आलेख : शिव सिंह भाटी
थार के रेगिस्तान की भीषण गर्मी और सूखे के बीच फलने-फूलने वाला खेजड़ी का वृक्ष सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थल की जीवनरेखा है। इसी पेड़ पर लगने वाली फलियों को ‘सांगरी’ कहा जाता है। जिसे मारवाड़ में ‘हरा सोना’ भी कहते हैं, वह आयुर्वेद की दृष्टि से किसी औषधि से कम नहीं है।
सांगरी के आयुर्वेदिक गुण और पोषक तत्व
सांगरी केवल एक सब्जी नहीं है, बल्कि पोषक तत्वों का पावरहाउस है। आयुर्वेद के अनुसार, इसमें वात और पित्त को शांत करने के गुण होते हैं।
* प्रोटीन का भंडार: शाकाहारियों के लिए सांगरी प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है।
* खनिज तत्व (Minerals): इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और जिंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
* फाइबर (Fiber): उच्च फाइबर होने के कारण यह पाचन तंत्र के लिए रामबाण है।
* लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स: यह रक्त शर्करा (Sugar) को नियंत्रित करने में सहायक है।
सांगरी के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
1. पाचन तंत्र के लिए वरदान
सांगरी में मौजूद उच्च फाइबर कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करता है। यह पेट को साफ रखने और मेटाबॉलिज्म को सुचारू बनाने में मदद करती है।
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Booster)
इसमें मौजूद जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों और संक्रमण से लड़ने की शक्ति मिलती है।
3. कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य
सांगरी के नियमित सेवन से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
4. हड्डियों की मजबूती
कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर होने के कारण, यह हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए एक प्राकृतिक सप्लीमेंट की तरह काम करती है।
सांगरी का सांस्कृतिक और औषधीय महत्व
”सांगरी रेगिस्तान का वह उपहार है जो शून्य डिग्री से लेकर 50 डिग्री तक के तापमान में भी अपनी पौष्टिकता नहीं खोता।”
आयुर्वेद में खेजड़ी के पेड़ के हर हिस्से (जड़, छाल, पत्ती और फल) का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। सांगरी का सेवन शरीर को शीतलता प्रदान करता है और लू (Loo) के प्रभाव से बचाता है।








