हर पांच दिन में एक बार शटडाउन, कटौती से करीब 8 करोड़ लीटर पानी बचाने का दावा; लेकिन लीकेज और अपव्यय से व्यवस्था पर सवाल
जोधपुर। मानसून के विदा होते ही जोधपुर में पेयजल की मांग बढ़ने लगी है। शहर में पानी की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जलापूर्ति व्यवस्था में कटौती की जा रही है। स्थिति यह है कि कई क्षेत्रों में महीने में महज करीब 9 दिन ही नियमित रूप से पानी की आपूर्ति हो पा रही है। जलापूर्ति व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक पांच दिन में एक बार शटडाउन लिया जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पानी की कटौती के जरिए प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बचाने का प्रयास किया जा रहा है। गणना के अनुसार कटौती के माध्यम से महीने में करीब 8 करोड़ लीटर पानी की बचत बताई गई है। इसके बावजूद बचाए गए पानी का पूरा लाभ शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को नहीं मिल पा रहा है।
छह दिन अतिरिक्त कटौती का असर
जलापूर्ति व्यवस्था में सामान्य कटौती के अतिरिक्त भी कुछ दिनों की कटौती होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी की मांग बढ़ने के साथ ही उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में विभाग के सामने सीमित पानी से शहर की जरूरत पूरी करने की चुनौती बनी हुई है।
लीकेज और अपव्यय बड़ी चुनौती
पानी की बचत के लिए कटौती करना एक उपाय है, लेकिन पाइपलाइन लीकेज, खुले नलों और अन्य कारणों से पानी की बर्बादी होने पर बचत का उद्देश्य प्रभावित होता है। ऐसे में जलापूर्ति के साथ-साथ पाइपलाइन नेटवर्क की निगरानी और लीकेज रोकने पर भी जोर देने की जरूरत है।
पानी का गणित
आंकड़ों के मुताबिक, शहर में उपलब्ध जल स्रोतों से मिलने वाले पानी और घरेलू जरूरतों के बीच बड़ा अंतर है। सामान्य जलापूर्ति के साथ अतिरिक्त कटौती लागू होने से पानी की बचत की जाती है। इसके बावजूद बढ़ती आबादी और गर्मी के दौरान बढ़ने वाली मांग को देखते हुए जल प्रबंधन लगातार चुनौती बना हुआ है। जल संरक्षण के लिए जरूरी है कि विभागीय स्तर पर लीकेज को रोका जाए और उपभोक्ता भी पानी का अनावश्यक इस्तेमाल न करें। इससे कटौती के बावजूद उपलब्ध पानी का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।


