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Tuesday, August 25, 2026, 10:42 am

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चित्रों के माध्यम से बच्चों को समझाई होली की पौराणिक कथा, गीता क्लास में गूंजा भक्ति का संदेश

श्रुति गर्ग ने बताया कि प्राचीन काल में एक असुर राजा हिरण्यकशिपु था, जो स्वयं को भगवान से भी बड़ा मानने लगा था। वह चाहता था कि सभी लोग उसकी पूजा करें, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। अनेक यातनाओं के बावजूद प्रह्लाद ने भगवान का नाम लेना नहीं छोड़ा। अंततः हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। किंतु ईश्वर की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। यही घटना होलिका दहन के रूप में स्मरण की जाती है।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

सेक्शन 7 में आयोजित गीता क्लास में इस बार होली पर्व के उपलक्ष्य में विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को होली की पौराणिक कथा चित्रों और रोचक प्रसंगों के माध्यम से समझाई गई। इस अवसर पर श्रुति गर्ग ने विद्यार्थियों को भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और होलिका दहन की कथा विस्तार से सुनाई तथा उन्हें जीवन में अच्छे और बुरे के अंतर को पहचानने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुई। इसके बाद श्रुति गर्ग ने बच्चों से संवाद करते हुए पूछा कि वे होली क्यों मनाते हैं। बच्चों के उत्तर सुनने के बाद उन्होंने चित्रों की सहायता से कथा का क्रमबद्ध वर्णन शुरू किया। रंग-बिरंगे पोस्टर और हाथ से बनाए गए चित्रों के जरिए उन्होंने समझाया कि कैसे अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है, जबकि सच्ची भक्ति और सत्य की हमेशा विजय होती है।

श्रुति गर्ग ने बताया कि प्राचीन काल में एक असुर राजा हिरण्यकशिपु था, जो स्वयं को भगवान से भी बड़ा मानने लगा था। वह चाहता था कि सभी लोग उसकी पूजा करें, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। अनेक यातनाओं के बावजूद प्रह्लाद ने भगवान का नाम लेना नहीं छोड़ा। अंततः हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। किंतु ईश्वर की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। यही घटना होलिका दहन के रूप में स्मरण की जाती है।

कथा के दौरान बच्चों ने बड़ी उत्सुकता से प्रश्न पूछे। श्रुति गर्ग ने सरल भाषा में उत्तर देते हुए समझाया कि यह कथा केवल धार्मिक प्रसंग नहीं है, बल्कि जीवन का संदेश भी है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, लेकिन यदि मन में विश्वास और सच्चाई हो तो अंततः विजय उसी की होती है।

उन्होंने बच्चों से कहा, “भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि सच्चे मन से अच्छे कर्म करना भी भक्ति ही है। जो व्यक्ति ईश्वर पर विश्वास रखता है और सदाचार का पालन करता है, भगवान उसकी पग-पग पर रक्षा करते हैं।” इस संदेश ने बच्चों के मन में सकारात्मक सोच का संचार किया।

गीता क्लास के इस विशेष सत्र में बच्चों को यह भी समझाया गया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हमें अपने अंदर की ईर्ष्या, क्रोध और अहंकार जैसी बुराइयों को जलाकर प्रेम, सहयोग और सद्भाव को अपनाना चाहिए। श्रुति गर्ग ने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करें तथा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलें।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने होली से संबंधित चित्र बनाए और अपने विचार साझा किए। कुछ बच्चों ने कहा कि वे इस बार होली प्राकृतिक रंगों से खेलेंगे और किसी को भी जबरदस्ती रंग नहीं लगाएंगे। इस प्रकार गीता क्लास ने न केवल धार्मिक कथा का ज्ञान दिया, बल्कि नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का भी पाठ पढ़ाया। आयोजकों ने बताया कि गीता क्लास का उद्देश्य बच्चों में संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का विकास करना है। समय-समय पर इस प्रकार के विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं ताकि बच्चे अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहें। समापन पर सभी बच्चों ने मिलकर “सत्य की विजय हो” का उद्घोष किया। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार दिखाई दिया। इस तरह सेक्शन 7 की गीता क्लास में आयोजित यह विशेष सत्र बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ, जिसने उन्हें जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor