Explore

Search

Saturday, October 24, 2026, 9:54 pm

Saturday, October 24, 2026, 9:54 pm

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

आपकी थाली ही आपकी दवा, सही खान-पान से बेहतर हो सकती है सेहत और जीवन की गुणवत्ता

डॉ. माइकल ग्रेगर की पुस्तक ‘हाउ नॉट टू डाई’ में स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक आहार और बीमारियों से बचाव पर जोर

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियां गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और अपर्याप्त नींद का असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल बीमारी होने के बाद उपचार कराना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव के लिए दैनिक आदतों में सुधार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। डॉ. माइकल ग्रेगर की पुस्तक ‘हाउ नॉट टू डाई’ इसी विषय पर ध्यान केंद्रित करती है। पुस्तक का केंद्रीय संदेश है कि संतुलित, पौधों पर आधारित पौष्टिक आहार और स्वस्थ जीवनशैली व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

भोजन और स्वास्थ्य का गहरा संबंध

पुस्तक की वीडियो समरी में बताया गया है कि खान-पान का सीधा संबंध शरीर की कार्यक्षमता और कई दीर्घकालिक बीमारियों के जोखिम से है। अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, ज्यादा नमक, अतिरिक्त चीनी, तले हुए व्यंजन और जरूरत से अधिक कैलोरी का सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके विपरीत, फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और बीज शरीर को फाइबर, विटामिन, खनिज तथा अन्य उपयोगी पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इसका आशय यह नहीं कि हर बीमारी केवल भोजन के कारण होती है या खान-पान बदलने से हर रोग समाप्त हो सकता है। हालांकि, संतुलित आहार अपनाना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना अनेक बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. माइकल ग्रेगर से संबंधित यूट्यूब लिंक अब साभार पेश कर रहे हैं। ताकि उनके अनुभव का लाभ मानव जाति को मिल सके। हमारा उद्देश्य पाठकों को जागरूक करना है।

हृदय रोग और रक्तचाप से बचाव में आहार की भूमिका

हृदय रोग दुनिया की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं। रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और शारीरिक निष्क्रियता हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं। पुस्तक की समरी में फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को हृदय के अनुकूल भोजन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। फाइबर से भरपूर भोजन रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता कर सकता है। इसी प्रकार, अधिक नमक के सेवन को कम करना और संतुलित आहार अपनाना रक्तचाप के प्रबंधन में उपयोगी है। पैकेटबंद नमकीन खाद्य पदार्थों, अत्यधिक तले हुए व्यंजनों और अतिरिक्त चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन सीमित करना भी बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, हृदय रोग या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार जारी रखना चाहिए।

मधुमेह और मोटापे के प्रबंधन में उपयोगी आदतें

मधुमेह और मोटापा आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याएं हैं। असंतुलित भोजन, कम शारीरिक गतिविधि, अपर्याप्त नींद और आनुवंशिक कारक इनके विकास में भूमिका निभा सकते हैं। पुस्तक में दालों, साबुत अनाज, फल और सब्जियों को दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की सलाह दी गई है। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पेट को लंबे समय तक भरा रखने में सहायता करते हैं। इससे भोजन की मात्रा नियंत्रित करने और वजन संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। वहीं, मीठे पेय, अतिरिक्त चीनी और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी उपयोगी है। मधुमेह के मरीजों को यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल भोजन बदलने से दवाएं बंद करना सुरक्षित नहीं है। दवा या इंसुलिन में कोई भी बदलाव चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

कैंसर और अन्य बीमारियों के जोखिम पर ध्यान

पुस्तक की समरी में कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के संदर्भ में आहार और जीवनशैली की भूमिका पर चर्चा की गई है। ब्रोकोली, फूलगोभी, पत्तागोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां, लहसुन, प्याज और विभिन्न रंगों के फल पौष्टिक आहार के अच्छे विकल्प हैं। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य जैव सक्रिय तत्व शरीर के सामान्य कार्यों में योगदान देते हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ, मसाले या घरेलू नुस्खे को कैंसर का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता। कैंसर से बचाव के लिए तंबाकू से दूरी, शराब से परहेज, स्वस्थ वजन, नियमित गतिविधि और आवश्यक जांच भी महत्वपूर्ण हैं। फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान से बचना और प्रदूषण के संपर्क को कम करना जरूरी है। स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण के साथ चिकित्सकीय देखभाल भी आवश्यक है।

‘डेली डजन’ की अवधारणा

डॉ. माइकल ग्रेगर की पुस्तक का एक चर्चित विचार ‘डेली डजन’ है। इसका उद्देश्य लोगों को प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित करना है। पुस्तक में दालों, साबुत अनाज, फलों, सब्जियों, बेरी फलों, मेवों, बीजों और मसालों जैसे खाद्य समूहों पर जोर दिया गया है। इसके साथ शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली को भी महत्व दिया गया है। भारतीय भोजन में इस अवधारणा को आसानी से अपनाया जा सकता है। दाल, चना, राजमा, बाजरा, जौ, दलिया, मौसमी फल, पालक, मेथी, सरसों, अलसी और अखरोट जैसे विकल्प दैनिक आहार को विविध और पौष्टिक बना सकते हैं। महंगे विदेशी खाद्य पदार्थ खरीदना अनिवार्य नहीं है। स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थ भी संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

लिवर, किडनी और आंतों के स्वास्थ्य का महत्व

पुस्तक की समरी में लिवर, किडनी और पाचन तंत्र के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया गया है। लिवर शरीर में पोषक तत्वों के प्रसंस्करण सहित कई महत्वपूर्ण कार्य करता है, जबकि किडनी रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को छानने और शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। आहार में पर्याप्त फाइबर शामिल करना पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियां आंतों के स्वास्थ्य में योगदान देते हैं। वहीं, अत्यधिक नमक, शराब और असंतुलित भोजन से बचना उपयोगी है। किडनी या लिवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को अपनी स्थिति के अनुसार आहार संबंधी सलाह चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से लेनी चाहिए, क्योंकि सभी लोगों के लिए एक जैसा आहार उपयुक्त नहीं होता।

मानसिक स्वास्थ्य, व्यायाम और पर्याप्त नींद

स्वस्थ जीवन केवल शारीरिक बीमारियों से मुक्त रहने तक सीमित नहीं है। मानसिक संतुलन, पर्याप्त नींद, तनाव का प्रबंधन और सामाजिक संबंध भी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। पुस्तक की समरी में योग, ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास और नियमित व्यायाम को उपयोगी आदतों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रतिदिन पैदल चलना, अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करना और नियमित समय पर सोना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। ध्यान और योग कुछ लोगों को तनाव नियंत्रित करने में सहायता देते हैं। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना तथा सकारात्मक सामाजिक संबंध बनाए रखना भी भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

स्वस्थ जीवन की शुरुआत छोटे बदलावों से

पौष्टिक जीवनशैली अपनाने के लिए एक साथ सभी आदतें बदलना जरूरी नहीं है। इसकी शुरुआत छोटे कदमों से की जा सकती है। प्रतिदिन भोजन में एक अतिरिक्त फल शामिल करना, सब्जियों की मात्रा बढ़ाना, साबुत अनाज चुनना, नमक और अतिरिक्त चीनी कम करना तथा नियमित पैदल चलना उपयोगी शुरुआत हो सकती है। पर्याप्त पानी पीना, नींद पूरी करना, तंबाकू से दूर रहना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी जरूरी है। किसी गंभीर बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

बेहतर स्वास्थ्य के लिए जागरूक चुनाव जरूरी

‘हाउ नॉट टू डाई’ का मुख्य संदेश है कि हमारी दैनिक आदतें स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव का प्रबंधन और नशे से दूरी स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव हैं।

यह समझना भी आवश्यक है कि स्वस्थ जीवनशैली चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि उसका महत्वपूर्ण सहयोगी है। बीमारी होने पर सही जांच, समय पर उपचार और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना उतना ही जरूरी है। अंततः स्वस्थ जीवन का रास्ता किसी चमत्कारी भोजन में नहीं, बल्कि नियमित रूप से अपनाई गई संतुलित आदतों, जागरूक निर्णयों और अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी में निहित है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor