समय पर जांच और आधुनिक उपचार से स्तन बचाने की संभावना बढ़ी, पुरुषों में भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर
जोधपुर। ब्रेस्ट कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर महिलाओं के मन में स्तन निकालने की आशंका पैदा हो जाती है, लेकिन हर मरीज में स्तन निकालना जरूरी नहीं होता। कैंसर की अवस्था, ट्यूमर के आकार और उसकी जैविक प्रकृति के आधार पर सर्जरी के साथ आधुनिक दवाओं से भी उपचार किया जा सकता है। कई मामलों में सर्जरी से पहले दवाएं देकर ट्यूमर का आकार छोटा किया जाता है, जिससे स्तन बचाने वाली सर्जरी की संभावना बढ़ जाती है।
जोधपुर के एम्स की सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी ओपीडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें हर महीने बड़ी संख्या में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि होती है। वहीं कुछ पुरुष मरीजों में भी यह बीमारी सामने आती है।
हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन जांच जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में दिखाई देने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती। हालांकि स्तन में किसी गांठ, आकार में बदलाव या अन्य असामान्य परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच, इमेजिंग और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी के माध्यम से बीमारी की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाता है। अक्टूबर को आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में जागरूकता से जोड़ा जाता है। इस दौरान महिलाओं को स्तन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करने का संदेश दिया जाता है।
पहले दवा से ट्यूमर छोटा करने का प्रयास
विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ मरीजों में सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी जैसे उपचार दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य कई मामलों में ट्यूमर का आकार कम करना होता है। विशेष रूप से कैंसर के प्रकार और जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार तय किया जाता है। उदाहरण के लिए HER2-पॉजिटिव कैंसर में लक्षित दवाओं का उपयोग किया जा सकता है, जबकि हार्मोन रिसेप्टर-पॉजिटिव कैंसर में हार्मोन संबंधी उपचार उपयोगी हो सकता है।
शुरुआती स्टेज में स्तन बचाने वाली सर्जरी संभव
यदि कैंसर शुरुआती अवस्था में है और ट्यूमर स्तन के सीमित हिस्से में है, तो कुछ मामलों में पूरी तरह स्तन हटाने के बजाय ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी की जा सकती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार रेडियोथेरेपी दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपचार का फैसला प्रत्येक मरीज की रिपोर्ट, कैंसर के प्रकार और स्टेज के आधार पर किया जाता है। इसलिए केवल कैंसर का नाम सुनकर यह मान लेना सही नहीं है कि हर मरीज में स्तन निकालना ही एकमात्र विकल्प है।
पुरुषों में भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर
ब्रेस्ट कैंसर को आमतौर पर महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन पुरुषों में भी यह बीमारी हो सकती है। पुरुषों में यह अपेक्षाकृत दुर्लभ है, जिसके कारण कई बार पहचान में देरी हो जाती है। पुरुषों में निप्पल के नीचे कठोर गांठ, निप्पल का अंदर की ओर धंसना, खून या असामान्य तरल निकलना और त्वचा में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
महिलाओं को किन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए?
महिलाओं में स्तन में गांठ के अलावा आकार में बदलाव, त्वचा पर गड्ढे या खिंचाव, निप्पल के अंदर धंसने, असामान्य स्राव, लालिमा या स्तन के स्वरूप में अचानक बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि स्तन में कोई नया या असामान्य बदलाव महसूस होने पर घबराने के बजाय समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। जल्दी पहचान होने पर उपचार के विकल्प अधिक होते हैं और कई मरीजों में स्तन को बचाने वाली सर्जरी भी संभव हो सकती है।

