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Saturday, August 15, 2026, 1:55 pm

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सेवा को साधना बनाया, मरीजों को परिवार समझकर निभाया फर्ज

महात्मा गांधी अस्पताल की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी तेज कंवर सांखला को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जयपुर में सम्मान

दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

चिकित्सा क्षेत्र में कुछ सेवाएं ऐसी होती हैं, जिनका मूल्य केवल पद, जिम्मेदारी या सरकारी दायित्व से नहीं आंका जा सकता। मरीज के चेहरे पर लौटती मुस्कान, परिजन के मन में पैदा होने वाला भरोसा और अस्पताल की व्यवस्था में दिखाई देने वाली संवेदनशीलता ही ऐसी सेवा की असली पहचान होती है। महात्मा गांधी अस्पताल, जोधपुर की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी एवं किचन प्रभारी श्रीमती तेज कंवर सांखला ऐसी ही समर्पित सेवा भावना की मिसाल बनकर सामने आई हैं। वर्षों से मरीजों की सेवा को अपना कर्तव्य मानकर काम कर रहीं तेज कंवर को उनके उल्लेखनीय सेवा कार्यों के लिए 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजस्थान नर्सिंग काउंसिल भवन, जयपुर में सम्मानित किया गया।

तेज कंवर के लिए नर्सिंग महज नौकरी नहीं, बल्कि सेवा का वह माध्यम है जिसमें संवेदना, अनुशासन, जिम्मेदारी और मानवीयता चारों एक साथ दिखाई देते हैं। अस्पताल में उनकी भूमिका केवल वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी तक सीमित नहीं है। किचन प्रभारी के रूप में भी वह मरीजों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाती हैं। मरीजों के स्वास्थ्य में दवा जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उचित, स्वच्छ और समय पर मिलने वाला भोजन भी है। इस जिम्मेदारी को समझते हुए तेज कंवर अस्पताल की व्यवस्था में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभाती हैं।

मरीजों के लिए ‘नर्स’ से बढ़कर भरोसे का नाम

अस्पताल में भर्ती मरीज बीमारी, दर्द और मानसिक तनाव से गुजरता है। ऐसे समय में चिकित्सकीय उपचार के साथ संवेदनशील व्यवहार भी मरीज के लिए बहुत मायने रखता है। तेज कंवर का व्यवहार इसी मानवीय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। मरीज और उनके परिजन उनके सेवा भाव की प्रशंसा करते रहे हैं। उनकी कार्यशैली में यह भावना दिखाई देती है कि अस्पताल में आने वाला हर व्यक्ति केवल एक मरीज नहीं, बल्कि किसी परिवार की उम्मीद है।

कई वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने अस्पताल की विभिन्न जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाया है। यही कारण है कि सहकर्मियों और मरीजों के बीच उनके प्रति सम्मान का भाव लगातार मजबूत हुआ है। उनके लिए मरीज की परेशानी को समझना और यथासंभव सहयोग करना सेवा का स्वाभाविक हिस्सा है।

किचन प्रभारी की जिम्मेदारी भी चुनौतीपूर्ण

अस्पताल की किचन व्यवस्था किसी भी अस्पताल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। बड़ी संख्या में मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था, उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता, समयबद्धता और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार वितरण—इन सभी पहलुओं पर निरंतर निगरानी आवश्यक होती है। किचन प्रभारी के रूप में तेज कंवर इस जिम्मेदारी को भी पूरी सजगता से निभा रही हैं।

उनकी कार्यशैली में एक खास बात यह है कि वह प्रशासनिक जिम्मेदारी को मरीजों की जरूरत से जोड़कर देखती हैं। उनके लिए अस्पताल की व्यवस्था तभी सफल मानी जा सकती है, जब उसका सीधा लाभ मरीज तक पहुंचे। यही सोच उन्हें सामान्य कार्यशैली से अलग पहचान देती है।

सम्मान के पीछे वर्षों की सेवा

तेज कंवर सांखला की पहचान एक दिन के सम्मान से नहीं बनी।
वर्षों से अस्पताल में लगातार सेवा, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार, नर्सिंग जिम्मेदारियों का निर्वहन और किचन प्रभारी के रूप में व्यवस्था को संभालने की प्रतिबद्धता उनके कार्य जीवन की पहचान रही है। इसी सेवा भावना के चलते उन्हें पूर्व में भी कई सम्मान मिल चुके हैं।

सम्मान से बढ़ा जोधपुर का गौरव

राजस्थान नर्सिंग काउंसिल भवन, जयपुर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तेज कंवर को मिला सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि महात्मा गांधी अस्पताल और जोधपुर के लिए भी गौरव का विषय है। उनके सम्मान से अस्पताल के उन तमाम कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ा है, जो प्रतिदिन मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं।

सेवा में संवेदना हो तो सम्मान अपने आप मिलता है

तेज कंवर की कार्यशैली यह संदेश देती है कि सरकारी सेवा में पद महत्वपूर्ण है, लेकिन पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उस पद के प्रति ईमानदारी और जिम्मेदारी है। अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी का व्यवहार मरीज के अनुभव को प्रभावित करता है। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को मानवीय संवेदना के साथ निभाता है तो वह संस्था की सकारात्मक छवि का हिस्सा बन जाता है।

तेज कंवर के मामले में भी यही देखने को मिलता है। मरीजों और उनके परिजनों द्वारा उनके सेवा कार्यों की प्रशंसा उनके लिए सबसे बड़ा प्रमाण है। सम्मान समारोह में मिली पहचान ने उनके वर्षों के सेवाभाव को सार्वजनिक मंच पर नई पहचान दी है।

‘सेवा ही सम्मान’

तेज कंवर की उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने सम्मान पाने के लिए सेवा नहीं की, बल्कि सेवा करते-करते सम्मान उनके हिस्से में आया। मरीजों की संतुष्टि और सहकर्मियों का विश्वास उनके कार्य की सबसे बड़ी पूंजी है।

रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और स्टाफ ने दी बधाई

जयपुर में सम्मानित होने के बाद तेज कंवर सांखला को उनके रिश्तेदारों, शुभचिंतकों, मित्रों और महात्मा गांधी अस्पताल के स्टाफ की ओर से बधाइयां दी गईं। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका सम्मान उन सभी नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रेरणादायक है, जो कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं।

उनके सम्मान की खबर जोधपुर पहुंचने के बाद अस्पताल से जुड़े लोगों और परिचितों में भी खुशी का माहौल रहा। लोगों का कहना है कि मरीजों की सेवा को प्राथमिकता देने वाले कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलना आवश्यक है, क्योंकि इससे सेवा भावना को प्रोत्साहन मिलता है।

नर्सिंग सेवा की असली ताकत—मानवता

नर्सिंग सेवा को अक्सर चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। डॉक्टर उपचार की दिशा तय करते हैं, लेकिन मरीज के साथ लगातार रहने, उसकी छोटी-बड़ी जरूरतों को समझने और उपचार प्रक्रिया में निरंतर सहयोग करने का महत्वपूर्ण दायित्व नर्सिंग स्टाफ निभाता है। इसलिए नर्सिंग सेवा में तकनीकी दक्षता के साथ धैर्य और संवेदना भी जरूरी है।

तेज कंवर सांखला का सम्मान इसी व्यापक सेवा भावना की पहचान है। वर्षों से अस्पताल में जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने यह साबित किया है कि किसी भी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल संसाधन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि उन्हें संभालने वाले लोगों में कर्तव्य के प्रति समर्पण भी होना चाहिए।

सम्मान एक संदेश भी

सम्मान केवल उपलब्धि का प्रमाण नहीं, बल्कि आगे और बेहतर काम करने की प्रेरणा भी है। तेज कंवर सांखला को मिला यह सम्मान अस्पताल सेवा में समर्पण, अनुशासन और मानवीय व्यवहार के महत्व को रेखांकित करता है।

स्वतंत्रता दिवस पर सेवा का सम्मान, कर्म के प्रति सम्मान

स्वतंत्रता दिवस देश की स्वतंत्रता के उत्सव के साथ उन लोगों को सम्मान देने का अवसर भी है, जो अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्र और समाज की सेवा कर रहे हैं। ऐसे अवसर पर एक स्वास्थ्यकर्मी का सम्मान विशेष महत्व रखता है। क्योंकि अस्पताल में सेवा करने वाला कर्मचारी प्रतिदिन किसी न किसी परिवार की चिंता, पीड़ा और उम्मीद से रूबरू होता है।

तेज कंवर सांखला का सम्मान इसी भावना को मजबूत करता है। उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी, मरीजों के प्रति संवेदनशीलता को बनाए रखा और किचन प्रभारी के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। उनके लिए यह सम्मान वर्षों की मेहनत और सेवा भावना की सार्वजनिक स्वीकृति है।

जोधपुर की धरती से जयपुर तक पहुंचा यह सम्मान उन सभी स्वास्थ्यकर्मियों के नाम भी एक संदेश है—सेवा यदि सच्ची हो, नीयत साफ हो और जिम्मेदारी के प्रति समर्पण हो तो पहचान स्वयं बनती है। तेज कंवर सांखला की कहानी इसी सेवा, संवेदना और समर्पण की कहानी है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor