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Sunday, August 23, 2026, 7:06 am

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Lifestyle

ग़ज़ल : एन डी निम्बावत सागर

आज उसकी यादों में मेरा ख़्याल आया है

रूठ बैठा उससे मैं, बड़ा मलाल आया है
मुझसे कैसे हो गया ये, सवाल आया है

उसका पलकें झुकाकर, मुस्कुराना बार-बार
निगाहों में निखर कर उसका, जमाल आया है

उसके जाने के बाद मैं तो, पल भर न भुला
यादों का झोंका बनके इक, दलाल आया है

देखो जी बादल गरज रहे, बिजली चमक रही
बैरी सावन का महिना भी, कमाल आया है

रह-रह कर हिचकी आना,लगता “सागर” शायद
आज उसकी यादों में मेरा,ख़्याल आया है

ग़ज़लकार
एडवोकेट एन डी निम्बावत “सागर”
जोधपुर(राज.)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor