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Tuesday, July 28, 2026, 2:43 am

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आईएएस बनाम आईपीएस… वरिष्ठ आईपीएस को भी आईएएस सूचना देने में कैसे नाच नचवाते हैं जानिए यह रौचक मामला : क्या आईएएस धीरज सिंह और अन्य अधिकारी होंगे दंडित?

2009 बैच के राजस्थान कैडर के चर्चित आईपीएस पंकज चौधरी ने आईएएस अफसरों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया…ताजा मामले पर विचार किया जाए तो यह बात उभरकर सामने आती है कि आईएएस और आईपीएस का टकराव लोकहित में नहीं हैं। लेकिन आईएएस लॉबी किस तरह हावी होती जा रही है और किस तरह सरकार आईएएस लॉबी का यूज करती है, उसका उदाहरण हमारे सामने है। सरकार आईपीएस अफसरों के मनमाने तबादले करती है और कोई अफसर आवाज उठाता है तो उसे किस तरह प्रताड़ित होना पड़ता है…यह वह आईपीएस अधिकारी ही जानता है। लेकिन ताजा मामले की तह में जाए तो आईएएस अफसरों का रवैया भी गैर जिम्मेदाराना प्रतीत होता है। प्रस्तुत है राइजिंग भास्कर की मुक्कमल रिपोर्ट।

जयपुर से दिलीप कुमार पुरोहित की विशेष रिपोर्ट

इन दिनों वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी फिर चर्चा में हैं। मामला आईपीएस लिस्ट प.5 (2) / कार्मिक/क-1/ 2025 दिनांक 19 जुलाई 2025 सिविल सेवा बोर्ड द्वारा संधारित होने से संबंधित है। दरअसल उपरोक्त मामले में वरिष्ठ आईपीएस पंकज चौधरी ने दिनांक 25 जुलाई 2025 द्वारा कार्मिक (क-1) विभाग द्वारा जारी आईपीएस लिस्ट प.5 (2)/ कार्मिक/ क-1/ 2025 दिनांक 19 जुलाई 2025 सिविल सेवा बोर्ड द्वारा संधारित हुई या नहीं एवं यदि संधारित हुई है तो इससे संबंधित बोर्ड सदस्यों के पदनाम एवं संधारण तिथि सहित कुल 04 बिंदुओं से संबंधित सूचना चाही गई थी।

निर्धारित समय पर सूचना प्राप्त नहीं होने पर तथा प्रथम अपील विनिश्चयविहीन रहने के कारण अंतत: आयोग के समक्ष द्वितीय अपील दायर की गई। अपीलार्थी वरिष्ठ आईपीएस पकज चौधरी ने प्रत्यर्थी राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं संयुक्त शासन सचिव, कार्मिक (क-1) विभाग शासन सचिवालय जयपुर को पक्षकार बनाया गया।

आयोग के नोटिस के क्रम में प्रत्यर्थी ने अपीलोत्तर दिनांक 21 नवंबर 2025 आयोग को प्रस्तुत किया, जिसकी प्रति अपीलार्थी को भी पृष्ठांकित की गई। अपीलोत्तर द्वारा यह अवगत करवाया गया कि अपीलार्थी को चाही गई सूचना/ विनिश्चय के लिए कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार पत्र दिनांक 1 अगस्त 2025 से सूचित कर दिया गया है। प्रति भी संलग्न की गई। इसके अनुसार बिंदु संख्या 01 व 04 में वांछित सूचना अस्पष्ट, प्रश्नात्मक, सृजनात्मक एवं व्याख्यात्मक होने से अदेय है। सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष अपीलार्थी उपस्थित हुआ तथा उसने कथन किया कि उसका आवेदन विशिष्टि पूर्ण व स्पष्ट है। इसमें कोई व्याख्या व सृजन नहीं है। यह सूचनाएं एक से अधिक व्यक्ति से संबंधित है और राज्य आदेश की श्रेणी में है एवं गोपनीय नहीं है इसलिए सूचना देय है। प्रत्यर्थी के प्रतिनिधि ने अपीलोत्तर में वर्णित तथ्यों को दोहराते हुए अपील निरस्त करने का निवेदन किया।

