Explore

Search

Sunday, October 18, 2026, 6:46 am

Sunday, October 18, 2026, 6:46 am

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

88 प्रतिशत लोग महसूस करते हैं एंग्जायटी, केवल 11 प्रतिशत ही लेते हैं प्रोफेशनल मदद

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सर्वे में सामने आई चिंताजनक तस्वीर, मानसिक दबाव के बावजूद विशेषज्ञों से सलाह लेने में हिचकिचाते हैं लोग

जोधपुर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव और एंग्जायटी (घबराहट एवं चिंता) लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, आर्थिक चिंताएं और भविष्य की अनिश्चितता लोगों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रही हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आमजन की मानसिक स्थिति को समझने के लिए किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि 88.2 प्रतिशत लोग मानसिक दबाव महसूस करते हैं, लेकिन केवल 11.8 प्रतिशत लोग ही इसके लिए पेशेवर मदद लेते हैं।

सर्वे के निष्कर्ष मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सहायता लेने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

काम और पढ़ाई का दबाव भी चिंता की बड़ी वजह

सर्वे के अनुसार, पढ़ाई या नौकरी में अत्यधिक कठिनाइयों और डेडलाइन के दबाव का सामना करने वाले लोगों में 82.4 प्रतिशत ने मानसिक दबाव महसूस किया, जबकि 17.6 प्रतिशत ने ऐसा महसूस नहीं किया। यह आंकड़ा बताता है कि शैक्षणिक और व्यावसायिक जिम्मेदारियां लोगों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।

इसके अलावा, करियर या कार्यस्थल पर मिलने वाले तनाव को लेकर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। सर्वे में 41.2 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे करियर या कार्यस्थल के तनाव को लेकर सहज महसूस करते हैं, जबकि 58.8 प्रतिशत ने असहजता जताई।

काम के बाद भी मानसिक दबाव से राहत नहीं

सर्वे में काम से घर लौटने के बाद मानसिक स्थिति से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया। इसमें 76.5 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे घर लौटने के बाद भी मानसिक थकान या दबाव महसूस करते हैं। वहीं, 23.5 प्रतिशत लोगों ने ऐसा महसूस नहीं किया।
यह स्थिति बताती है कि काम का तनाव कई बार कार्यस्थल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्ति के निजी जीवन और पारिवारिक समय को भी प्रभावित कर सकता है।

परिवार से बातचीत और सहयोग जरूरी

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में परिवार और करीबी लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सर्वे में 64.7 प्रतिशत लोगों ने माना कि परिवार की किसी बीमारी या अन्य समस्या से उत्पन्न मानसिक दबाव को वे संभाल सकते हैं, जबकि 35.3 प्रतिशत ने ऐसा करने में कठिनाई जताई।

तनाव के समय अपनी भावनाओं को साझा करना, परिवार के सदस्यों से बातचीत करना और भरोसेमंद व्यक्ति का सहयोग लेना मानसिक राहत प्रदान कर सकता है। हालांकि, लंबे समय तक परेशानी बने रहने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना भी जरूरी है।

आर्थिक और पारिवारिक समस्याएं बढ़ाती हैं चिंता

आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता भी मानसिक दबाव को बढ़ा सकती हैं। सर्वे में 88.2 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे आर्थिक या अन्य समस्याओं के कारण मानसिक दबाव महसूस करते हैं, जबकि 11.8 प्रतिशत ने इससे इनकार किया। इसके अलावा, 41.2 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे तनाव और मानसिक स्थिति के बारे में अपने परिवार से खुलकर बात कर पाते हैं, जबकि 58.8 प्रतिशत लोगों ने ऐसा करने में असहजता जताई। यह आंकड़ा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर परिवारों में खुलकर संवाद करने की जरूरत को सामने लाता है। कई बार लोग अपनी परेशानियों को साझा करने से बचते हैं, जिससे उनका तनाव लंबे समय तक बना रह सकता है।

तनाव को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना उचित नहीं

मानसिक तनाव हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी हो सकता है, लेकिन लगातार चिंता, बेचैनी, नींद में परेशानी, एकाग्रता की कमी या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने जैसी स्थितियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सहायता मिलने से व्यक्ति अपनी परेशानियों को बेहतर ढंग से समझ सकता है और उनसे निपटने के प्रभावी तरीके सीख सकता है। जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक या प्रशिक्षित काउंसलर से संपर्क किया जा सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता समय की मांग

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करना है। मानसिक परेशानी महसूस करना कमजोरी का संकेत नहीं है। जिस तरह शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर की मदद ली जाती है, उसी तरह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी विशेषज्ञों की सलाह लेना सामान्य और उपयोगी कदम है।
सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि मानसिक दबाव महसूस करने वाले लोगों की संख्या अधिक है, लेकिन पेशेवर सहायता लेने वालों का प्रतिशत काफी कम है। ऐसे में परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और समाज को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां लोग बिना झिझक अपनी मानसिक परेशानियों पर बात कर सकें और समय पर उचित सहायता प्राप्त कर सकें।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor