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Thursday, April 16, 2026, 1:04 pm

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मौन सेवा की सशक्त आवाज़ कौशल्या अग्रवाल, “सेवा की परी” के रूप में जिसे मिली है पहचान

दैनिक भास्कर की ओर से इंडिया प्राइड अवार्ड 2025 से सम्मानित समाजसेवी कौशल्या अग्रवाल से विशेष साक्षात्कार

कौशल्या अग्रवाल को समाज सेवा और मानव सेवा क्षेत्र में राइजिंग भास्कर डॉट कॉम का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया, उन्हें बुधवार को राइजिंग भास्कर कार्यालय में ब्रांड एंबेसडर का नियुक्ति पत्र सौंपा गया। 

दिलीप कुमार पुरोहित, राखी पुरोहित | जोधपुर

सेवा के लिए न तो मंच की आवश्यकता होती है और न ही प्रचार की। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो बिना शोर किए समाज के सबसे गहरे घावों पर मरहम रखते हैं। जो कैमरों से दूर, मौन साधना के साथ करुणा का दीप जलाते रहते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं — कौशल्या अग्रवाल, जिन्हें जोधपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देशभर में “सेवा की परी” के नाम से जाना जाता है।

कौशल्या अग्रवाल का जीवन इस बात का उदाहरण है कि जब संस्कार, शिक्षा और संवेदना एक साथ चलती हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव अवश्य आता है। अस्पतालों में अचानक पहुंचकर रोगियों को फल, कंबल और दवाइयों का संबल देना हो, नारी सशक्तिकरण के लिए बालिकाओं को जागरूक करना हो या फिर नाबालिग भिक्षावृत्ति के खिलाफ आवाज उठानी हो — कौशल्या अग्रवाल हर मोर्चे पर सक्रिय दिखाई देती हैं।

उनकी सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, जब उन्हें दैनिक भास्कर समूह द्वारा इंडिया प्राइड अवार्ड्स 2025 (सीजन-5) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिल्ली में प्रदान किया गया। यह इंटरव्यू उनकी उसी सेवा-यात्रा, सोच और समाज के प्रति समर्पण को शब्दों में पिरोने का प्रयास है।

संस्कारों से उपजी सेवा भावना

राइजिंग भास्कर : आपकी सेवा यात्रा की प्रेरणा कहां से मिली?

कौशल्या अग्रवाल: मेरी सेवा की जड़ें मेरे बचपन में हैं। मेरे पिता हरीकिशन अग्रवाल ने मुझे सिखाया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, घबराना नहीं है। सेवा करना जीवन का स्वाभाविक कर्तव्य होना चाहिए। उन्होंने कभी बड़े उपदेश नहीं दिए, बल्कि अपने आचरण से सिखाया। वही संस्कार मेरे भीतर आज भी जीवित हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

राइजिंग भास्कर : आपका शैक्षणिक और पेशेवर सफर कैसा रहा?

कौशल्या अग्रवाल: मैंने एमए और एमएड किया और सरकारी स्कूल में वरिष्ठ अध्यापिका के रूप में कार्य शुरू किया। शिक्षा मेरे लिए सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं थी, बल्कि जीवन निर्माण का माध्यम थी। मैंने बच्चों को किताबों के साथ-साथ संस्कार भी सिखाए। खासकर बालिकाओं में हिमोग्लोबिन की कमी, स्वास्थ्य और आत्मसम्मान को लेकर जागरूक किया। आगे चलकर मैं बावड़ी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल बनी। वहां भी मैंने शिक्षा में नवाचार किए। आज भी मेरे उस कार्यकाल को सहकर्मी और विद्यार्थी याद करते हैं, यही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।

बालिकाओं के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश

राइजिंग भास्कर : आपने बालिकाओं के लिए किन मुद्दों पर काम किया?

कौशल्या अग्रवाल: मैं हमेशा बेटियों को यही सिखाती रही कि दहेज का विरोध करें। अगर कहीं दहेज मांगा जाए तो वहां शादी के लिए हां न कहें। मैंने उन्हें स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया। शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाए।

मौन सेवा: अस्पतालों से आश्रमों तक

राइजिंग भास्कर : आपकी सेवा गतिविधियां बहुत व्यापक हैं, आप इसे कैसे देखती हैं?