इस पर तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर ने कहा कि मैंने पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन किया तथा उभय पक्षों द्वारा प्रस्तुत कथनों पर मनन किया। यह स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी ने अपीलार्थी को पत्र दिनांक 1 अगस्त 2025 से चाही गई सूचना/ विनिश्चय से अवगत करवा दिया है। पत्र दिनांक 1 अगस्त 2025 प्रति पत्रावली में भी संलग्न की गई है। अपीलार्थी द्वारा वांछित सूचनाएं सिविल सेवा बोर्ड द्वारा संधारित आईपीएस लिस्ट से संबंधित है जिसमें कोई सृजन अथवा व्याख्या की आवश्यकता नहीं है। अत: प्रत्यर्थी का विनिश्चय अस्वीकार किया जाता है। लाठर ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की भावना एवं उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए प्रत्यर्थी को निर्देश दिए जाते हैं कि आदेश प्राप्ति के 21 दिवस के अपीलार्थी को नियमानुसार बिंदुवार सूचना अधिप्रमाणित एवं हस्ताक्षरित कर उपलब्ध करवाएं। इस आलोक में अपील निस्तारित करना समीचीन है। अत: अपील उपरोक्तानुसार निस्तारित की जाती है। लाठर ने आदेश की प्रति दोनों पक्षों को प्रेषित कर दी और निर्णय 25 नवंबर 2025 को पारित किया।

21 दिन में सूचना देनी थी 4 महीनों से भी अधिक समय में भी सूचना नहीं दी, आईएएस नचाते रहे आईपीएस पंकज चौधरी को

तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त एमएल लाठर ने 25 नवंबर 2025 को सूचना उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किए थे और सूचना 21 दिन में उपलब्ध करवाना था, मगर आईएएस किस तरह आईपीएस को भी नचा सकते हैं इसका उदाहरण सामने हैं। वरिष्ठ आईपीएस पंकज चौधरी को चार महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। इस पर वरिष्ठ आईपीएस पंकज चौधरी ने इसे गंभीरता से लेते हुए चैलेंज किया और राज्य सूचना आयोग में अप्रैल 2026 में परिवाद पेश कर दिया।

इस परिवाद पर निर्णय करते हुए सूचना आयोग ने 17.07.2026 को नोटिस जारी कर दिया।आईपीएस पंकज चौधरी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार कार्मिक विभाग को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 ( १ ) का उल्लंघन पाया है। राज्य सूचना आयोग ने कार्मिक विभाग संयुक्त शासन सचिव कार्मिक धीरज सिंह, आईएएस और अन्य अधिकारियों द्वारा जानबूझकर सूचना प्रदान नहीं किए जाने पर उपधारा 20 (1) के तहत दण्ड आरोपित करने की अनुशंसा करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।

गौरतलब है कि राज्य सूचना आयोग के द्वारा पारित आदेश दिनाक 25.11.2025 की पालना नहीं करने पर कार्मिक विभाग कटघरे में है। कार्मिक सचिव अर्चना सिंह द्वारा प्रथम अपील में भी सूचना नहीं दिए जाने पर पंकज चौधरी,आईपीएस ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर ने सुनवाई करते हुए कार्मिक विभाग की उदासीनता व लापरवाही पाई और आदेश प्राप्त होने के 21 दिन में सूचना देने का आदेश दिया। कार्मिक विभाग ने सूचना देने की बजाय वास्तविक सूचना ना देते हुए प्रकरण को उलझाने का प्रयास किया। परिवादी पंकज चौधरी ने इसे गंभीरता से लेते हुए चैलेंज किया और राज्य सूचना आयोग में अप्रैल 2026 में परिवाद पेश कर दिया। इस परिवाद पर निर्णय करते हुए सूचना आयोग ने 17.07.2026 को नोटिस जारी कर दिया।जिसमें कार्मिक विभाग को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 ( १ ) का उल्लंघन पाया है। स्पष्टीकरण मांगते हुए नोटिस जारी कर कहा है क्यों ना कार्मिक विभाग पर दंड आरोपित किया जाय। प्रकरण में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सुनवाई में शामिल होने का भी आदेश किया है।पंकज चौधरी ने सूचना आयोग की पेशी में व्यक्तिगत उपस्थित होकर सभी बिंदुओं पर जिरह किया था जिसपर राज्य सूचना आयोग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। यह दिलचस्प घटनाक्रम था जब पंकज चौधरी ने ख़ुद पैरवी की थी। प्रक्रम राज्यहित व जनसामान्य से जुड़ा हुआ है इसलिए राज्य सूचना आयोग द्वारा जारी नोटिस व आदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के तहत तबादलों से संबंधित है। राज्य सरकार की मनमानी व पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सूचना आयोग द्वारा जारी नोटिस व निर्णय एक उम्मीद पैदा करती है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor