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Sunday, August 9, 2026, 10:35 am

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ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4 : ढीठ चंद जी का इंटरव्यू

ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4 : ढीठ चंद जी का इंटरव्यू के बी व्यास के साथ

आइडिया एंड क्यूरेटर : केबी व्यास, दुबई

वर्ड्स ऑफ इंटरव्यू : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

प्रजेंट : दिलीप कुमार पुरोहित. राइजिंग भास्कर

… ढम… ढम… टण… टण… “ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4”… जहाँ सवाल भी हँसते हैं और जवाब तो कान पकड़कर बैठ जाते हैं…

(स्टूडियो में तालियों की गड़गड़ाहट…)

के बी व्यास:

राम-राम सा… खम्मा घणी… नमस्कार!

आज हमारे स्टूडियो में ऐसे महानुभाव पधार रहे हैं जिनके चेहरे पर शर्म आख़िरी बार तब देखी गई थी जब वे पाँच साल के थे और तब से वह लापता है।

लोग कहते हैं—“गलती इंसान से होती है।”

ये कहते हैं—“तो क्या हुआ?”

लोग कहते हैं—“कुछ तो शर्म करो।”

ये कहते हैं—“स्टॉक में नहीं है।”

जिनकी चमड़ी पर आलोचना ऐसे फिसल जाती है जैसे तवे पर पानी की बूंद…

ज़ोरदार तालियाँ हो जाएँ…

स्वागत है… ढीठ चंद जी!

ढीठ चंद जी:

धन्यवाद सा।

वैसे इतनी तालियाँ मत बजाइए… लोग समझेंगे मैं कोई ईमानदार आदमी हूँ।

के बी व्यास:

सुना है बचपन से ही ढीठ थे?

ढीठ चंद जी:

अरे बचपन से क्या…जन्म से ही

जन्म के समय डॉक्टर ने कहा—“रोओ।”

मैंने कहा—“पहले फीस कम करो।”

डॉक्टर ही रोने लग गया।

 के बी व्यास:

स्कूल में कैसे थे?

ढीठ चंद जी:

होमवर्क कभी नहीं किया।

मास्टर जी पूछते—

“कॉपी कहाँ है?”

मैं कहता—

“सर, शिक्षा मन में होनी चाहिए, कॉपी में नहीं।”

एक दिन उन्होंने कहा—

“बाहर निकल जाओ।”

मैं बोला—

“क्यों सर? बाहर तो पहले से ही बहुत बच्चे हैं।”

के बी व्यास: मतलब आप हर बात का टेढ़ा ही जवाब देते हैं ?

ढीठ चंद जी:
टेढ़े हुए बिना काम नहीं चलता व्यास जी । टेढ़ी अंगुली से घी निकलता है, मोटरसाइकिल पे टेढ़ा स्टैंड ही जँचता है ।

के बी व्यास : स्कूल में मार नहीं पड़ती थी

ढीठ चंद जी:

बहुत पड़ती थी।

लेकिन मैं हर बार कहता—

“सर, आपकी ऊर्जा देखकर अच्छा लगा।”

धीरे-धीरे मास्टर जी ही थक गए।

 के बी व्यास:

सुना है उधार भी लेते हैं?

ढीठ चंद जी:

उधार नहीं लेता…

लोग मुझे भविष्य में भुगतान का अवसर देते हैं।

एक दुकानदार बोला—

“तीन साल से पैसे नहीं दिए।”

मैं बोला—

“देखिए, हमारा रिश्ता कितना लंबा चल रहा है।”

 के बी व्यास:

कभी किसी ने पैसे माँग लिए?

ढीठ चंद जी:

माँगे थे।

मैंने कहा—

“इतनी जल्दी क्या है?

पैसा कहीं भागा जा रहा है क्या?”

वो बोला—

“मेरा धैर्य भाग रहा है।”

 के बी व्यास:

घर में आपकी क्या इज़्ज़त है?

ढीठ चंद जी:

पूरा सम्मान है।

पत्नी रोज़ कहती हैं—

“तुम सुधरोगे नहीं।”

मैं कहता—

“देखो, तुम्हें मुझ पर पूरा विश्वास है।”

के बी व्यास : आपके रिश्तेदार कौन कौन हैं ?

ढीठ चंद जी : देखो साहब मेरे तीन बहने हैं नागाई, कुचमादी, ओछाई। फच्चर हमारी जाति है और स्यापा हमारा गोत्र।
( फिर जेब से एक फ़ोटो निकाला जिसमें एक आदमी ने नाक के आगे हाथ रखा हुआ था)
और ये हमारे नकटे गुरु जी हैं, इनकी नाक कटी हुई है।इनका कहना है कि ढिठाई कलयुग का एक गुण है। इन्होंने ढीठ पुराण की रचना की है जिसमें लिखा है – मानो तो अपमान और नहीं मानो तो सुपरगिरी।

के बी व्यास : और आपको तो सुपरगिरी का शौक है ।

ढीठ चंद जी : हाँ, मैं ही सबसे सुपर हूँ मुझसे ज़्यादा सुपर कोई नहीं और अगर कोई है तो मैं उससे डबल सुपर ।

के बी व्यास:

वाह क्या बात कही है, अच्छा जोधपुर वाले क्या कहते हैं?

ढीठ चंद जी:

कहते हैं—

“ढीठ चंद जी, आप कभी शर्मिंदा नहीं होते?”

मैं कहता—

“इतनी गर्मी में शर्म भी पसीना बनकर उड़ जाती है।”

के बी व्यास:

अगर कोई आपकी बुराई करे?

ढीठ चंद जी:

मैं धन्यवाद देता हूँ।

क्योंकि मुफ्त का प्रचार कौन छोड़ता है?

जिस दिन लोग मेरी बुराई नहीं करेंगे…

समझ जाऊँगा मैं महत्वहीन हो गया।

के बी व्यास:

कभी गलती मानते हैं?

ढीठ चंद जी:

ज़रूर मानता हूँ।

मैं साफ़ चट्ट कह देता हूँ—

“हाँ, गलती हुई…

लेकिन परिस्थितियाँ भी बराबर की भागीदार थीं।”

के बी व्यास:

कभी माफ़ी माँगी?

ढीठ चंद जी:

एक बार माँगी थी।

सामने वाले ने कहा—

“अब तो आदत बदल लो।”

मैंने कहा—

“माफ़ी माँगी है…

चरित्र प्रमाणपत्र नहीं दिया।”

के बी व्यास:

ऑफिस में कैसे रहते हैं?

ढीठ चंद जी:

देर से पहुँचता हूँ।

बॉस पूछते—

“फिर लेट?”

मैं कहता—

“सर, मैं देर से नहीं आया…

आप जल्दी आ गए।”

के बी व्यास:

पड़ोसियों से संबंध कैसे हैं?

ढीठ चंद जी:

बहुत मधुर।

उनकी चीनी, चायपत्ती, अख़बार, सीढ़ी, हथौड़ा…

सबको अपना ही समझता हूँ।

एक पड़ोसी बोला—

“कुछ वापस भी किया करो।”

मैंने कहा—

“रिश्तों में हिसाब नहीं रखा जाता।”

के बी व्यास:

मोबाइल पर भी ऐसे ही हैं?

ढीठ चंद जी:

जी।

दस मिस्ड कॉल देखकर भी मैसेज भेजता हूँ— “कुछ काम था?”

अगर सामने वाला लिख दे— “हाँ।”

तो मैं दो दिन बाद जवाब देता हूँ—

“अब बताइए।”

के बी व्यास:

चुनाव लड़ने का विचार है?

ढीठ चंद जी:

लोग कह रहे हैं तो मैंने कहा— “मेरी सबसे बड़ी योग्यता यही है कि मुझे किसी बात की शर्म नहीं।”

सब बोले— “ढीठ चंद जी आपकी संभावना राजनीति में उज्ज्वल है।”

के बी व्यास:

जीवन का सिद्धांत?

ढीठ चंद जी:

तीन नियम—

पहला…

कभी झेंपो मत।

दूसरा…

अगर झेंप जाओ तो दिखाओ मत।

तीसरा…

अगर लोग पकड़ लें…

तो मुस्कुरा दो।

आधे लोग भ्रमित हो जाएँगे, बाकी आधे हँसने लगेंगे।

के बी व्यास:

श्रोताओं के लिए कोई संदेश?

ढीठ चंद जी:

ढीठ मत बनिए…

लेकिन इतना भी संकोची मत बनिए कि लोग आपका हक़ ही खा जाएँ।

आत्मविश्वास अच्छा है…

निर्लज्जता नहीं।

और अगर कभी गलती हो जाए…

तो उसे स्वीकार करने का साहस भी रखिए।

मैं तो व्यंग्य का पात्र हूँ…

आप वास्तविक जीवन में सज्जन ही रहिए।

के बी व्यास:

वाह!

आज पहली बार लगा कि ढीठ चंद जी के भीतर भी एक समझदार आदमी किराए पर रहता है।

(स्टूडियो में ज़ोरदार ठहाके…)

… यही था आज का विशेष कार्यक्रम…

“ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4”

जहाँ सवाल मुस्कुराते हैं…
जवाब गुदगुदाते हैं…

और व्यंग्य आईना दिखाकर भी हँसाता है और कहता है , मैं हूँ…

के बी व्यास।

फिर मिलेंगे एक नए किरदार, नई मुस्कान और नए ठहाकों के साथ।

नमस्कार सा… खम्मा घणी सा!

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor