केंद्र की संशोधित उड़ान योजना के तहत चयनित स्थलों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी, पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
जयपुर। राजस्थान में छोटे शहरों और क्षेत्रीय इलाकों को हवाई सेवाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। केंद्र सरकार की संशोधित क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ (UDAN) के तहत प्रदेश के छह हेलिपैड को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन आसान होने के साथ पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
छह संभावित स्थलों पर विचार
प्रदेश के छह संभावित स्थलों में डीडवाना-कुचामन जिले का डीडवाना, सीकर जिले का तारपुरा, आबूरोड का मानपुर, भीलवाड़ा का हमीरगढ़, बांसवाड़ा का तलवाड़ा और बाड़मेर का उत्तरलाई शामिल हैं। इन स्थानों पर मौजूद हेलिपैड को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
योजना के तहत चयनित स्थलों को लेकर संबंधित स्तर पर चर्चा हो चुकी है। अब कमेटी इन स्थलों को अंतिम रूप देगी। इसके बाद वित्त विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की मंजूरी लेकर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। एयरपोर्ट के रूप में विकास का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही हो सकेगा।
छोटे शहरों को मिलेगी हवाई सुविधा
उड़ान योजना का प्रमुख उद्देश्य छोटे शहरों और क्षेत्रीय इलाकों को हवाई संपर्क उपलब्ध कराना है। राजस्थान जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्य में कई ऐसे शहर और कस्बे हैं, जहां से प्रमुख शहरों तक पहुंचने में सड़क मार्ग से काफी समय लगता है।
यदि प्रस्तावित स्थलों पर एयरपोर्ट विकसित होते हैं और नियमित उड़ानें शुरू होती हैं, तो यात्रियों को आवागमन के अतिरिक्त विकल्प मिल सकेंगे। इससे जयपुर, जोधपुर, उदयपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों तक पहुंचने की सुविधा बेहतर होने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक उड़ान मार्ग और सेवाओं का निर्धारण बाद में किया जाएगा।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
राजस्थान देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यहां ऐतिहासिक दुर्ग, धार्मिक स्थल, प्राकृतिक पर्यटन केंद्र और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अनेक स्थान हैं। छोटे शहरों तक हवाई संपर्क विकसित होने से पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान हो सकता है।
विशेष रूप से उन क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां पर्यटन की संभावनाएं तो हैं, लेकिन परिवहन सुविधाएं सीमित हैं। हवाई सेवाएं शुरू होने से पर्यटक कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय सेवा क्षेत्र से जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिल सकता है।
कारोबार और रोजगार के नए अवसर
एयरपोर्ट का विकास केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हवाई संपर्क बेहतर होने से व्यापारियों, उद्यमियों और अन्य पेशेवरों के लिए यात्रा करना आसान हो सकता है।
इसके साथ ही परिवहन, आतिथ्य, पर्यटन और अन्य सहायक सेवाओं में रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है। स्थानीय उत्पादों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी व्यापक बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
अभी बाकी हैं मंजूरियां
प्रस्तावित स्थलों को एयरपोर्ट में बदलने की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। संबंधित कमेटी द्वारा स्थलों को अंतिम रूप देने, राज्य स्तर पर आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करने और केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। इसके बाद आधारभूत सुविधाओं के विकास, तकनीकी आवश्यकताओं और हवाई सेवाओं के संचालन से संबंधित निर्णय लिए जा सकेंगे।
कुल मिलाकर, उड़ान योजना के तहत राजस्थान के छह संभावित स्थलों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की पहल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और यहां नियमित हवाई सेवाएं शुरू होती हैं, तो छोटे शहरों के विकास, पर्यटन विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

