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Sunday, October 18, 2026, 8:26 am

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स्वामी ईश्वरानंद गिरि के श्रीविग्रह एवं श्रीपादुका का अभिषेक होगा

कमल पुष्प और रुद्राक्ष से होगी अर्चना

भरत जोशी. जोधपुर

परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज द्वारा दईजर लाछा बासनी में स्थापित संवित धाम आश्रम में दो दिवसीय श्रीवेद व्यास श्रीगुरु पूर्णिमा महोत्सव के दूसरे दिन 29 जुलाई को प्रातः 9 बजे स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज के श्रीविग्रह एवं श्रीपादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक, पूजन एवं अर्चना की जाएगी। श्रीविग्रह और चांदी की श्रीपादुका का दूध, दही, घृत, शहद, शक्कर व पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। अभिषेक एवं उत्तर पूजन के बाद 1008 गुरु सहस्रनामावली से बिल्व पत्र, कमल पुष्प व रुद्राक्ष से अर्चना की जाएगी।

जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी की अध्यक्षा रानी उषा देवी और सचिव भरत जोशी ने बताया कि
सनातन वैदिक परंपरा में गुरु पादुका को गुरु के ज्ञान, तप, त्याग, करुणा, ब्रह्मनिष्ठा एवं कृपा-शक्ति का दिव्य प्रतीक माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि गुरु के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है तथा उनकी पादुका का श्रद्धापूर्वक पूजन करने से साधक के जीवन में ज्ञान, विनय, श्रद्धा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। संस्थान के सुनील दाधीच, विमल वर्मा, रामप्रकाश लोहरा, किशनचंद बोहरा, कृपकिशन पुरोहित, सुनील पालीवाल, राजेंद्र पुरोहित, कैलाश बोहरा, महेंद्र कल्ला सहित अनेक साधक गुरु पूजन में सहयोग करेंगे।

संवित साधनायन के वरिष्ठतम साधक राजेंद्र वशिष्ठ और जगदीश नारायण पुरोहित ने बताया कि गुरु का स्वरूप ध्यान का आधार है, गुरु के चरण पूजन का आधार हैं, गुरु का वचन मंत्र का आधार है तथा गुरु की कृपा ही मोक्ष का मूल कारण है। उन्होंने बताया कि जोधपुर के संवित साधक रोहित सोनी ने पूज्य स्वामीजी के श्रीविग्रह के लिए चाँदी का भव्य छत्र तथा चाँदी की निर्मित श्रीपादुका गुरु चरणों में श्रद्धापूर्वक समर्पित की है। इससे पूर्व भी उन्होंने स्वामीजी के निवास कुटिया “विरजा” के लिए भी चाँदी की श्रीपादुका अर्पित की थी। इसी चांदी की श्रीपादुका का अभिषेक व पूजन किया जाएगा। इस अवसर पर ऋतंभरा वसिष्ठ, त्रिपुरा वशिष्ठ, हेमांगी वशिष्ठ, नटवर व्यास, संतोष व्यास, शिवकुमार पुरोहित, दिव्यांश व्यास संवित संकीर्तन प्रस्तुत करेंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor