कायलाना-तख्तसागर जलाशयों में पानी बचाने के लिए हर पांच दिन में एक बार लिया जा रहा शटडाउन, तीसरे चरण के पानी पर टिकी उम्मीद
जोधपुर। मानसून के कमजोर रहने के कारण इस बार जोधपुर में जल संकट की चिंता अभी से बढ़ने लगी है। कायलाना-तख्तसागर जलाशयों में उपलब्ध पानी सीमित होने के चलते जलदाय विभाग को पानी बचाने के लिए शटडाउन लेना पड़ रहा है। यदि तीसरे चरण का पानी समय पर नहीं मिला तो दिसंबर से ही शहर में जल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
वर्तमान में दोनों प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर काफी कम है। उपलब्ध पानी को लंबे समय तक उपयोग में लेने के लिए जलापूर्ति व्यवस्था में कटौती की जा रही है। बताया गया है कि पानी बचाने के लिए हर पांच दिन में एक बार शटडाउन लिया जा रहा है। इसका सीधा असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
अभी 200 एमसीएफटी भी नहीं पानी
कायलाना-तख्तसागर जलाशयों में वर्तमान में करीब 180 से 190 एमसीएफटी पानी ही उपलब्ध बताया जा रहा है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में इससे बेहतर स्थिति थी। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध पानी को गर्मी तक सुरक्षित रखना है। जलाशयों में पानी की आवक कम होने के कारण लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभाग का प्रयास है कि उपलब्ध पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग किया जाए और अनावश्यक खपत को रोका जाए।
तीसरे चरण पर टिकी उम्मीद
जल संकट को टालने के लिए अब तीसरे चरण के पानी की उम्मीद की जा रही है। यदि तीसरे चरण के तहत पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाता है तो शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि यह पानी नहीं मिला तो दिसंबर से ही स्थिति चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है। जलाशयों में करीब 350 एमसीएफटी पानी सुरक्षित रहने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद ही आगामी महीनों में नियमित जलापूर्ति बनाए रखने की स्थिति बेहतर हो सकेगी।
गर्मी में बढ़ सकती है परेशानी
अधिकारियों के सामने केवल मौजूदा समय की जलापूर्ति बनाए रखना ही चुनौती नहीं है, बल्कि आने वाली गर्मी के लिए भी पानी सुरक्षित रखना जरूरी है। गर्मी के दौरान पानी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में यदि जलाशयों में पर्याप्त स्टोरेज नहीं रहा तो शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति का अंतराल बढ़ सकता है। फिलहाल तीसरे चरण के पानी को लेकर उम्मीद बनी हुई है। लेकिन यदि पर्याप्त पानी नहीं मिला तो जल संकट का असर सर्दियों से ही दिखाई देने लगेगा और आने वाले महीनों में जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।


