नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने लंबे अंतराल के बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इस निर्णय का सीधा असर बैंक से होम लोन, वाहन लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। ब्याज दर बढ़ने के साथ फ्लोटिंग रेट वाले लोन की EMI बढ़ने की संभावना है, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
होम लोन लेने वालों पर सबसे ज्यादा असर
रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंकों और वित्तीय संस्थानों की कर्ज की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर ग्राहकों की ब्याज दर और EMI पर दिखाई दे सकता है। खासतौर पर लंबे समय के होम लोन लेने वाले परिवारों के मासिक खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, 25 लाख रुपए के लोन पर ब्याज दर 7.25% से बढ़कर 7.50% होने पर EMI करीब 19,759 रुपए से बढ़कर 20,114 रुपए हो सकती है। यानी मासिक EMI में करीब 355 रुपए की वृद्धि होगी। इसी तरह 50 लाख रुपए के लोन पर EMI करीब 39,519 रुपए से बढ़कर 40,280 रुपए, 75 लाख रुपए के लोन पर 59,278 रुपए से बढ़कर 60,419 रुपए और 1 करोड़ रुपए के लोन पर 79,037 रुपए से बढ़कर 80,559 रुपए तक पहुंच सकती है। यानी 1 करोड़ रुपए के कर्ज पर मासिक बोझ करीब 1,522 रुपए बढ़ सकता है।
महिलाओं के घरेलू बजट पर भी असर
ब्याज दरों में वृद्धि का असर केवल EMI तक सीमित नहीं रहेगा। परिवारों को हर महीने कर्ज की किस्त के लिए अधिक राशि अलग रखनी पड़ सकती है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू सामान और अन्य जरूरी खर्चों के लिए उपलब्ध बजट प्रभावित होने की आशंका है।
आर्थिक गतिविधियों पर भी नजर
रेपो रेट में बदलाव का असर कर्ज की मांग, निवेश और बाजार की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। RBI का यह फैसला महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में बैंक ब्याज दरों में कितना बदलाव करते हैं, इससे ग्राहकों पर वास्तविक बोझ तय होगा।

