डिजिटल प्रमाणपत्र से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पर लगेगी रोक, मरीजों और डॉक्टरों के लिए प्रक्रिया होगी आसान
जयपुर। सरकारी और निजी अस्पतालों से जारी होने वाले मेडिकल सर्टिफिकेट की विश्वसनीयता बढ़ाने और फर्जी प्रमाणपत्रों पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में नई पहल की है। नेशनल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स रजिस्ट्री (NHPR) पोर्टल पर अब डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की तकनीकी सुविधा शुरू की गई है। इस व्यवस्था के तहत मेडिकल सर्टिफिकेट को मरीज की आभा आईडी (ABHA ID) और पंजीकृत मोबाइल नंबर से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक प्रमाणपत्र पर क्यूआर कोड अंकित होगा, जिससे उसकी प्रामाणिकता की जांच करना आसान होगा।
ओटीपी सत्यापन के बाद जारी होगा प्रमाणपत्र
नई व्यवस्था में डॉक्टर मरीज की आभा आईडी या उससे जुड़े पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। मरीज की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसके मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। ओटीपी सत्यापन के बाद मरीज का व्यक्तिगत विवरण फॉर्म में दर्ज होगा।
इसके बाद डॉक्टर बीमारी का कारण, छुट्टी की अवधि, प्रमाणपत्र की प्रभावी तिथि और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय टिप्पणियां दर्ज करेंगे। अंत में डॉक्टर अपने आधार से जुड़े डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से प्रमाणपत्र की पुष्टि करेंगे। ई-साइन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार हो जाएगा।
छह चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को छह चरणों में पूरा किया जाएगा।
- डॉक्टर अपने हेल्थकेयर प्रोफेशनल आईडी या पंजीकृत मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉगिन करेंगे।
- मेडिकल सर्टिफिकेट विकल्प में मरीज की आभा आईडी या मोबाइल नंबर दर्ज किया जाएगा।
- मरीज के मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से पहचान का सत्यापन होगा और व्यक्तिगत विवरण दर्ज किए जाएंगे।
- डॉक्टर बीमारी का कारण, छुट्टी के दिन, प्रभावी तिथि और अन्य जरूरी जानकारियां भरेंगे।
- डॉक्टर अपने आधार-आधारित ई-साइन के जरिए डिजिटल हस्ताक्षर की पुष्टि करेंगे।
- ई-साइन पूरा होते ही डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार हो जाएगा, जिस पर क्यूआर कोड भी अंकित रहेगा।
फर्जी प्रमाणपत्रों पर लगेगी रोक
मेडिकल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल नौकरी, स्कूल-कॉलेज में अवकाश, कार्यालय में उपस्थिति संबंधी मामलों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किया जाता है। ऐसे में प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। डिजिटल व्यवस्था से प्रमाणपत्र के सत्यापन में पारदर्शिता बढ़ने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्यूआर कोड के माध्यम से प्रमाणपत्र की सत्यता जांचने की सुविधा संबंधित संस्थानों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। इससे कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने और रिकॉर्ड के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलेगी।
डॉक्टरों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
पोर्टल पर पंजीकृत डॉक्टरों को नई प्रक्रिया का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। आभा आईडी के माध्यम से डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की व्यवस्था से पारदर्शिता आएगी। डॉक्टरों को इस प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे नई तकनीक का सही तरीके से उपयोग कर सकें।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
भारत में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ मरीजों के रिकॉर्ड, चिकित्सकीय दस्तावेजों और स्वास्थ्य संबंधी प्रमाणपत्रों को डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट की सुविधा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि, मरीजों और संस्थानों को प्रमाणपत्र जारी करने, डाउनलोड करने तथा सत्यापन की विस्तृत प्रक्रिया के लिए संबंधित आधिकारिक पोर्टल के निर्देशों का पालन करना चाहिए। नई व्यवस्था का व्यापक लाभ इसके सही क्रियान्वयन, डॉक्टरों के प्रशिक्षण और डिजिटल दस्तावेजों के सुरक्षित उपयोग पर निर्भर करेगा।