कौशल्या अग्रवाल: मुझे शोर-शराबा पसंद नहीं। मैं चुपचाप सेवा करना पसंद करती हूं। अस्पतालों में जाकर रोगियों को फल, कंबल, दवाइयों के लिए सहयोग देना, वृद्धाश्रम और अनाथालयों में समय बिताना — यह सब मुझे आत्मिक शांति देता है।
मैं मानती हूं कि कोई भी व्यक्ति हमारे द्वार से निराश होकर नहीं जाना चाहिए।

सम्मानों की श्रृंखला, पर अहंकार नहीं

राइजिंग भास्कर : आपको कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले हैं, इस पर क्या कहना चाहेंगी?

कौशल्या अग्रवाल: सम्मान प्रेरणा देते हैं, अहंकार नहीं। मैंने लॉयंस क्लब में भी बतौर सदस्य सेवाएं दीं और सेवा की मशाल प्रज्वलित रखी। 12 से 17 सितंबर 2025 को थिंफू भूटान में क्रांतिधरा साहित्य अकादमी द्वारा भूटान भारत साहित्य महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय भूटान भारत साहित्य रत्न सम्मान 2025 दिया गया। इसी तरह ग्लोबल विजनरी अवॉर्ड भी मिल चुका है। बेस्ट सोशल वर्कर, मानवता सेवारत्न, महिला प्रेरणा पुरस्कार भी उन्हें मिल चुके हैं। इसी तरह जोधपुर अग्रवाल वुमन्स क्लब द्वारा नारी प्रतिभा सम्मान भी मिल चुका है। श्री सैनिक क्षत्रीय पूंजला नाडी पर्यावरण विकास संस्थान की ओर से राज्य स्तरीय उत्कृष्ट समाज सेविका सम्मान भी मिल चुका है। खांडा फलसा गणगौर मेला समिति के कार्यक्रमों में भी समय-समय पर सहयोग किया। दलित साहित्य अकादमी की ओर से सावित्री बाई फुले सम्मान भी मिल चुका है।

रेडियो से समाज तक विचारों की गूंज

राइजिंग भास्कर : आपके विचार ऑल इंडिया रेडियो से भी प्रसारित होते हैं?

कौशल्या अग्रवाल: हां, मेरे विचार और संवाद अक्सर ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित होते हैं। यह माध्यम समाज तक सकारात्मक संदेश पहुंचाने का सशक्त जरिया है। मैं महिला अधिकार, नारी सशक्तिकरण और सामाजिक जिम्मेदारियों पर खुलकर बात रखती हूं।

नाबालिग भिक्षावृत्ति पर सख्त सोच

राइजिंग भास्कर :  ट्रैफिक लाइट्स पर भीख मांगते बच्चों को लेकर आपकी चिंता क्या है?

कौशल्या अग्रवाल: जब मैं नाबालिग बच्चों को भीख मांगते देखती हूं, तो मेरे भीतर का शिक्षक जाग जाता है। ये बच्चे भीख के नहीं, शिक्षा के हकदार हैं। मैंने प्रशासन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया है कि ऐसे बच्चों का पुनर्वास कर उन्हें बालगृह और स्कूलों से जोड़ा जाए। भिक्षावृत्ति बच्चों का भविष्य छीन लेती है।

पुलिस, संस्थाएं और सामूहिक सहयोग

राइजिंग भास्कर : आपने पुलिस थानों और संस्थाओं में भी सहयोग किया है?

कौशल्या अग्रवाल: हां, मैंने पुलिस थानों में पंखे, कूलर, फ्रिज, ठंडे पानी की मशीन जैसी सुविधाएं भेंट की हैं। समाज तभी मजबूत बनता है, जब हर वर्ग कंधे से कंधा मिलाकर चले। मैंने ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को चौराहों पर गर्मी में परेशान होते देखा तो उनकी सेवा का सम्मान करने के लिए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया।

सेवा का दर्शन

राइजिंग भास्कर : आपकी नजर में सेवा का वास्तविक अर्थ क्या है?

कौशल्या अग्रवाल: सेवा धर्म देखकर नहीं की जाती। सेवा की कोई जाति नहीं होती। सेवा हमारे संस्कार हैं। जब हम जरूरतमंद में भगवान का अक्स देखते हैं, तभी सच्ची सेवा संभव है। सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं।

नीयत साफ हो तो बिना मंच भी समाज में परिवर्तन संभव 

कौशल्या अग्रवाल का जीवन यह सिखाता है कि यदि नीयत साफ हो और मन करुणा से भरा हो, तो बिना मंच और प्रचार के भी समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। वे आज भी मौन रहकर सेवा कर रही हैं — और शायद यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।

 

 

 

 

 

 

 

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor