आपात पेयजल कार्यों के लिए कलेक्टरों को 75 लाख रुपए तक खर्च की छूट, गांव-गांव पेयजल व्यवस्था संभालेंगे 3200 कर्मचारी
जोधपुर। मानसून के कमजोर रहने के बाद राजस्थान के कई इलाकों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। संभावित जल संकट से निपटने के लिए सरकार ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। आपात पेयजल कार्यों के लिए जिला कलेक्टरों को 75 लाख रुपए तक खर्च करने की अनुमति दी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर बिना देरी के पानी की व्यवस्था की जा सके।
कम बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की चिंता बढ़ी है। सरकार ने ऐसे गांवों की पहचान और वहां वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जहां आने वाले समय में पानी की समस्या गंभीर हो सकती है।
650 वाहनों से पहुंचाया जाएगा पानी
पेयजल संबंधी शिकायतों और जरूरत वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए 650 पानी के टैंकर/वाहनों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा जरूरत के अनुसार 150 अतिरिक्त वाहनों को भी तैयार रखा गया है। इन वाहनों के माध्यम से संकटग्रस्त गांवों और बस्तियों तक नियमित रूप से पानी पहुंचाने की योजना है।
3200 कर्मचारी गांव-गांव संभालेंगे व्यवस्था
पेयजल संकट से निपटने के लिए करीब 3200 कर्मचारियों को गांव-गांव पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। ये कर्मचारी स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता, शिकायतों और आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखेंगे।
शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर
सरकार ने पेयजल से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए भी व्यवस्था मजबूत की है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पानी की कमी अथवा आपूर्ति में व्यवधान की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। आवश्यकता के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति कराई जाएगी।
एक्शन प्लान तैयार
पेयजल संकट से निपटने के लिए विभाग ने एक्शन प्लान तैयार किया है। इसमें कलेक्टरों की आपात खर्च सीमा, संभावित जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान, टैंकरों की व्यवस्था और अतिरिक्त संसाधनों की उपलब्धता शामिल है। सरकार का उद्देश्य मानसून के कमजोर रहने से उत्पन्न संभावित पेयजल संकट का पहले से आकलन कर गांवों और कस्बों में लोगों को समय पर पानी उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

