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Thursday, April 16, 2026, 1:12 pm

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क्या आप जहर परोस रहे हैं? मिलावट की पहचान कैसे करें…जानिए आसान तरीके

लेखक शिव सिंह

​हमारी रसोई में मौजूद छोटी-छोटी चीजें हमारे परिवार की मुस्कान तय करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस दूध को आप ‘अमृत’ समझकर बच्चों को पिला रहे हैं, या जिस हल्दी को ‘औषधि’ मानकर चोट पर लगा रहे हैं, वह शुद्ध है भी या नहीं

1 दूध में मिलावट (वॉशिंग पाउडर या यूरिया) : ​दूध मातृत्व का प्रतीक है, लेकिन इसमें यूरिया या डिटर्जेंट की मिलावट इसे धीमा जहर बना देती है।

* कैसे जाँचें: एक शीशे के बर्तन में थोड़ा दूध लें और उसे जोर से हिलाएं। अगर दूध में झाग बहुत देर तक बना रहता है या झाग के बुलबुले साबुन की तरह बड़े और रंगीन दिखते हैं, तो समझ लीजिए इसमें डिटर्जेंट मिला है।

* ​शुद्ध दूध की बूंद को चिकनी ढलान वाली सतह पर छोड़ें। शुद्ध दूध धीरे-धीरे सफेद लकीर छोड़ते हुए नीचे गिरेगा, जबकि मिलावटी दूध बिना कोई निशान छोड़े पानी की तरह बह जाएगा।

​2. हल्दी में मेटानिल येलो (Metanil Yellow)

​हल्दी हमारी संस्कृति और स्वास्थ्य का आधार है। इसमें मिलाया जाने वाला ‘मेटानिल येलो’ कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन सकता है।

* ​कैसे जाँचें: एक गिलास पानी में आधा चम्मच हल्दी डालें। इसे हिलाएं नहीं। शुद्ध हल्दी धीरे-धीरे नीचे बैठ जाएगी और पानी हल्का पीला रहेगा। अगर हल्दी तुरंत गहरा रंग छोड़ दे और पानी पूरी तरह धुंधला गहरा पीला हो जाए, तो वह मिलावटी है।

​3. शहद में गुड़ या चीनी की चाशनी

​शहद कुदरत का अनमोल तोहफा है, लेकिन अक्सर इसे चीनी की चाशनी से बदल दिया जाता है।

* ​कैसे जाँचें: एक रुई की बाती लें और उसे शहद में डुबोकर जलाएं। अगर शहद शुद्ध होगा, तो वह दीये की तरह जलेगा। अगर उसमें मिलावट होगी, तो वह चटकने की आवाज करेगा क्योंकि चीनी की चाशनी में नमी होती है।

​4. लाल मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा

​मिर्च खाने का स्वाद बढ़ाती है, लेकिन मिलावटी मिर्च हमारी आंतों को छलनी कर सकती है।

* ​कैसे जाँचें: एक गिलास पानी में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालें। अगर पाउडर नीचे बैठ जाता है और पानी की सतह पर थोड़ा किरकिरापन महसूस होता है, तो वह ईंट का चूरा हो सकता है। शुद्ध मिर्च पानी की सतह पर तैरती रहती है।

5, शुद्ध देसी घी या जानवरों की चर्बी/वनस्पति?

​घी को हम शक्ति का स्रोत मानते हैं, लेकिन इसमें अक्सर उबले हुए आलू, शकरकंद या सबसे खतरनाक ‘पाम ऑयल’ और ‘जानवरों की चर्बी’ मिला दी जाती है।

* ​हाइड्रोक्लोरिक एसिड टेस्ट: एक चम्मच घी में थोड़ा सा चीनी का बुरादा और 5ml गाढ़ा हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCL) मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाता है, तो समझ लीजिए इसमें ‘वनस्पति घी’ या घटिया तेल मिला हुआ है।

* ​आयोडीन टेस्ट (आलू की मिलावट): पिघले हुए घी में दो बूंद आयोडीन का घोल (Iodine Solution) डालें। अगर घी का रंग नीला पड़ जाए, तो इसका मतलब है कि इसमें आलू या स्टार्च मिलाया गया है।

* ​हथेली वाला तरीका: थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर रखें। अगर वह शरीर की गर्मी से तुरंत पिघल जाए, तो वह शुद्ध है। मिलावटी घी को पिघलने में समय लगता है और वह दानेदार जमा रहता है।

​6 . सरसों का तेल या आर्सेमोन तेल?

​सरसों के तेल में ‘आर्सेमोन’ (सत्यानाशी के बीज) का तेल मिलाया जाता है, जो शरीर में सूजन (Dropsy) और दिल की बीमारियों का कारण बनता है।

* ​नाइट्रिक एसिड टेस्ट: एक टेस्ट ट्यूब या कांच की छोटी बोतल में 5ml तेल लें और उसमें थोड़ा सा नाइट्रिक एसिड (Nitric Acid) मिलाएं। इसे धीरे से हिलाएं। अगर तेल का रंग लाल या नारंगी हो जाता है, तो उसमें आर्सेमोन तेल की मिलावट है। शुद्ध सरसों का तेल अपना रंग नहीं बदलेगा।

* ​फ्रिज टेस्ट: सरसों के तेल को 2-3 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। शुद्ध सरसों का तेल जमता नहीं है, वह तरल ही रहेगा। यदि उसमें नीचे सफेद परत जमने लगे, तो समझ लें कि उसमें पाम ऑयल या अन्य मिलावट है।

एक माँ और गृहिणी का संकल्प
​याद रखिए, आप सिर्फ खाना नहीं बनातीं, आप अपने परिवार की रक्षा करती हैं। बाजार की चमक-धमक से ऊपर उठकर थोड़ी सी सावधानी बरतें। आपकी थोड़ी सी मेहनत आपके बच्चों को अस्पताल की बेड से दूर रख सकती है।

​”शुद्ध आहार, स्वस्थ परिवार।”

स्वस्थ रहे सुरक्षित रहे आयुर्वेद अपनाये।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor