जोधपुर। राजस्थान सहित देशभर के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट ने आधुनिक उपचार पद्धतियों और डायबिटीज से जुड़ी नई दवाओं पर मंथन किया। जोधपुर में आयोजित राज-ईएमएसआईकॉन 2026 में विशेषज्ञों ने टाइप-1 डायबिटीज को स्टेज-3 तक पहुंचने से रोकने और एक्रोगेमगली के उपचार में सामने आए नए विकल्पों पर चर्चा की।
विशेषज्ञों के अनुसार टाइप-1 डायबिटीज में टेजलिजुमैब ऑटोइम्यून प्रक्रिया को प्रभावित कर बीमारी के बढ़ने की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है। वहीं एक्रोगेमगली के उपचार में पैसिरियोटाइड रोजाना एक गोली के रूप में आधुनिक विकल्प के तौर पर चर्चा में रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि एक्रोगेमगली में ग्रोथ हार्मोन का स्तर बढ़ने से हाथ-पैर, चेहरे की हड्डियों और अन्य ऊतकों में बदलाव हो सकते हैं।
सम्मेलन में हाइपरपैराथायरॉयडिज्म, डायबिटीज, मोटापा, थायरॉयड, पिट्यूटरी और हार्मोन संबंधी बीमारियों के साथ आधुनिक उपचार पद्धतियों पर भी विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। आयोजन में राजस्थान शाखा के वार्षिक सम्मेलन के तहत देश के विभिन्न हिस्सों से आए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट ने नई तकनीकों और उपचार विकल्पों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि नई दवाओं और आधुनिक उपचार विकल्पों से मरीजों के बेहतर प्रबंधन की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
