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Tuesday, August 25, 2026, 10:59 am

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मधुबन में आस्था और उल्लास का संगम: बाबा रामदेव चौक पर विधिवत हुआ भव्य होलिका दहन

महिलाओं ने मोळी से की परिक्रमा, माळा घोलाई पर्व पर मालाओं का समर्पण

युवाओं की भारी भीड़, पुलिस जाब्ता तैनात; क्षेत्र में देर रात तक रहा मेले सा माहौल

दिलीप कुमार पुरोहित, जोधपुर।

होली पर्व के पावन अवसर पर मधुबन महादेव युवा विकास समिति की ओर से बाबा रामदेव चौक पर सोमवार रात 8 बजे विधिवत एवं भव्य होलिका दहन का आयोजन किया गया। पूरे क्षेत्र में सुबह से ही उत्सव जैसा वातावरण बना रहा और रात होते-होते चौक पर आस्था, उल्लास और सामुदायिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में शंकरलाल शर्मा, सुमन शर्मा, योगेन्द्र कुमार शर्मा, नारायणलाल शर्मा और संतोष मेवाड़ा सहित मधुबन क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों और युवाओं का सक्रिय सहयोग रहा। समिति के सदस्यों ने आयोजन की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू कर दी थीं। चौक की साफ-सफाई, सजावट, रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया ताकि कार्यक्रम व्यवस्थित और गरिमामय ढंग से सम्पन्न हो सके।

विधि-विधान से हुआ पूजन, महिलाओं ने निभाई परंपरा

सोमवार रात शुभ मुहूर्त में महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर विधि-विधान से होलिका का पूजन किया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान धारण कर थाली सजाई और मोळी (रक्षा सूत्र) से होलिका की परिक्रमा की। परिक्रमा करते समय उन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति और क्षेत्र की शांति की कामना की।

होलिका के समक्ष दीपक प्रज्ज्वलित किए गए और श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की गई। बच्चों और युवाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। वातावरण में “होलिका माता की जय” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

माळा घोलाई पर्व पर मालाओं का समर्पण

इस बार होलिका दहन का दिन माळा घोलाई पर्व के साथ पड़ने से आयोजन का महत्व और बढ़ गया। परंपरा के अनुसार शाम के समय श्रद्धालुओं ने मालाएं होलिका की आंच में समर्पित कीं। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

महिलाओं ने विशेष रूप से इस अनुष्ठान में भाग लिया और परिवार की मंगलकामना के साथ मालाएं अर्पित कीं। इस दृश्य ने आयोजन को और भी आध्यात्मिक रंग प्रदान किया।

भव्य होलिका दहन, आस्था का ज्वार

पूजन के उपरांत रात 8 बजे विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया। जैसे ही अग्नि की लपटें उठीं, उपस्थित लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ परिक्रमा की। यह दृश्य बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बनकर सामने आया।

होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और सत्य की विजय का स्मरण कराती है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया।

युवाओं की भारी भीड़, क्षेत्र में दिखा उत्साह

मधुबन क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। युवाओं की भारी भीड़ ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा—सभी वर्गों के लोग बड़ी संख्या में बाबा रामदेव चौक पर एकत्रित हुए। रात के समय चौक पर मेले जैसा माहौल नजर आया। आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे। रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग उत्सव की शोभा बढ़ा रहे थे।

पुलिस जाब्ता तैनात, पार्किंग में हुई मशक्कत

भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। बड़ी संख्या में वाहनों के आगमन के कारण पुलिस को पार्किंग व्यवस्था सुचारु रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिसकर्मियों ने धैर्यपूर्वक वाहनों को व्यवस्थित स्थानों पर खड़ा करवाया और यातायात को नियंत्रित किया। आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में सम्पन्न हुआ, जिससे क्षेत्रवासियों ने भी राहत की सांस ली।

क्षेत्रवासियों का आर्थिक सहयोग

इस आयोजन की एक विशेषता यह रही कि क्षेत्रवासियों ने अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग प्रदान किया। कई लोगों ने गुप्त रूप से भी सहयोग किया, जिससे सामुदायिक एकजुटता और परस्पर विश्वास की भावना और मजबूत हुई। समिति के सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे मधुबन क्षेत्र का सामूहिक प्रयास है। सभी के सहयोग से ही इतने भव्य स्तर पर कार्यक्रम संभव हो पाया।

सामाजिक समरसता का प्रतीक बना आयोजन

होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक भी है। इस अवसर पर लोगों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया और होली की शुभकामनाएं दीं। बुजुर्गों ने युवाओं को परंपराओं का महत्व समझाया और बच्चों को संस्कारों से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। इस प्रकार यह आयोजन नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बना।

देर रात तक रहा उत्सव का माहौल

होलिका दहन के बाद भी लोग देर रात तक चौक पर मौजूद रहे। समूहों में लोग एक-दूसरे से मिलते-जुलते रहे और उत्सव की खुशियां साझा करते रहे। बच्चों के चेहरे पर विशेष उत्साह झलक रहा था। रात को पूरे क्षेत्र में मेले जैसा दृश्य दिखाई दिया। दुकानों और घरों में रोशनी की सजावट ने वातावरण को और आकर्षक बना दिया।

सामुदायिक एकता का उदाहरण

मधुबन महादेव युवा विकास समिति की पहल पर आयोजित यह होलिका दहन कार्यक्रम सामुदायिक एकता और सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। क्षेत्र के लोगों ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर कार्य करता है तो हर आयोजन सफल और यादगार बन जाता है। अंततः, बाबा रामदेव चौक पर संपन्न हुआ यह होलिका दहन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक बन गया। अग्नि की पवित्र लपटों के साथ मधुबन क्षेत्र ने बुराइयों को त्यागकर प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता के साथ नए उत्साह से होली का स्वागत किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor