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Thursday, April 23, 2026, 5:15 pm

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सुरों की सरिता…रोनकिनी गुप्ता के शास्त्रीय रागों ने मन के तारों को झंकृत किया

जोधपुर में सजी ‘ब्लिसफुल म्यूजिकल इवनिंग’ 

अनुबंध और FDDI के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन, अनुप पुरोहित और आशीष रागवानी ने दी संगत

 

दिलीप कुमार पुरोहित. पंकज जांगिड़. जोधपुर 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

जोधपुर में संगीत प्रेमियों के लिए विशेष संगीत संध्या का आयोजन किया गया। जहां सुर, ताल और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। अनुबंध और एफडीडीआई जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार की शाम ब्लिसफुल म्यूजिकल इवनिंग” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एफडीडीआई ऑडिटोरियम में किया गया। संगीत संध्या का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका रोनकिनी गुप्ता की प्रस्तुति रही। रोनकिनी गुप्ता अपनी मधुर और भावपूर्ण गायकी के लिए जानी जाती हैं। उनकी आवाज में शास्त्रीय संगीत की गहराई और सुगम संगीत की सरलता का अद्भुत मेल देखने को मिलता है, जो श्रोताओं को भाव-विभोर कर देता है। रोनकिनी गुप्ता ने 30 साल तक तालीम ली। उनके गुरु चंद्रकांत आप्टे हैं। वे ग्वालियर व किराना घराना से संबंध रखती हैं। राेनकिनी शास्त्रीय गायन में 15 साल से जुड़ाव रखती हैं। रोनकिनी आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, थाइलैंड और कनाडा सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पुणे, हैदराबाद और राजस्थान सहित कई राज्यों में उनके कार्यक्रम होते रहे हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद एमबीए कर रखा है। गणित और सांख्यिकीय रोनकिनी के विषय रहे हैं। लेकिन शास्त्रीय गायन में बचपन से रुचि रही है। सारेगामा की वे 2004 में विनर रह चुकी हैं। इसके बाद उनके म्यूजिकल कॅरिअर की शुरुआत हुई। उन्होंने तुम्हारी सूलू और सुई धागा फिल्मों में काम किया है। रहमान सर के साथ भी रोनकिनी काम कर चुकी हैं। और जल्द ही खोज फिल्म रीलीज होने वाली है।

राग विहार से शुरुआत, शृंगार रस की रचना से रचा सुरों का संसार

-लट उलझी सुलझा जा बालमा…

रोनकिनी गुप्ता ने राग विहार से शुरुआत की और शृंगार रस की रचना से सुरों का संसार रचा। उन्होंने शास्त्रीय गायन की परंपरागत गायकी के साथ अपनी विशिष्ट शैली का प्रदर्शन किया तो एफडीडीआई हॉल करतल ध्वनि से गूंज उठा। रोनकिनी ने एक के बाद एक प्रस्तुति से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। रोनकिनी थी, सुरमई सांझ थी, सुरों का सफर था, रोशनी का प्रवाह था, एफडीडीआई के ऑडिटोरियम में बड़ी संख्या में दर्शक थे और और था सुरों का जादू जो रोनकिनी के तालु से निकलकर हर श्रोता तक पहुंचकर आनंदमी उत्सव का रूप दे रहे थे। लट उलझी सुलझा जा बालमा…सुरों का जादू एक बार शुरू हुआ तो फिर थमने का नाम नहीं ले रहा था।

शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय गायन का दौर चलता रहा

रोनकिनी गुप्ता संग शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय गायन का दौर चलता रहा। हर कोई नई प्रस्तुति की दाद दे रहा था। रोनकिनी ने सुरों के तार ऐसे छेड़े की आत्मा को सुकून की अनुभूति होने लगी। एफडीडीआई ऑडिटोरियम में बैठे अनुबंध वृद्धजन कुटीर के दादा-दादी और नाना-नानी खुशी से झूम उठे। उन्होंने रोनकिनी की गायकी का आनंद लिया। हर राग, हर सुर उन्हें नई ऊर्जा दे रहा था। जीवन की सांझ में सुरमई सांझ ने नव उजाले से साक्षात्कार करवाया।

अनूप ने हारमोनियम, आशीष ने तबले पर संगत की 

रोनकिनी गुप्ता के साथ हारमोनियम पर संगत कर रहे अनूप पुरोहित ने कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की। हारमोनियम पर संगत से कार्यक्रम में रंग जम गया। अनूप की विशिष्ट शैली ने सबका ध्यान अनायास अपनी ओर खींच लिया। अनूप पुरोहित प्रो. राजेन्द्र पुरोहित के शिष्य रहे हैं। राजन-साजन मिश्रा के साथ हारमोनियम पर संगत कर चुके हैं। अनूप पुरोहित को 2023 में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी से पुरस्कार मिल चुका है।

कार्यक्रम में आशीष रागवानी ने तबले पर ताल से रंग जमाया। आशीष का जन्म जोधपुर में हुआ लेकिन 10 साल से मुंबई में रहते हैं। आशीष रागवानी ने तीन वर्ष की आयु में ही तबला अपने चाचा इंद्रजीत छगाणी से सीखना शुरू किया। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने चाचा से ही ली। 17 वर्ष की आयु में आकाशवाणी कलाकार के रूप में स्थापित हो गए। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आशीष रागवानी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। रोनकिनी गुप्ता 10 साल पहले आशीष रागवानी से मिली और तब से निरंतर साथ में प्रोग्राम दे रहे हैं। आशीष चौथी पीढ़ी में तबला वादन कर रहे हैं। हरिप्रसाद चौरसिया के साथ उनका संबंध रहा है। देश-विदेश में उनकी विशिष्ट पहचान है। अनूप पुरोहित के साथ भी रोनकिनी नियमित प्रोग्राम कर रही हैं।

अनुबंध का सिल्वर जुबली वर्ष, हंसते-खेलते मनाएंगे उत्सव : अनुराधा 

अनुबंध वृद्धजन कुटीर की संचालिका अनुराधा अडवानी ने बताया कि अनुबंध का सिल्वर जुबली वर्ष है। हमे इसकी खुशी जरूर है, मगर हम मन से कहते हैं कि भगवान ना करे किसी व्यक्ति को ओल्ड ऐज होम आना पड़े। वृद्धाश्रम कोई भी व्यक्ति खुशी से नहीं आना चाहता। लेकिन हमने जो बीड़ा आज से 24 साल पहले उठाया उसे हम आज भी निभा रहे हैं, इसकी हमें संतुष्टि हैं। अनुराधा अडवानी ने बताया कि उन्होंने अपने पति नरेन्द्र अडवानी के साथ मिलकर जो रास्ता चुना उसमें कई कठिनाइयां आईं लेकिन भगवान के आदेश से जो काम शुरू हुआ, उसे भगवान ही पूरा करता रहा है। अनुराधा अडवानी ने बताया कि अनुबंध वृद्धजन कुटीर ईश्वरीय आदेश से शुरू हुआ और दादा-दादी और नाना-नानी अब हमारा परिवार है। अनुराधा अडवानी ने बताया कि 24 साल पहले अप्रैल-मई के दिन थे जब हमने जमीन ली, जून में रजिस्ट्रेशन करवाया, जुलाई में निर्माण शुरू करवाया और 25 नवंबर 2002 को अनुबंध वृद्धजन कुटीर शुरू हुआ। वैसे तो अनुबंध की वर्षगांठी 25 नवंबर को आती है। लेकिन हमने कार्यक्रम आयोजित करने शुरू कर दिए हैं। यह आयोजन भी इसी का एक हिस्सा है। हमारा उद्देश्य है कि हंसते-गाते समय बीते और इसी तरह कार्यक्रम आयोजित करते हुए अनुबंध सिल्वर जुबली मनाएं। 25वें वर्ष में इसी खुशी के साथ हमारा प्रवेश होगा।

संगीत क्या है? संचालक प्रियंका बैग के सवालों में उत्तरों की झड़ी लग गई…डॉ. राम अकेला ने कहा- बारिश की बूंदों की छन-छन संगीत है

आरंभ में संचालक प्रियंका बैग ने अपने चिरपरित अंदाज में संचालन शुरू किया। उन्होंने दर्शकों से पूछा कि आप बताएंगे संगीत क्या है? ऐसे में दर्शकों ने उत्तरों की झड़ी लगा दी। साहित्यकार श्याम गुप्ता शान्त ने कहा कि संगीत मन के तारों को झंकृत करने की ईश्वरीय कृति है। असरार आहिल ने कहा कि प्यास को तृप्त करना ही संगीत है। अशफाक अहमद फौजदार ने कहा कि संगीत तन-मन और आत्मा को साधने का उपक्रम है। इससे सुकून बरसता है। पंकज जांगिड़ ने कहा कि संगीत खुशनुमा अहसास है। उमेश दाधीच ने कहा कि मरणासन्न मरीज को संगीत ऑक्सीजन सिलेंडर का काम करता है। पत्रकार मिश्रीलाल पंवार ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि संगीत बीमार को भी ठीक कर देता है। पत्रकार दिलीप कुमार पुरोहित ने कहा कि संगीत ईश्वर की अनुपम भेंट हैं। इसी तरह अपनी चिरपरिचत शैली में मंच संचालन करते हुए डॉ. राम अकेला ने कहा कि संगीत बादलों का धरती पर छन-छन की करती बूंदों का राग है, सरहद पर सीने पर गोलियों की ठक-ठक और शहीद की शहादत संगीत है…ऐसी ही कविता के साथ डॉ. राम अकेला ने कहा कि भारत शब्द तीन शब्द से बना है – भा का अर्थ भाव, र का अर्थ रस और त का अर्थ ताल है। यानी भाव, रस और ताल ही भारत है।

अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित किया

कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों के रूप में मौजूद बीएसएफ आईजी एमएल गर्ग, डॉ. संगीता सिंह, डाॅ. अदिति, केएल जैन, एफडीडीआई डायरेक्टर अनिल कुमार सर, अनुबंध की संचालिका अनुराधा अडवानी, उनके पति नरेन्द्र अडवानी, डॉ. राम अकेला और सभी मेहमान कलाकारों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित किया। कार्यक्रम में कर्नल सुरेश श्रीमाली, मनीष मेहता, मांगीलाल भाटी, रजा मोहम्मद खान सहित कई लोग मौजूद थे। इस मौके शहर के प्रबुद्ध नागरिक, बिजनेसमैन, समाजसेवी और स्टूडेंट्स मौजूद थे।

साथ ही अनुबंध वृद्धजन कुटीर के बुजुर्ग विशिष्ट मेहमान थे। अनुबंध के दादा-दादी और नाना-नानी ने रोनकिनी गुप्ता और अन्य कलाकारों को श्रीमद भागवत की पोथी भेंट की। साथ ही अनुराधा अडवानी और नरेन्द्र अडवानी ने अतिथियों की अगवानी की। पूरे कार्यक्रम में प्रियंका बैग और डॉ. राम अकेला के संचालन ने समां बांध दिया। कार्यक्रम के अंत में अनुराधा अडवानी ने आभार जताया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor