दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
मुहताजी के मंदिर में चल रहे नित्य प्रवचन के दौरान आज साध्वी दिव्यप्रभा जी एवं भाविकयशा श्रीजी महाराज साहब ने मन की चंचलता एवं उस पर नियंत्रण रखने के विषय पर श्रद्धालुओं को सारगर्भित एवं प्रेरणादायी संदेश दिया।
प्रवचन के दौरान साध्वी जी महाराज साहब ने विभिन्न दृष्टांतों के माध्यम से समझाया कि मन अत्यंत चंचल होता है और मनुष्य मोह एवं कषाय के कारण अपने जीवन में अनेक प्रकार के विकारों से घिर जाता है। उन्होंने कहा कि हमने मोह की शराब पी रखी है, मधुमक्खी रूपी कषाय हमें निरंतर काट रही है तथा पाँच इंद्रियों के 23 विष रूपी बिच्छुओं ने हमें डंक मार रखा है। ऐसे में आवश्यकता है कि हम मोह, कषाय एवं इंद्रियों के विषय-विकारों से सावधान रहें और अपने मन को नियंत्रण में रखें।
उन्होंने कहा कि मन पर नियंत्रण रखना ही श्रावक-श्राविकाओं एवं धार्मिक भाई-बहनों का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। संयमित एवं अनुशासित जीवन के माध्यम से ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक और आध्यात्मिक रूप से उन्नत बना सकता है।
मुहताजी के मंदिर में इन दिनों ‘अमृत बिंदु’ ग्रंथ एवं ‘महावैरागी जम्मू स्वामी चरित्र’ पर प्रवचन एवं वाचन का क्रम चल रहा है। साध्वी जी महाराज साहब ने जीवन को संयमित बनाने, मन की चंचलता पर नियंत्रण रखने तथा मोह एवं कषाय से दूर रहने के लिए अनेक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर ट्रस्ट के सचिव पवन मेहता ने बताया कि साध्वी जी महाराज साहब के प्रवचन सरल एवं प्रभावी दृष्टांतों के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि आज के व्यस्त जीवन में मन को नियंत्रित रखना और संयमित जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
आज के व्यासना के लाभार्थी जवरी चंद जी चोपड़ा परिवार का मंदिर ट्रस्ट की ओर से बहुमान किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, श्रावक-श्राविकाएँ एवं धार्मिक भाई-बहन उपस्थित रहे तथा सभी ने प्रवचन का धर्मलाभ प्राप्त किया।



