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Thursday, April 16, 2026, 9:12 pm

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राइजिंग भास्कर स्थापना दिवस स्टोरी 20…देश की आजादी में मारवाड़ का योगदान

राखी पुरोहित. जोधपुर

स्वतंत्रता आंदोलन में मारवाड़ का बड़ा योगदान रहा है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने न केवल देश के प्रत्येक हिस्से को एकजुट किया, बल्कि यह आंदोलन हर राज्य, शहर और ग्राम स्तर पर एक गहरी छाप छोड़ गया। राजस्थान का जोधपुर, जैसलमेर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी विशिष्ट भूमिका के लिए जाना जाता है। जोधपुर के वीर और संघर्षशील नागरिकों ने न केवल सांस्कृतिक और सामाजिक बदलावों का समर्थन किया, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़े और स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस आलेख में हम विस्तार से देखेंगे कि जोधपुर और जैसलमेर के लोगों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान दिया, उनके संघर्ष, और उनका आंदोलन में स्थान।

1. जोधपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

राजस्थान का जोधपुर एक ऐतिहासिक शहर है, जो अपने किलों, महलों और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। जोधपुर को सूर्यनगरी के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर का इतिहास राजस्थान के अन्य हिस्सों के समान ही संघर्षों और वीरता से भरा हुआ है। जोधपुर के लोग हमेशा से अपनी स्वायत्तता और स्वतंत्रता को लेकर जागरूक रहे हैं।

ब्रिटिश शासन के दौरान, जोधपुर एक राजपूत रियासत थी, जो जोधपुर के महाराज द्वारा शासित थी। हालांकि जोधपुर के शासक ब्रिटिश साम्राज्य के साथ संधि में थे, फिर भी यहां के लोग और कई महत्वपूर्ण नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।

2. स्वतंत्रता संग्राम में जोधपुर वासियों का योगदान

स्वतंत्रता संग्राम में जोधपुर वासियों का योगदान बहुआयामी था। कई स्वतंत्रता सेनानियों ने इस भूमि से उत्पन्न होकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया और उन्हें कड़ी चुनौती दी। जोधपुर के नागरिकों ने कई आंदोलनों में भाग लिया, जैसे कि असहमति, विद्रोह, सत्याग्रह, और राष्ट्रवादी आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी।

3. महात्मा गांधी और जोधपुर

महात्मा गांधी का भारत के विभिन्न हिस्सों में व्यापक प्रभाव था और जोधपुर भी इससे अछूता नहीं था। गांधीजी के असहयोग आंदोलनों और सत्याग्रह के सिद्धांत ने जोधपुर में भारी समर्थन प्राप्त किया। 1919 में रॉलेट एक्ट के विरोध में जोधपुर में एक बड़ा आंदोलन हुआ, जिसमें कई स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन में जोधपुर के नागरिकों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध जताया और सत्याग्रह का पालन किया। गांधीजी ने अपने आंदोलनों के माध्यम से भारतीय जनता को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी, और जोधपुर में भी इसका गहरा असर पड़ा।

4. जोधपुर और जैसलमेर में असहयोग आंदोलन

असहयोग आंदोलन ने पूरे राजस्थान में, खासकर जोधपुर में, एक महत्वपूर्ण जगह बनाई। 1919 में रॉलेट एक्ट के विरोध में जोधपुर के नागरिकों ने व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन किया। जोधपुर के महान स्वतंत्रता सेनानी  और जैसलमेर के स्वतन्त्रता सेनानियों को कभी भुला नहीं सकते. सागरमल गोपा, बालमुकुंद बिस्सा, जेठमल व्यास, जयनारायण व्यास, लालचंद जोशी जैसे कई महान  लोग जंगे आजादी में कूद पड़े.

5. चौरी चौरा और जोधपुर का योगदान

चौरी चौरा घटना के बाद, गांधीजी ने असहमति आंदोलन को स्थगित कर दिया, लेकिन जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानियों ने उनका मार्गदर्शन स्वीकार किया और अपनी स्वतंत्रता की लहर को बनाए रखा। जोधपुर के कुछ प्रमुख नेता ने इस समय ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह की अगुवाई की। उनका उद्देश्य केवल स्वतंत्रता प्राप्ति ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और विश्वास को पुनः जीवित करना भी था।

6. सुभाष चंद्र बोस और जोधपुर

स्वतंत्रता संग्राम में सुभाष चंद्र बोस का योगदान बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने  आजाद हिन्द फौज के गठन के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जोधपुर के क्रन्तिकारी नेताओं पर भी सुभाष चंद्र बॉस का असर पड़ा. कई सैनिकों ने  स्वयं को समर्पित किया। ये सेनानी जोधपुर की धरती पर पैदा हुए थे, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान की कुर्बानी दी। संघर्ष केवल राष्ट्रीय आंदोलन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक राज्य आंदोलन भी था। जोधपुर में प्रजामंडल आंदोलन के माध्यम से यहां के शासकों के खिलाफ विरोध किया गया। प्रजामंडल एक राजनीतिक संगठन था, जिसने जोधपुर के नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जोधपुर के शासक के खिलाफ लोगों की आवाज उठाना था और उनके अधिकारों की रक्षा करना था। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप जोधपुर के लोगों ने रियासत की स्थिति को सुधारने की दिशा में कई कदम उठाए। जैसलमेर में भी जेठ मल व्यास ने प्रजा मंडल की गतिविधि को आगे बढ़ाया.

7. जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्रों का योगदान

जोधपुर का ग्रामीण इलाका भी स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने से पीछे नहीं रहा। जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान और मजदूरों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। कई किसान नेता ने किसानों के अधिकारों के लिए आंदोलन किया और उन्हें अपनी ताकत के बारे में जागरूक किया।

इसके अलावा, जोधपुर के ग्रामवासियों ने भी गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया और खादी का उपयोग शुरू किया। इन गांवों ने स्वराज की उम्मीद और विचार को अपने जीवन में उतारा और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरोध खड़ा किया।

8. नौजवानों का योगदान

जोधपुर और जैसलमेर के युवाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवा छात्रों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन किए। जोधपुर के कई छात्र नेताओं ने जोधपुर में छात्र संगठनों की स्थापना की और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया। सागरमल गोपा को जेल में जिन्दा जला दिया गया. आजादी के दीवाने मिट गए पर झुके नहीं.इन युवाओं ने जोधपुर के कालेजों और स्कूलों में क्रांतिकारी विचारों को फैलाया और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ राष्ट्रीय जागरूकता पैदा की। उनकी इन कोशिशों से जोधपुर के विभिन्न हिस्सों में एक नई क्रांति की शुरुआत हुई, जो अंततः देशव्यापी स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बन गई।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जोधपुर की महिलाएं भी इस संघर्ष से अछूती नहीं रही। उन्होंने न केवल सामाजिक और राजनीतिक बदलावों का समर्थन किया, बल्कि संघर्ष में भाग भी लिया.जोधपुर और जैसलमेर का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान न केवल इस क्षेत्र के लिए, बल्कि सम्पूर्ण भारत के लिए महत्वपूर्ण था। यहां के नागरिकों, किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अपने संघर्ष को प्रकट किया। जोधपुर में कई आंदोलनों और संघर्षों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी, और यह साबित किया कि जोधपुर के लोग स्वतंत्रता की ओर बढ़ने के लिए पूरी तरह से समर्पित थे।

आज जब हम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरता और संघर्षों का स्मरण करते हैं, तो जोधपुर वासियों का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। जोधपुर की धरती ने उन सेनानियों को जन्म दिया जिन्होंने न केवल राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लिया, बल्कि भारतीय संस्कृति और समाज की नींव को भी मजबूत किया। जोधपुर का योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में हमेशा जीवित रहेगा। जैसलमेर को भी वीरों की धरती कहा जायेगा. यहां के लोगों ने कदम पीछे नहीं हटाए. जेठ मल व्यास को जैसलमेर से निकाल दिया गया. पर वे झुके नहीं.

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor