौतियां आती हैं, लेकिन धैर्य और ईश्वर में विश्वास बनाए रखें तो अंततः सफलता मिलती है। महादेव ने और रामजी ने हमारी परीक्षा ली, लेकिन अंत में हमें अपने दर्शन का आशीर्वाद भी दिया। यह केवल एक यात्रा नहीं बल्कि जीवन का अनुभव था, जिसने हमें आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया।

प्रश्न : यात्रा की सफलता में किस टूर ट्रेवल कंपनी का योगदान रहा?

दीपा अरोड़ा: हमने Well Nepal Travel & Treks Pvt. Ltd. Kathmandu, Nepal के माध्यम से अपनी कैलाश मानसरोवर के एरियल व्यू की यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की। कंपनी के रमेश जी का पूरा सहयोग रहा। इसके लिए श्री सुरेश जी राठी सर ने कंपनी के मैनेजर रमेश जी को धन्यवाद दिया। इनका विजिटिंग कार्ड हम इस न्यूज़ के अंत में संलग्न कर रहे है ।

प्रश्न : आस्था, धैर्य और टीम-स्पिरिट के बारे में क्या कहेंगी?

दीपा अरोड़ा: कैलाश मानसरोवर एरियल व्यू यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि जब संगठन अपने कर्मचारियों को केवल कार्यबल नहीं बल्कि परिवार मानता है, तो सामूहिक अनुभव और आध्यात्मिक यात्राएं उन्हें एक मजबूत टीम में बदल देती हैं। सुरेश राठी ग्रुप की यह पहल न केवल कॉर्पोरेट जगत में एक अनूठा उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच आध्यात्मिकता और टीम-स्पिरिट को साथ लेकर चलना ही सच्ची सफलता का मार्ग है। कठिनाइयों से भरी इस यात्रा में मौसम की बाधाएं, लंबा सफर और अनिश्चितताएं थीं, लेकिन अंततः श्रद्धा, धैर्य और सामूहिक विश्वास ने सभी यात्रियों को वह दिव्य अनुभव प्रदान किया, जिसे वे जीवन भर याद रखेंगे। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि और सार्थकता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor