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Thursday, April 23, 2026, 7:06 pm

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ऑक्सफोर्ड-हार्वर्ड में पढ़ना हुआ आसान…नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप से सपने हो रहे साकार, भारत सरकार की पहल

-आर्थिक तंगी नहीं बनी रुकावट, भारत सरकार की योजना ने बदली जिंदगी

-चार उदाहरण जो बताते हैं कि कैसे सपनों को मिला वैश्विक मंच

-जानिए कैसे काम करती है नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप और कैसे करें आवेदन

सपनों से हकीकत तक का सफर, अब आसान

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

भारत के छोटे कस्बों और गांवों में बैठे लाखों छात्र हर साल एक बड़ा सपना देखते हैं—विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का। ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी के नाम सुनते ही आंखों में चमक आ जाती है। लेकिन यह सपना अक्सर आर्थिक अभाव की दीवार से टकराकर टूट जाता है।

इसी दीवार को तोड़ने का काम कर रही है भारत सरकार की नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) योजना। यह योजना उन छात्रों के लिए एक पुल बनकर उभरी है, जो प्रतिभाशाली हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं।

चार सपने, चार कहानियां: संघर्ष से सफलता तक

1. राकेश : 

पिता खेतों में मजदूरी करते हैं। बचपन से ही पढ़ाई में तेज राकेश का सपना था कि वह समाज के लिए कुछ बड़ा करे। राकेश ने मेहनत के दम पर विदेश की यूनिवर्सिटी में एडमिशन तो हासिल कर लिया, लेकिन फीस और रहने का खर्च सुनकर उसका सपना अधूरा लगने लगा। तभी उसे नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के बारे में पता चला। स्कॉलरशिप मिलने के बाद उसकी पूरी ट्यूशन फीस, रहने और खाने का खर्च, यहां तक कि हवाई यात्रा भी कवर हो गई।

2.सुनीता : 

सुनीता। पारंपरिक कारीगर परिवार की बेटी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर। उसने अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप ने उसकी राह आसान कर दी। आज सुनीता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च कर रही है और कहती है—“यह सिर्फ स्कॉलरशिप नहीं, बल्कि आत्मविश्वास देने वाली योजना है।”

3. इंसाफ : 

घुमंतू (नोमैडिक) समुदाय का बेटा। पढ़ाई के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप ने उन्हें विदेश में उच्च शिक्षा का अवसर दिया। इंसाफ का मानना है—“सरकार की इस योजना ने हमें मुख्यधारा में लाने का काम किया है।”

4. कविता : 

कविता। माता-पिता खेत मजदूर। पढ़ाई में हमेशा आगे। विदेश में पीएचडी करने का सपना देखा। आर्थिक स्थिति बाधा बन रही थी। स्कॉलरशिप मिलने के बाद रिसर्च की राह आसान हो गई। वह कहती हैं—“यह योजना गरीबों के लिए वरदान है।”

क्या है नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप?

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत चलाई जाती है। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा का अवसर देना है। यह स्कॉलरशिप केवल मास्टर्स और पीएचडी के लिए दी जाती है।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस योजना का लाभ विशेष वर्गों के छात्रों को दिया जाता है:

  • अनुसूचित जाति (SC)
  • डिनोटिफाइड, नोमैडिक और सेमी-नोमैडिक ट्राइब्स
  • भूमिहीन कृषि मजदूरों के परिवार
  • पारंपरिक कारीगर परिवार

जरूरी शर्तें:

  • कम से कम 60% अंक
  • अधिकतम आयु 35 वर्ष
  • परिवार की आय 8 लाख रुपये से कम
  • विदेश की मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से एडमिशन या ऑफर

कैसे करें आवेदन?

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है:

  1. आधिकारिक वेबसाइट पर nosmsje.gov.in पर जाएं
  2. रजिस्ट्रेशन करें
  3. शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी भरें
  4. जरूरी दस्तावेज अपलोड करें
  5. फॉर्म सबमिट करें

चयन प्रक्रिया और सीटें

हर साल कुल 125 स्कॉलरशिप दी जाती हैं:

  • 115 SC छात्रों के लिए
  • 6 नोमैडिक ट्राइब्स के लिए
  • 4 अन्य वर्गों के लिए

इसके अलावा 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

चयन प्रक्रिया साल में दो बार होती है:

  • फरवरी–मार्च
  • सितंबर–अक्टूबर

क्या-क्या खर्च कवर होता है?

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक कवरेज है:

  • पूरी ट्यूशन फीस (सरकार सीधे भरती है)
  • रहने और खाने के लिए स्टाइपेंड
  • कंटीजेंसी ग्रांट
  • वीजा फीस
  • मेडिकल इंश्योरेंस
  • हवाई यात्रा

आर्थिक सहायता:

  • अमेरिका सहित अन्य देशों के लिए: 15,400 डॉलर सालाना
  • यूके के लिए: 9,900 पाउंड सालाना

क्यों खास है यह योजना?

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप सिर्फ आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का माध्यम है।

  • यह योजना प्रतिभा को अवसर देती है
  • सामाजिक समानता को बढ़ावा देती है
  • भारत के छात्रों को वैश्विक मंच देती है

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारत के सामाजिक ढांचे में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इससे उन वर्गों को अवसर मिल रहा है, जो पहले इससे वंचित थे।

हर सपना संभव है

सैकड़ों छात्र हैं, जिनकी जिंदगी इस योजना ने बदल दी है। नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप यह साबित करती है कि अगर प्रतिभा और मेहनत है, तो आर्थिक बाधाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। आज जरूरत है कि अधिक से अधिक छात्र इस योजना के बारे में जानें और इसका लाभ उठाएं। क्योंकि शायद अगली सफलता की कहानी आपकी हो सकती है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor