संभावना संस्था के आयोजन में 80 से अधिक साहित्यकारों, शिक्षाविदों और गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
महिलाओं की साहित्यिक संस्था ‘संभावना’ के तत्वावधान में रविवार को नेहरू पार्क स्थित डॉ. मदन सावित्री डागा साहित्य भवन में कवयित्री दीपा खेतावत ‘दीप’ के प्रथम काव्य संग्रह ‘सुधियों की निधि’ का गरिमामय लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शहर के 80 से अधिक साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। साहित्यिक गरिमा, आत्मीय वातावरण और रचनात्मक संवाद से सजे इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने कविता को समाज का दर्पण बताते हुए दीपा खेतावत ‘दीप’ के प्रथम काव्य संग्रह की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सरोज कौशल ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रगति गुप्ता थीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में नीलम मूंदड़ा तथा समाजसेवी सुरेश राठी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्था की सचिव डॉ. अंजना चौधरी ने प्रभावशाली शैली में किया।
दीपा खेतावत ‘दीप’ ने साझा किया सृजन का सफर
अपने उद्बोधन में कवयित्री दीपा खेतावत ‘दीप’ ने कहा कि ‘सुधियों की निधि’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के विविध अनुभवों, रिश्तों, संवेदनाओं और स्मृतियों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि हर कविता उनके मन की अनुभूतियों से जन्मी है और पाठकों का स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने आयोजन के लिए संभावना संस्था तथा उपस्थित सभी साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रो. सरोज कौशल : साहित्य समाज को मानवीय बनाता है
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. सरोज कौशल ने कहा कि साहित्य मनुष्य के भीतर संवेदनशीलता, करुणा और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। उन्होंने कहा कि एक रचनाकार अपने अनुभवों को शब्द देकर समाज की चेतना को समृद्ध करता है। उन्होंने दीपा खेतावत ‘दीप’ के प्रथम काव्य संग्रह को उनकी साहित्यिक यात्रा का सशक्त प्रारंभ बताते हुए निरंतर सृजनशील बने रहने की शुभकामनाएं दीं।
प्रगति गुप्ता : कविता आत्मा की सबसे सहज अभिव्यक्ति
मुख्य अतिथि प्रगति गुप्ता ने कहा कि कविता हृदय की गहराइयों से निकली वह अभिव्यक्ति है, जो सीधे पाठक के मन तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि ‘सुधियों की निधि’ में जीवन की स्मृतियां, रिश्तों की ऊष्मा और मानवीय भावनाओं का सहज चित्रण दिखाई देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह काव्य संग्रह साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा और नई पीढ़ी को भी रचनात्मक लेखन के लिए प्रेरित करेगा।
नीलम मूंदड़ा : साहित्य समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम
विशिष्ट अतिथि नीलम मूंदड़ा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना जगाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति समाज को नई दिशा देती है और ऐसे आयोजन नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने दीपा खेतावत ‘दीप’ की संवेदनशील लेखनी की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की।
सुरेश राठी : रचनाकार समाज की सांस्कृतिक धरोहर होते हैं
विशिष्ट अतिथि सुरेश राठी ने कहा कि साहित्यकार समाज की सांस्कृतिक विरासत को शब्दों के माध्यम से संरक्षित रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम काव्य संग्रह का प्रकाशन किसी भी रचनाकार के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है और यह आगे की साहित्यिक यात्रा का मजबूत आधार बनता है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजनों से समाज में पढ़ने-लिखने की संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती है।
डॉ. अंजना चौधरी ने किया प्रभावी संचालन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजना चौधरी ने प्रभावशाली एवं आत्मीय शैली में किया। उन्होंने संभावना संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्था निरंतर महिला साहित्यकारों को मंच उपलब्ध कराने और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
लोकार्पण के साथ हुआ साहित्यिक संवाद
पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया। इसके बाद उपस्थित साहित्यकारों ने पुस्तक के शीर्षक, विषय-वस्तु और रचनात्मकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान साहित्य, कविता, सामाजिक सरोकार और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर सार्थक चर्चा हुई, जिसने आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया।
80 से अधिक साहित्यकारों की रही उपस्थिति
समारोह में शहर के 80 से अधिक साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी, साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने दीपा खेतावत ‘दीप’ के प्रथम काव्य संग्रह के प्रकाशन को एक महत्वपूर्ण साहित्यिक उपलब्धि बताते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं उपस्थित साहित्यकारों ने दीपा खेतावत ‘दीप’ को पुष्पगुच्छ, स्मृति-चिह्न एवं उपहार भेंट कर बधाई दी। इसके पश्चात सभी के लिए जलपान की व्यवस्था की गई, जहां साहित्यकारों के बीच आत्मीय संवाद और साहित्यिक चर्चा का सिलसिला देर तक चलता रहा। समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

