आज उसकी यादों में मेरा ख़्याल आया है
रूठ बैठा उससे मैं, बड़ा मलाल आया है
मुझसे कैसे हो गया ये, सवाल आया है
उसका पलकें झुकाकर, मुस्कुराना बार-बार
निगाहों में निखर कर उसका, जमाल आया है
उसके जाने के बाद मैं तो, पल भर न भुला
यादों का झोंका बनके इक, दलाल आया है
देखो जी बादल गरज रहे, बिजली चमक रही
बैरी सावन का महिना भी, कमाल आया है
रह-रह कर हिचकी आना,लगता “सागर” शायद
आज उसकी यादों में मेरा,ख़्याल आया है
ग़ज़लकार
एडवोकेट एन डी निम्बावत “सागर”
जोधपुर(राज.)









